21वीं सदी में वैश्विक स्तर पर धर्म के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। पश्चिमी देशों में धर्म का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, जबकि दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट के देशों में धर्म आज भी लोगों के रोजमर्रा जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हाल ही में यूएस न्यूज द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में दुनिया के सबसे धार्मिक देशों की सूची तैयार की गई, जिसमें भारत टॉप 5 में शामिल है, लेकिन सबसे धार्मिक देश का शीर्ष स्थान सऊदी अरब को मिला।

यूएस न्यूज और सर्वेक्षण का महत्व
यूएस न्यूज ने यह सर्वेक्षण WWP और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के व्हार्टन स्कूल के सहयोग से किया। इसमें करीब 17 हजार लोगों से पूछताछ की गई और यह समझने का प्रयास किया गया कि लोग धर्म के प्रति कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। सर्वेक्षण ने यह भी उजागर किया कि केवल धार्मिक पहचान ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन और समाज में धर्म की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया।
टॉप 10 सबसे धार्मिक देश
सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के 10 सबसे धार्मिक देशों में सऊदी अरब पहले स्थान पर है। इसकी कुल जनसंख्या लगभग 36 मिलियन है। इसके बाद इजराइल, ईरान, भारत, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्त्र, कतर, जॉर्डन, तुर्की और ओमान शामिल हैं। इस सूची में कोई भी अमेरिकी या यूरोपीय देश शामिल नहीं है।
शीर्ष 10 देशों की सूची:
- सऊदी अरब – 36 मिलियन
- इजराइल – 10 मिलियन
- ईरान – 92-93 मिलियन
- भारत – 1.4 बिलियन
- संयुक्त अरब अमीरात – 10.9-11 मिलियन
- मिस्त्र – 119-120 मिलियन
- कतर – 3.15-3.17 मिलियन
- जॉर्डन – 11.6-11.7 मिलियन
- तुर्की – 87.8-87.9 मिलियन
- ओमान – 5.6 मिलियन
भारत की स्थिति
भारत विश्व के सबसे धार्मिक देशों की सूची में टॉप 5 में शामिल है। देश की विशाल जनसंख्या, विविध धार्मिक मान्यताएँ और आस्था ने इसे वैश्विक स्तर पर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और अन्य धार्मिक समुदायों का मिश्रण है। हर व्यक्ति की आस्था और धार्मिक गतिविधियों का प्रभाव न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
धर्म और समाज पर असर
इस सर्वेक्षण से स्पष्ट हुआ कि दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट में धर्म रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। धार्मिक आस्था लोगों की निर्णय प्रक्रिया, सामाजिक व्यवहार और परंपराओं में गहरा प्रभाव डालती है। इसके विपरीत, पश्चिमी देशों में धर्म के प्रति लोगों का जुड़ाव कम होता जा रहा है और कई समाज स्वयं को सेक्युलर या गैर-धार्मिक के तौर पर पहचान रहे हैं।
वैश्विक दृष्टिकोण और ट्रेंड
21वीं सदी के वैश्विक ट्रेंड को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि धर्म का प्रभाव क्षेत्रीय है। मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया के देशों में आस्था और धार्मिक पहचान को लेकर एक मजबूत जुड़ाव है। लोग धर्म को केवल व्यक्तिगत विश्वास तक सीमित नहीं रखते बल्कि इसे अपने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा मानते हैं। इससे यह साबित होता है कि धर्म इन क्षेत्रों में केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार है।
सऊदी अरब की धार्मिक प्राथमिकता
सऊदी अरब का पहले स्थान पर होना कई कारणों से समझा जा सकता है। यहाँ धर्म जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार, शिक्षा, समाज और निजी जीवन में धर्म का गहरा प्रभाव है। धार्मिक गतिविधियाँ और आस्था लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बन चुकी हैं।
भारत में धर्म की भूमिका
भारत में धर्म का प्रभाव अत्यधिक व्यापक है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च और अन्य धार्मिक स्थल न केवल पूजा के केंद्र हैं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी हिस्सा हैं। इसके अलावा, धार्मिक त्यौहार, उत्सव और रीति-रिवाज भारतीय समाज के जीवन में गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। धर्म भारतीय संस्कृति की रीढ़ की हड्डी की तरह है और लोगों के व्यवहार, मूल्यों और परंपराओं को प्रभावित करता है।
