बैतूल जिले के प्रशासनिक इतिहास में सोमवार का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हुआ, जब कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री सूर्यवंशी स्वयं उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण सत्र किसी साधारण औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह उस व्यापक डिजिटल परिवर्तन का एक आधारभूत स्तंभ साबित हो रहा है, जिसकी कल्पना शासन लंबे समय से कर रहा है। सरकारी सेवाओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लाना, नागरिकों को बिना कार्यालय के चक्कर लगाए सुविधाएं उपलब्ध कराना और सरकारी कार्यप्रणाली में अंतिम स्तर तक पारदर्शिता स्थापित करना—इन्हीं इरादों को मूर्त रूप देने के लिए एमपी ई-सेवा पोर्टल को अगली गति प्रदान की जा रही है।

डिजिटल संचालन के नए आयाम
कलेक्टर सूर्यवंशी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि यह पोर्टल केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह लोगों को सरकारी तंत्र पर भरोसे की एक नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि दशकों से प्रशासनिक कार्यों का ढांचा इतना विशाल और जटिल रहा है कि सामान्य नागरिक को किसी साधारण प्रमाण पत्र के लिए कई-कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था। अब यह स्थिति बदल रही है।
कलेक्टर ने समझाया कि यदि कोई ग्रामीण निवासी जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र या अन्य किसी दस्तावेज़ के लिए आवेदन करता है, तो उसे कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। एमपी ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते ही उसकी फाइल संबंधित विभाग तक स्वतः पहुंच जाएगी। इस प्रक्रिया में न तो व्यक्ति को कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा और न ही अलग-अलग क्लर्क-काउंटरों पर आवेदनों को पास करवाने का दबाव रहेगा।
यह बदलाव प्रशासनिक प्रणाली को फेसलेस बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
पेपरलेस व्यवस्था की मजबूत पहल
प्रशिक्षण के दौरान कलेक्टर ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि आने वाले समय में सरकारी फाइलों का स्वरूप कागज़ पर आधारित नहीं रहेगा। अधिकांश फाइलें पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरेंगी। दस्तावेज़ों की स्कैनिंग, डिजिटाइजेशन, सिग्नेचर वेरीफिकेशन और दस्तावेज़ की अनुमोदन प्रक्रिया पूर्ण रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि गैरजरूरी फाइलों के बोझ से भी कार्यालय मुक्त होंगे।
कई विभागों के कर्मचारियों ने इस प्रणाली में रुचि दिखाई और इसे लागू करने के प्रति अपनी तत्परता प्रदर्शित की। प्रशिक्षण में उपस्थित तकनीकी सहयोगी कर्मचारियों ने समझाया कि किस प्रकार नागरिक स्वयं भी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और कैसे विभागीय कार्यकर्ता उसकी स्थिति वास्तविक समय में देख पाएंगे।
प्रशासन और नागरिकों के बीच दूरी कम होगी
कलेक्टर सूर्यवंशी ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था वर्षों से आमजन से दूरी बनाकर चलती रही है। लोग कई बार हिचकिचाते हैं, कई बार वास्तविक जानकारी तक पहुँच नहीं पाते, और कभी-कभी गलत सलाह लेकर अपने दस्तावेज़ों को खतरे में डाल देते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था इस विभाजन को खत्म करेगी।
प्रशासन के पास अब आवेदक की पूरी जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध होगी। इसका प्रत्यक्ष लाभ यह होगा कि गलत दस्तावेज़ों की प्रवृत्ति कम होगी, जालसाजी में कमी आएगी और प्रक्रियाएं ज्यादा साफ एवं पारदर्शी रहेंगी। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि “हर नागरिक को सरकारी सेवा उसके अधिकार के रूप में मिले, किसी एहसान के रूप में नहीं।”
एमपी ई-सेवा पोर्टल किस प्रकार बदलाव लाएगा?
आने वाले महीनों में पोर्टल के अंतर्गत—
- पैनलाइज्ड आवेदन प्रक्रिया
- रियल-टाइम स्टेटस अपडेट
- स्वचालित संदेश सूचना प्रणाली
- प्रमाण पत्र का QR-कोड आधारित सत्यापन
जैसी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
अधिकांश नागरिक, जिनमें विद्यार्थी, ग्रामीण महिलाएं, कारोबारियों और वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं, अब सीधे मोबाइल के माध्यम से आवेदन कर पाएंगे। इंटरनेट सुविधा न होने पर नजदीकी सीएससी, पंचायत भवन और जनसुविधा केंद्रों को अनिवार्य रूप से तकनीकी समर्थन देने की तैयारी भी प्रशासन कर रहा है।
प्रशिक्षण सत्र की विशेष अनुभूति
सभा कक्ष में बैठे अधिकारियों ने कलेक्टर सूर्यवंशी के वक्तव्य के साथ-साथ उस प्रस्तुति को भी ध्यानपूर्वक देखा जिसमें बताया गया कि पहले एक साधारण प्रमाण पत्र जारी करने में कहाँ-कहाँ रुकावटें आती थीं। प्रशिक्षकों ने पुराने और नए सिस्टम का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
कई कर्मचारियों ने प्रश्न पूछे— कुछ को डिजिटल सिग्नेचर की समझ चाहिए थी, कुछ को दस्तावेज़ अपलोडिंग सिस्टम की, तो कुछ को नए वर्कफ्लो की तकनीकी जानकारी। प्रशिक्षण टीम ने सबकी जिज्ञासाओं का समाधान विस्तार से किया।
आगे की रणनीति
कलेक्टर ने यह भी कहा कि अब शासन स्तर से नियमित समीक्षा होगी। प्रत्येक विभाग को साप्ताहिक रिपोर्ट पोर्टल संबंधित कार्यों की देनी होगी। लक्ष्य यह होगा कि अगले तीन महीनों में नागरिक सेवाओं के 75 प्रतिशत आवेदन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किए जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आगामी समय में गांव-स्तर पर आम जन को इस प्रणाली का प्रदर्शन कराया जाए। लोग स्वयं समझें, स्वयं आवेदन करें और अपने दस्तावेज़ों की स्थिति बिना किसी बिचौलिये, बिना किसी मददगार के जान सकें।
