भोपाल शहर इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है जब प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलावों का प्रभाव बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है। आने वाली नेशनल लोक अदालत के पहले नगर निगम ने जिस तरह की दूरदर्शी रणनीति अपनाई है, वह न केवल नगर निगम के राजस्व तंत्र को मजबूत करेगी बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधा प्रदान करेगी। हाल के वर्षों में भोपाल नगर निगम लगातार इस बात पर जोर देता आया है कि सेवाएं नागरिकों की पहुंच तक सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, लेकिन इस बार निगम ने वसूली व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल मॉडल पर केंद्रित करते हुए एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने शहरभर में चर्चा को जन्म दे दिया है।

नगर निगम के अनुसार, इस बार लोक अदालत में अधिकतम राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए पारंपरिक तरीके से हटकर नए डिजिटल ढांचे का प्रयोग किया जाएगा। शहर के सभी 85 वार्डों में मिनी डिजिटल कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। यह व्यवस्था नागरिकों को अपने ही वार्ड में वास्तविक समय में बिल अपडेट करने और तुरंत भुगतान करने की सुविधा देगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह है कि लोगों को लंबी लाइनों और जटिल प्रक्रियाओं से मुक्त किया जाए, ताकि वे घर के पास ही सरल, तेज और भरोसेमंद डिजिटल सेवा का लाभ उठा सकें।
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में अतिरिक्त हैंड-हेल्ड मशीनें, प्रशिक्षित ऑपरेटर और अद्यतन कंप्यूटर लगाए जाएं। इन मशीनों के माध्यम से वार्ड कार्यालयों में आने वाले नागरिकों का पूरा डाटा तुरंत सिस्टम में अपडेट होगा और बकाया राशि की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। तकनीकी टीम को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे पुरानी बकाया प्रविष्टियों का त्वरित सत्यापन करें, ताकि भुगतान से जुड़ी गलतियों की आशंका खत्म हो सके। लोक अदालत के ठीक पहले इस पूरी व्यवस्था के तैयार हो जाने का नगर निगम को पूर्ण विश्वास है।
इस पूरे अभियान की पृष्ठभूमि में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि हाल ही में चल रहे एसआईआर कार्यों में बड़ी संख्या में कर्मचारी ड्यूटी पर लगे हुए थे, जिसकी वजह से नोटिस तामील की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। निगम के अधिकारियों ने माना कि नोटिस वितरण की धीमी गति का सीधा असर वसूली पर पड़ रहा था। अब नई व्यवस्था में नोटिस वितरण को फिर से तेज किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोक अदालत के पहले अधिक से अधिक लंबित मामलों को निपटाने की दिशा में काम हो।
डिजिटल कलेक्शन मॉडल को लेकर नागरिकों में उत्साह का एक बड़ा कारण यह भी है कि इस बार नगर निगम ने सम्पत्तिकर और जलकर में अधिभार पर 25 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक की छूट देने का फैसला किया है। यह छूट योजना नागरिकों के लिए आकर्षक साबित हो रही है। निगम के आर्थिक आकलन के अनुसार, इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक दोगुनी वसूली होने की उम्मीद है। जिन नागरिकों पर भारी बकाया है, उनके लिए यह छूट योजना एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आई है। निगम को उम्मीद है कि लोग बड़ी संख्या में भुगतान करने के लिए आगे आएंगे, जिससे न केवल वसूली बढ़ेगी बल्कि भविष्य में बकाया मामलों की संख्या भी कम होगी।
टीएल मीटिंग में आयुक्त ने अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से कहा कि अब केवल कागजी प्रगति रिपोर्टों के आधार पर जवाबदेही नहीं चलेगी। उन्होंने आदेश दिया कि सभी कार्यों की ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सड़क निर्माण, नालों की मरम्मत और पानी-बिजली से जुड़े कामों की वास्तविक प्रगति की समीक्षा अब सीधे स्थल पर जाकर की जाएगी। बैठक में एक इंजीनियर सड़क संबंधी फाइल की स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया, जिस पर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त करते हुए काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर दिया। आयुक्त के इस रुख ने स्पष्ट कर दिया कि लोक अदालत से पहले न केवल वसूली बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त किया जाना है।
