19 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के पवित्र शहर पुट्टपर्थी ने एक ऐतिहासिक दृश्य देखा। दिवंगत आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम ने केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और भावनात्मक स्तर पर यादगार पल भी रचे।
मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, भारत रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, वैश्विक पहचान रखने वाली अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन और साईं बाबा ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
लेकिन इन सबके बीच दो क्षण सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में रहे—
- ऐश्वर्या राय बच्चन का प्रधानमंत्री मोदी के पांव छूना
- और प्रधानमंत्री मोदी तथा चंद्रबाबू नायडू के बीच दिखी अप्रत्याशित लेकिन मजबूत राजनीतिक केमिस्ट्री
इन पलों ने देशभर में चर्चा की नई लहर पैदा कर दी। आइए समझते हैं पूरा घटनाक्रम विस्तार से और जानते हैं कि कैसे आध्यात्मिक आयोजन ने राजनीतिक संकेतों को भी नया आयाम दिया।

श्री सत्य साईं बाबा की शताब्दी : श्रद्धा, सेवा और अध्यात्म का अद्वितीय उत्सव
पुट्टपर्थी के विशाल मैदान में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। सफेद और केसरिया परिधानों में सजे भक्त, विदेशी अनुयायी, संस्थान के स्वयंसेवक और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय गणमान्यजनों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को अत्यंत भव्य बना दिया।
सत्य साईं बाबा ने अपने जीवन में—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- मानव सेवा
- प्रेम और शांति
- सार्वभौमिक सद्भावना
जैसे मूल्यों को सामाजिक सेवा की दिशा में बदलकर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। यह जन्मशताब्दी समारोह उन्हीं मूल्यों और उनके जीवन के संदेशों का प्रतीक बनकर उभरा।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं स्वीकार किया—
“यह जन्मशताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं है बल्कि मानवता के लिए एक दिव्य वरदान है।”
ऐश्वर्या राय बच्चन का भावुक क्षण : जब छूते पैर ने संदेश दिया विनम्रता का
कार्यक्रम के प्रारंभिक हिस्से में जब प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे, तो एक अप्रत्याशित और भावुक पल सामने आया। बॉलीवुड सुपरस्टार और भारत की पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय बच्चन ने आगे बढ़कर प्रधानमंत्री मोदी के चरण स्पर्श किए।
इस दृश्य ने वहां उपस्थित लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को भावुक कर दिया।
ऐश्वर्या हमेशा से भारतीय मूल्यों, संस्कृति और शिष्टाचार की मिसाल रही हैं।
कई लोगों ने इसे “संस्कार”, “सम्मान”, “विनम्रता” और “व्यक्तित्व के प्रति आदर” का प्रतीक बताया।
सोशल मीडिया पर यह क्षण वायरल हुआ, और देशभर में इस पर लाखों प्रतिक्रियाएं आईं।
सचिन तेंदुलकर का नमस्कार : सम्मान और सरलता की मिसाल
ऐश्वर्या के ठीक बाद, अगला दृश्य मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का रहा।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने हाथ जोड़कर नमस्कार किया।
हालांकि मंच पर उनकी उपस्थिति लंबे समय से तय थी, लेकिन जिस सरलता और सहजता से उन्होंने प्रधानमंत्री का अभिवादन किया, उसने इस दृश्य को और अधिक विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी और चंद्रबाबू नायडू की केमिस्ट्री : राजनीति के संकेतों से भरा पल
हालांकि समारोह आध्यात्मिक था, लेकिन राजनीति हमेशा अपनी जगह बनाए रखती है।
विशेषकर जब दो करिश्माई नेता—
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू—
एक मंच पर साथ बैठें, साथ हंसें, साथ बातचीत करें।
दोनों नेताओं की बातचीत और सौहार्द्रता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।
बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के तुरंत बाद मोदी-नायडू की यह मुलाकात कई तरह के राजनीतिक संकेतों का केंद्र बन गई—
- क्या केंद्र–राज्य संबंधों में नई मजबूती आएगी?
- क्या 2026 की राजनीति में नायडू की भूमिका और अहम होगी?
- क्या आंध्र प्रदेश में केंद्र की योजनाओं को बड़ा समर्थन मिलेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह ‘केमिस्ट्री’ विपक्ष के लिए चिंता का बड़ा संकेत है।
मंच पर शक्तिशाली उपस्थिति : एक ही पंक्ति में देश की बड़ी हस्तियां
मंच पर प्रधानमंत्री मोदी, CM नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, सचिन तेंदुलकर और ऐश्वर्या राय बच्चन—
ये सभी एक साथ उपस्थित थे।
यह दृश्य भारतीय सामाजिक संरचना के उस रंग को दर्शाता है जहां—
आध्यात्मिकता, राजनीति, कला और खेल—सब एकसाथ खड़े होते हैं और एक विचार को मजबूत करते हैं— “वसुधैव कुटुंबकम”।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन : ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और सेवा की शक्ति पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री के भाषण में भावना भी थी, दर्शन भी और प्रेरणा भी।
उन्होंने कहा—
“सत्य साईं बाबा का जीवन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत स्वरूप था। उनका जन्मशताब्दी वर्ष सार्वभौमिक प्रेम, शांति और सेवा का महापर्व बन गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से—
- 100 रुपये का स्मारक सिक्का
- एक विशेष डाक टिकट
जारी किया गया है, जो बाबा की सेवा परंपरा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है।
कार्यक्रम का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव
पूरे पुट्टपर्थी का वातावरण इस आयोजन के कारण दिव्य और ऊर्जामय बना रहा।
देशभर से आए कलाकारों ने—
- भजन
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- ध्यान व शांति प्रार्थनाएं
के माध्यम से बाबा के जीवन संदेश को नए रूप में प्रस्तुत किया।
जनमानस की प्रतिक्रिया : सोशल मीडिया पर कार्यक्रम छा गया
पूरे दिन #SathyaSaiCentenary, #PMModi, #AishwaryaRai, #SachinTendulkar जैसे हैशटैग ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रेंड करते रहे।
अधिकांश प्रतिक्रियाएं कार्यक्रम की विशालता, विनम्रता और राजनीतिक केमिस्ट्री पर केंद्रित थीं।
लोगों ने कहा कि ऐसा दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है जब आध्यात्मिकता और राजनीति इतनी सहजता से जुड़ते हैं।
समापन : एक ऐसा आयोजन जिसने संदेश, इतिहास और राजनीति—सबकुछ बदल दिया
यह समारोह सिर्फ एक आध्यात्मिक आयोजन नहीं था।
यह एक ऐसा क्षण था जिसने—
- भारतीय संस्कृति की गहराई
- राजनीति के नए संकेत
- सेलिब्रिटी उपस्थिति की चमक
- और मानवीय भावनाओं की संवेदनशीलता
को एक मंच पर लाकर, देश के सामने एक प्रेरणादायक तस्वीर पेश की।
ऐश्वर्या का सम्मान, सचिन का विनम्रता, नायडू और मोदी की केमिस्ट्री, और सत्य साईं बाबा का संदेश—
इन सबने मिलकर इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
