भारत का ई-कॉमर्स बाजार पिछले दशक में जितनी तेजी से बदला है, उतना किसी अन्य क्षेत्र ने नहीं देखा। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है मीशो। वर्ष 2015 में एक छोटे रिसेलिंग प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई यह कंपनी अब बाज़ार की उन दिग्गज कंपनियों के सामने खड़ी है, जिन्होंने वर्षों से ऑनलाइन व्यापार पर कब्जा बनाए रखा था। आर्थिक चुनौतियों, लगातार बढ़ते खर्च, मार्केटिंग पर बड़े निवेश और घाटे के बावजूद मीशो ने एक बड़ा स्थान बनाया है। यही कारण है कि इसका आईपीओ वर्तमान समय में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

Meesho IPO का आकार और संरचना
कंपनी लगभग ₹5,421 करोड़ का पब्लिक ऑफर लेकर सामने आई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को कंपनी का हिस्सा बनने का मौका देना है, ताकि आगे के विस्तार के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इस इश्यू के दो प्रमुख हिस्से हैं। पहला भाग ₹4,250 करोड़ के नए शेयरों की बिक्री से जुड़ा है। इसके माध्यम से जुटाई गई राशि कंपनी के विस्तार में उपयोग होगी। दूसरा हिस्सा ऑफर फॉर सेल विंडो है, जिसके अंतर्गत पहले से मौजूद निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक भाग बेचेंगे।
आईपीओ को 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक आवेदन के लिए खोला गया था। प्राइस बैंड ₹105 से ₹111 तय किया गया है। यदि कोई निवेशक आवेदन करना चाहता है तो उसका न्यूनतम लॉट 135 शेयर्स का होगा। इसके अंतर्गत कुल 75% भाग संस्थागत निवेशकों के लिए, 15% उच्च नेट वर्थ व्यक्तियों के हिस्से में और 10% खुदरा निवेशकों के लिए सुरक्षित रखा गया है।
कहां खर्च होगा जुटाया गया पैसा
मीशो अपने कारोबार को तकनीकी और संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काफी समय से प्रयास कर रही है। इस आईपीओ के जरिए कंपनी कुल ₹1,390 करोड़ अपनी सहायक कंपनी के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में खर्च करेगी। ई-कॉमर्स में कामयाबी का बड़ा हिस्सा तेज डिलीवरी, सुरक्षित पेमेंट सिस्टम और बाजार में मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता पर निर्भर करता है। क्लाउड इंफ्रा मजबूत होने से प्लेटफॉर्म बड़े स्तर पर लोड सह सकता है और तकनीकी खामियों से बच सकता है।
इसी प्रकार लगभग ₹480 करोड़ कर्मचारियों के वेतन और मानव संसाधन विकास पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा मार्केटिंग के लिए ₹1,020 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। इस राशि से कंपनी ब्रांड वैल्यू बढ़ाने, ग्राहकों तक पहुंच बनाने और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले खुद को बेहतर स्थापित करने में निवेश करेगी। साथ ही शेष फंड अधिग्रहण के अवसरों में खर्च किया जाएगा, जिससे मीशो इनऑर्गेनिक तरीके से अपना विस्तार कर सके।
कंपनी का वित्तीय स्वास्थ्य
किसी भी आईपीओ को समझने के लिए उसकी वित्तीय स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पिछले तीन वित्त वर्षों के आंकड़े काफी दिलचस्प हैं। वित्त वर्ष 2023 में मीशो को ₹1,671.90 करोड़ का घाटा हुआ था। यह घाटा अगले वर्ष घटकर ₹327.64 करोड़ रह गया, जिससे उम्मीदें बढ़ीं। लेकिन इस राहत के तुरंत बाद वित्त वर्ष 2025 में घाटा बढ़कर ₹3,941.71 करोड़ तक पहुंच गया। यह गिरावट कई कारणों का परिणाम है जिनमें सर्विस खर्च, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, ऑफरिंग डिस्काउंट्स और ब्रांड पोजिशनिंग शामिल हैं।
ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि इसके बावजूद कंपनी पर कर्ज नहीं है। यानी कंपनी लगातार निवेशकों की पूंजी से संचालन कर रही है। दूसरी ओर कुल आय में लगातार वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2023 से 2025 तक कंपनी का राजस्व करीब 30% CAGR के साथ बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ही ₹5,800 करोड़ से अधिक की आय दर्ज की जा चुकी है।
ई-कॉमर्स में कंपनी की स्थिति
आज भारत में ई-कॉमर्स आना किसी लाइफस्टाइल आदत से कम नहीं रहा। एक समय था जब केवल कुछ विशेष श्रेणियों में लोग ऑनलाइन खरीदारी करते थे, लेकिन महामारी के बाद उपभोक्ता वर्ग पूरी तरह बदल गया। इस बदलाव का फायदा मीशो को मिला। मीशो ने भारी छूट और छोटे विक्रेताओं को जोड़ने की रणनीति अपनाई। इससे छोटे शहरों और कस्बों में प्लेटफॉर्म की पकड़ मजबूत हो गई।
रिपोर्टों के अनुसार पिछले 12 महीनों में मीशो भारत का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनकर उभरा। कंपनी का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क वाल्मो के नाम से संचालित है, जिसने डिलीवरी की गति और पहुंच को बड़े पैमाने पर बढ़ाया। साथ ही यह प्लेटफॉर्म छोटे व्यापारियों को बिना कमीशन बिक्री की सुविधा देता है, जिससे विक्रेता अपनी कीमतों में खुद परिवर्तन कर सकते हैं।
ग्राहकों तक पहुंच और तकनीकी विस्तार
मीशो की सफलता की एक बड़ी वजह इसका डेटा आधारित संचालन है। हर खरीद, हर क्लिक और हर वितरण प्रक्रिया का विश्लेषण होता है। इसी के आधार पर कंपनी ग्राहकों की पसंद, ऑफर्स के प्रभाव और बिक्री के बदलावों को समझती है। तकनीकी विस्तार भी इसी कारण तेजी से बढ़ रहा है।
लॉजिस्टिक्स में सुधार से मीशो ने बड़े दिग्गजों को भी चुनौती दी है। जहां अन्य प्लेटफॉर्म अपने डिलीवरी शुल्क मॉडल बदलते रहे, वही मीशो ने कम खर्च और कम समय में डिलीवरी सुनिश्चित करने पर काम किया।
क्या निवेशक इस आईपीओ में पैसे लगाएं
यह सवाल हर निवेशक के लिए आवश्यक है। कई विश्लेषक मानते हैं कि कंपनी अभी लाभ नहीं कमा रही, लेकिन बाजार की स्थिति और ई-कॉमर्स की भविष्य संभावनाएं विशाल हैं। विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए जिनका लक्ष्य लंबी अवधि का रिटर्न है, यह आईपीओ बेहतर माना जा रहा है।
अनुसंधान रिपोर्टों के मुताबिक मीशो का प्राइस-टू-सेल्स अनुपात 5.3 गुना है। कंपनी का मार्केटप्लेस कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन भी FY26 के शुरुआती समय में 3.6% देखा गया। यदि कंपनी रणनीतिक रूप से खर्च को नियंत्रित कर लाभ तक पहुंचती है तो आगे आने वाले समय में इसका मूल्यांकन और भी मजबूत हो सकता है।
