मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 18 नवंबर 2025 का दिन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की इस अहम कैबिनेट बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों—कृषि, सामाजिक न्याय, आयुष स्वास्थ्य सेवाएं, वैज्ञानिक शोध, विधिक सेवा, वेतनमान पुनरीक्षण और वित्तीय प्रबंधन—को नई दिशा देने वाले कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ शुरू हुई, जिसने इस महत्वपूर्ण सत्र को एक संवेदनशील और प्रेरक माहौल प्रदान किया। यह केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं थी, बल्कि मध्य प्रदेश के भविष्य की मजबूत नींव रखने वाली नीतिगत प्रक्रिया थी जिसमें आम नागरिकों, किसानों, बच्चों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हितधारकों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखा गया।

प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में बड़े बदलाव—किसानों को सोलर सिंचाई में मिलेगा अधिक लाभ
इस कैबिनेट बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय किसानों से जुड़ा रहा। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए किसानों के लिए सोलर पंपों की बढ़ी हुई क्षमता की सुविधा उपलब्ध कराने पर मुहर लगाई।
इस संशोधित नीति के तहत 3 एचपी के अस्थाई विद्युत कनेक्शन वाले किसानों को अब 5 एचपी का विकल्प मिल सकेगा, जबकि 5 एचपी वालों को 7.5 एचपी क्षमता का सोलर पंप उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सब्सिडी के प्रावधान को और स्पष्ट करते हुए बताया कि:
- किसान को केवल 10% अंश देना होगा
- सरकार 90% अनुदान प्रदान करेगी
यह संशोधन न केवल खेती में सिंचाई की समस्या को दूर करेगा बल्कि बिजली पर निर्भरता घटाकर सतत ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहित करेगा। सोलर पंपों की स्थापना से राज्य में विद्युत पंपों पर आने वाले अनुदान का भार कम होगा और बिजली वितरण कंपनियों की हानियों को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
24 जनवरी 2025 से प्रदेश में लागू इस योजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम (MPUVN) द्वारा किया जा रहा है। इसे केंद्र की कुसुम-B योजना का राज्य संस्करण माना जा सकता है, जिसे और बेहतर बनाकर किसानों की आर्थिक शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
मिशन वात्सल्य योजना—बच्चों के संरक्षण और संवर्धन के लिए 1022 करोड़ का बड़ा निवेश
कैबिनेट की बैठक में बच्चों के संरक्षण और देखभाल से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मिशन वात्सल्य योजना के तहत गैर संस्थागत सेवा योजना को अगले 5 वर्षों तक सभी जिलों में जारी रखा जाएगा। इसके अंतर्गत आने वाली योजनाएं हैं—
- स्पॉन्सरशिप
- फॉस्टर केयर
- आफ्टर केयर
इन योजनाओं से कौन लाभान्वित होगा?
इस योजना का लाभ उन बच्चों को मिलेगा जो:
- विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्त माता के बच्चे
- असाध्य बीमारी वाले माता-पिता के बच्चे
- प्राकृतिक आपदा के पीड़ित
- बाल श्रमिक
- बाल वेश्यावृत्ति के शिकार
- एड्स पीड़ित
- सड़क पर रहने वाले
- घर से भागे बच्चे
- शोषण और दुर्व्यवहार के शिकार
- निर्योग्यत वाले बच्चे
इस योजना का कुल खर्च 1022 करोड़ 40 लाख रुपये तय किया गया है
- केंद्रांश – 613 करोड़ 44 लाख
- राज्यांश – 408 करोड़ 96 लाख
यह योजना लगभग 33 हजार 346 बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। 18 वर्ष पूरे कर चुके युवाओं को आफ्टर केयर के तहत रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार—12 जिलों में 373 नए पद
प्रदेश में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने 373 नए नियमित पदों और 806 मानव संसाधन सेवाओं को मंजूरी दी ये पद 50 बिस्तरीय आयुष अस्पतालों और 30 बिस्तरीय चिकित्सालय (बड़वानी) में बनाए जाएंगे। इससे आयुर्वेद, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा आदि क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत होंगी।
कौन-कौन से पद स्वीकृत हुए?
- प्रथम श्रेणी – 52 पद
- द्वितीय श्रेणी – 91
- तृतीय श्रेणी – 230
नियमित पदों पर कुल वार्षिक खर्च 25 करोड़ 57 लाख रुपये होगा। कर्मचारियों का प्रबंधन राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से होगा।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद—वैज्ञानिकों की भर्ती के रास्ते खुले
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण संशोधनों और अनुमोदनों को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली। प्रदेश में विज्ञान की प्रगति को गति देने के लिए वैज्ञानिकों और अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों के नियमों का अनुमोदन किया गया।
प्रदेश के वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़े प्रमुख केंद्र—
- सुदूर संवेदन उपयोग केंद्र
- ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र
- मौसम परिवर्तन अनुसंधान केंद्र
- अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र
- उन्नत शोध एवं उपकरण सुविधा केंद्र
इन सभी केंद्रों के लिए योग्य वैज्ञानिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य है। 11 मई 2015 को लगाई गई भर्ती रोक हटा दी गई है। अब नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे प्रदेश में वैज्ञानिक नवाचार की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को सातवें वेतनमान का लाभ
यह निर्णय लंबे समय से लंबित था। अंतत: कैबिनेट ने सहमति दी कि:
- मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ मिलेगा
- इससे लगभग 93 लाख रुपये का एरियर भार आएगा
यह निर्णय इस संस्थान में काम कर रहे अधिकारियों और वैज्ञानिकों के मनोबल को बढ़ाएगा और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता करने वाले मेडिकल विशेषज्ञों की गुणवत्ता को भी मजबूत करेगा।
सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड योजना—वित्त विभाग को सौंपा गया क्रियान्वयन
राज्य में सामाजिक प्रभाव वाले निवेश—Social Impact Bond—की योजना में बदलावों को मंजूरी दी गई। अब:
- आयुक्त, संस्थागत वित्त को राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का सदस्य सचिव नामित किया गया
- 100 करोड़ का बजट अब सामाजिक न्याय विभाग से हटाकर वित्त विभाग के बीसीओ – आयुक्त संस्थागत वित्त में स्थानांतरित किया गया
- तकनीकी एजेंसी के चयन की जिम्मेदारी परियोजना क्रियान्वयन विभाग को दी गई
इससे योजना के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता में सुधार होगा।
आगर-मालवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिए नए पद
नए जिले आगर-मालवा में विधिक सेवा प्राधिकरण के संचालन के लिए 9 नए पदों की स्वीकृति दी गई। इनमें शामिल हैं—
- सचिव – 1
- जिला विधिक सहायता अधिकारी –1
- सहायक ग्रेड-2 –1
- सहायक ग्रेड-3 –2
- आदेश तामीलकर्ता –2
- भृत्य –2
कुल वार्षिक भार – 59 लाख 42 हजार रुपये
इससे जिले में कानूनी सहायता सेवाएं मजबूत होंगी।
समापन
मोहन कैबिनेट की यह बैठक कई दृष्टियों से ऐतिहासिक रही। किसानों से लेकर बच्चों तक, वैज्ञानिकों से लेकर डॉक्टरों तक, विधिक सेवाओं से लेकर सामाजिक न्याय तक—हर क्षेत्र को नई नीतियों के माध्यम से राज्य सरकार ने मजबूत करने का प्रयास किया है।
ये निर्णय केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि मध्यप्रदेश को एक ऊर्जावान, वैज्ञानिक, संवेदनशील, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में एक लंबा कदम हैं।