नगर निगम 13 दिसंबर को लगने वाली नेशनल लोक अदालत को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे राजस्व सुधार का एक बड़ा अवसर मान रहा है। इस दिन निगम को रिकॉर्ड वसूली की उम्मीद है। डिजिटल व्यवस्था, अतिरिक्त मशीनें, प्रशिक्षित मानवबल और वार्ड स्तर पर तैनाती से निगम की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट है कि इस बार किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यह व्यवस्था शहर में प्रशासनिक पारदर्शिता को भी मजबूत करती है। अधिकांश मामलों में नागरिक शिकायत करते थे कि पुराने बकाए सही ढंग से दर्ज नहीं होते या अपडेट में समय लगता है। लेकिन अब तुरंत सत्यापन की सुविधा से इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा। डिजिटल भुगतान से फर्जीवाड़े या गलत हिसाब-किताब की आशंकाएं भी काफी हद तक कम होंगी। नगर निगम ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हर वार्ड में ऑपरेटर इस तरह प्रशिक्षित हों कि वे नागरिकों को पूरी प्रक्रिया समझा सकें और किसी भी तकनीकी समस्या का हल तुरंत प्रदान कर सकें।
भोपाल नगर निगम की यह नई डिजिटल पहल ऐसे समय में सामने आई है जब शहर तेजी से स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीकी बदलावों को अपनाना केवल समय की मांग ही नहीं, बल्कि इसकी बहुत आवश्यकता थी। लंबे समय से वसूली प्रक्रिया जटिल और समयसाध्य थी, लेकिन मिनी डिजिटल कलेक्शन सेंटर इस समस्या का प्रभावी समाधान सिद्ध हो सकते हैं।
इस पहल से यह भी उम्मीद की जा रही है कि परिचालन लागत कम होगी, वसूली की गति बढ़ेगी और नागरिकों तथा निगम दोनों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। कई बार वसूली की प्रक्रियाओं में मैनुअल एंट्री के कारण गलतियां हो जाती थीं, लेकिन अब डिजिटल सिस्टम से ऐसी त्रुटियों की गुंजाइश कम होगी। हर नागरिक को बिल की अपडेट स्थिति तुरंत देखने और भुगतान करने का अधिकार मिलेगा, जिससे विवादों की संभावना भी न्यूनतम होगी।
इस डिजिटल मॉडल का एक पहलू यह भी है कि यह पूरे शहर में नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा। जब नागरिक देखेंगे कि उनकी समस्याओं का निपटारा वास्तविक समय में हो रहा है और उन्हें अपने ही वार्ड में सुविधाएं मिल रही हैं, तो वे भी समय पर भुगतान करने के लिए प्रेरित होंगे। नगर निगम ने वसूली को लेकर जो लक्ष्य रखा है, वह सिर्फ वित्तीय सुधार नहीं बल्कि शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजस्व बढ़ने से निगम और अधिक विकास कार्यों को गति दे पाएगा, जिससे शहर की मूलभूत संरचना मजबूत होगी।
इस समय शहर में तापमान लगातार गिर रहा है और ठंड का असर काम की गति पर भी पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद निगम की तैनाती और तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी जा रही है। प्रत्येक वार्ड में मशीनें लगाने से लेकर ऑपरेटरों की नियुक्ति तक, सारी व्यवस्थाएं निर्धारित समय पर पूरी की जा रही हैं। नागरिकों के लिए कैशलेस भुगतान एक बड़ी सुविधा बनकर सामने आ रहा है, क्योंकि अब उन्हें कार्यालयों में बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
नगर निगम के इस प्रयास को शहर के कई सामाजिक संगठनों ने भी सराहा है। उनका मानना है कि डिजिटल वसूली व्यवस्था से भविष्य में कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं और सरल होंगी। फाइलों के बोझ से होने वाली देरी खत्म होगी और हर प्रक्रिया सिस्टम के अंदर पारदर्शी तरीके से दर्ज होगी। यह मॉडल नगरपालिका राजस्व प्रशासन में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर भोपाल नगर निगम की यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि शहर के संपूर्ण विकास का एक आधारशिला है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। लोक अदालत से पहले की यह तैयारी यह दर्शाती है कि जब प्रशासन तकनीक का सही उपयोग करता है, तब न केवल व्यवस्था सुचारू होती है बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।
