मध्य प्रदेश में शासन और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। एमपी ई-सेवा पोर्टल और उससे जुड़ा मोबाइल एप अब राज्य के नागरिकों के लिए एक ऐसा डिजिटल माध्यम बनकर उभर रहा है, जिसके जरिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और पारदर्शी हो गई है। इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्त करना और सेवाओं को घर बैठे उपलब्ध कराना है।

एक प्लेटफॉर्म, अनेक सेवाएं
एमपी ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से राज्य की लगभग सभी प्रमुख नागरिक सेवाओं को एक ही डिजिटल छत के नीचे लाया गया है। जन्म प्रमाण पत्र से लेकर आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन से जुड़ी सेवाएं, बिजली-पानी से संबंधित आवेदन, छात्रवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और विभिन्न विभागों से जुड़ी दर्जनों सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
इस पहल से नागरिकों को अलग-अलग विभागों की वेबसाइट पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही लॉगिन से विभिन्न सेवाओं का लाभ लेना संभव हो गया है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत हो रही है।
मोबाइल एप से और भी आसान पहुंच
स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए एमपी ई-सेवा मोबाइल एप को भी विकसित किया गया है। यह एप खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है, जिनके पास कंप्यूटर या लैपटॉप की सुविधा नहीं है। मोबाइल एप के माध्यम से नागरिक कहीं से भी और कभी भी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित है, वहां भी मोबाइल डेटा के जरिए लोग इस एप का उपयोग कर रहे हैं। इससे डिजिटल डिवाइड को कम करने में भी मदद मिल रही है।
पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं की ट्रैकिंग सुविधा भी दी गई है। नागरिक यह देख सकते हैं कि उनका आवेदन किस स्तर पर है और उसे निपटाने में कितना समय लगेगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है।
पहले जहां फाइलों के अटकने और देरी की शिकायतें आम थीं, वहीं अब ऑनलाइन सिस्टम से प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।
भ्रष्टाचार पर लगाम
ई-सेवा पोर्टल का एक अहम लाभ यह भी है कि इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हो रही हैं। चूंकि आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, इसलिए बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। नागरिकों को सीधे शासन से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली के कारण लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर नजर रखना आसान हो गया है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को लाभ
यह पहल केवल शहरी नागरिकों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर और लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से भी एमपी ई-सेवा पोर्टल का लाभ दिया जा रहा है। ऐसे नागरिक जो स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाते, वे इन केंद्रों की मदद से सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
इससे गांवों में रहने वाले लोगों को भी वही सुविधाएं मिल रही हैं, जो पहले केवल शहरों तक सीमित थीं।
प्रशासनिक दक्षता में इजाफा
ई-सेवा पोर्टल से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विभागों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है और डेटा साझा करना आसान हो गया है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है।
डिजिटल रिकॉर्ड्स के कारण दस्तावेजों के रख-रखाव में भी सुधार हुआ है और कागज आधारित कार्यप्रणाली पर निर्भरता कम हुई है।
युवाओं और छात्रों के लिए राहत
छात्रों को प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और विभिन्न शैक्षणिक सेवाओं के लिए अब लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ता। ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज अपलोड की सुविधा से उनका समय बच रहा है, जिसे वे पढ़ाई और कौशल विकास में लगा सकते हैं।
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी कई सेवाएं भी इसी पोर्टल से जोड़ी जा रही हैं।
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए सुविधा
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह डिजिटल पहल विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है। उन्हें सरकारी दफ्तरों तक जाने में जो कठिनाई होती थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। घर बैठे सेवाएं उपलब्ध होने से उनकी निर्भरता दूसरों पर घट रही है।
सुरक्षा और डेटा संरक्षण
पोर्टल और मोबाइल एप में नागरिकों की जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। आधुनिक साइबर सुरक्षा मानकों के अनुसार डेटा को सुरक्षित रखा जा रहा है। लॉगिन सिस्टम, ओटीपी वेरिफिकेशन और एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग न हो।
भविष्य की योजनाएं
आने वाले समय में एमपी ई-सेवा पोर्टल में और अधिक सेवाओं को जोड़ा जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट जैसी तकनीकों के जरिए नागरिकों को तुरंत सहायता देने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे पोर्टल और अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनेगा।
डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पहल का लाभ उठा सकें।
नागरिकों की बदलती सोच
धीरे-धीरे नागरिकों का भरोसा डिजिटल सेवाओं पर बढ़ रहा है। लोग अब ऑनलाइन आवेदन को सुरक्षित और सुविधाजनक मानने लगे हैं। harigeet pravaah के अनुसार यह बदलाव शासन और समाज दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।
निष्कर्ष
एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल एप ने मध्य प्रदेश में नागरिक सेवाओं की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। यह पहल न केवल समय और संसाधनों की बचत कर रही है, बल्कि शासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह भी बना रही है। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में यह एक मजबूत कदम है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में और अधिक देखने को मिलेगा।
