रूस की राजधानी मॉस्को में हाल ही में सैन्य खुफिया विभाग के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर एलेक्सेव पर एक गंभीर और जानलेवा हमला हुआ है। इस हमले में जनरल एलेक्सेव को कई गोलियां लगीं, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में मॉस्को के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने रूस में सैन्य सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

जानकारी के अनुसार, यह हमला मॉस्को के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के एक अपार्टमेंट में हुआ। अज्ञात हमलावर ने अचानक एलेक्सेव पर गोलियां चला दीं। हमले के बाद रूसी पुलिस, खुफिया एजेंसियां और विशेष जांच इकाइयां तुरंत सक्रिय हो गईं और इस गंभीर मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच शुरू कर दी गई। मॉस्को की जांच समिति की प्रवक्ता स्वेतलाना पेत्रेंको ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव कई सालों से रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी के प्रथम उप प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।
इस हमले का समय इसलिए भी अहम है क्योंकि यह घटना यूक्रेन में चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच अबू धाबी में हुई दो दिवसीय वार्ता के अगले दिन सामने आई। इस वार्ता में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सैन्य खुफिया विभाग के प्रमुख एडमिरल इगोर कोस्त्युकोव ने किया था। यह हमला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि युद्ध की पृष्ठभूमि में सुरक्षा की स्थिति कितनी नाजुक है और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की प्रक्रिया पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
रूस की सरकार ने इस हमले की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। रूस ने कई बार पूर्व में भी यूक्रेन पर अपने देश में सैन्य अधिकारियों और सार्वजनिक हस्तियों की हत्याओं का आरोप लगाया है। कुछ हत्याओं की जिम्मेदारी यूक्रेन ने ली भी है। हालांकि, इस बार लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव पर हुए हमले के सिलसिले में यूक्रेन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह हमला पहले से हो रही घटनाओं के सिलसिले में गंभीर है। दिसंबर 2025 में रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के परिचालन प्रशिक्षण निदेशालय के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फानिल सरवरोव की कार बम हमले में मौत हो गई थी। अप्रैल 2025 में जनरल स्टाफ के मुख्य परिचालन विभाग के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल यारोस्लाव मोस्कालिक का अपार्टमेंट के बाहर खड़ी कार में विस्फोट में निधन हो गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में परमाणु, जैविक और रासायनिक सुरक्षा बलों के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की हत्या उनके अपार्टमेंट के बाहर इलेक्ट्रिक स्कूटर में हुए विस्फोट में हुई।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि रूस में उच्च स्तर के सैन्य अधिकारी लगातार सुरक्षा खतरे में हैं। मॉस्को में हालिया हमले ने यह भी दर्शाया कि सैन्य खुफिया अधिकारियों पर होने वाले हमले सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती हैं। रूस के आंतरिक और बाहरी खुफिया तंत्र इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह हमला किसी विदेशी ताकत द्वारा योजनाबद्ध था या इसका संबंध आंतरिक राजनीतिक संघर्ष से है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला रूस-यूक्रेन संघर्ष में नई चुनौती पेश कर सकता है और दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। साथ ही, इस हमले के बाद रूस अपने सैन्य और खुफिया नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए कदम उठा सकता है। मॉस्को में लगातार हो रहे इन हाई-प्रोफाइल हमलों ने रूस में सैन्य अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव के कार्यकाल और योगदान पर भी ध्यान देना जरूरी है। 2011 से सैन्य खुफिया विभाग में उप प्रमुख के रूप में सेवा देने वाले एलेक्सेव ने कई रणनीतिक मिशनों का नेतृत्व किया है। उनके घायल होने की खबर ने सैन्य और राजनीतिक जगत में गहरा सदमा पहुंचाया है।
रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के बीच, यह हमला एक गंभीर संकेत है कि सैन्य सुरक्षा और खुफिया संरचनाओं में कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं। मॉस्को की जांच समिति इस हमले के पीछे किसी भी संभावित विदेशी और आंतरिक षड़यंत्र की संभावना पर विचार कर रही है।
इस हमले के बाद, रूस के सैन्य नेतृत्व ने देश की सुरक्षा बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाने की योजना बनाई है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन वार्ता पर भी इस हमले का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। रूस ने इस हमले के बाद यूक्रेन के साथ युद्ध की स्थिति में सतर्कता बढ़ा दी है।
इस प्रकार, मॉस्को में लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव पर हमले ने ना केवल रूस के भीतर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रूस-यूक्रेन तनाव पर भी एक गहरा प्रभाव डाला है। यह घटना वैश्विक स्तर पर सैन्य खुफिया और सुरक्षा नेटवर्क की नाजुकता को उजागर करती है।
