समय तेजी से बदल रहा है, और दुनिया डिजिटल नवाचारों की ओर लगातार आगे बढ़ रही है। सरकारी विभागों, न्यायालयों, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एक सामान्य शब्द बन चुका है। अब इसी कड़ी में मध्य प्रदेश का जेल विभाग भी नए युग में कदम रख चुका है। नर्मदापुरम (होशंगाबाद) स्थित सेंट्रल जेल को राज्य की पहली पूर्ण डिजिटल जेल के रूप में परिवर्तित किया गया है, जहां परिसर को कैशलेस सिस्टम से जोड़ा गया है और कैदियों की सुविधाओं को आधुनिक तकनीक द्वारा सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
यह पहल सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि जेल प्रबंधन और बंदियों की आवश्यकताओं के बीच एक नया पुल है, जो पारदर्शिता, सुविधा, सुरक्षा और समय की बचत का प्रतीक बन रहा है।

नर्मदापुरम सेंट्रल जेल—मध्य प्रदेश की पहली “डिजिटल जेल” कैसे बनी
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई। पहले चरण में जेल के दोनों बड़े खंडों (A और B ब्लॉक) की कैंटीन को पूरी तरह डिजिटल कर कैशलेस इकोसिस्टम से जोड़ा गया। कैंटीन विंडो पर QR कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करके बंदियों के परिजन डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।
पहले कैंटीन में भुगतान की प्रक्रिया बहुत जटिल थी। परिजनों को कई बार लंबा सफर तय करके जेल पहुंचना पड़ता था और नकद राशि जमा करनी होती थी। कई लोग दूर-दराज़ के गांवों से आते थे, जिससे महीनों तक वे पैसा जमा नहीं कर पाते थे और बंदियों को आवश्यक सामान लेने में कठिनाई होती थी। लेकिन अब QR कोड के माध्यम से स्कैन-पेमेंट की सुविधा किसी भी जगह से, किसी भी समय, मोबाइल से ही उपलब्ध है।
कैसे काम करेगा यह डिजिटल सिस्टम?
नया डिजिटल सिस्टम अत्यंत सरल, सुरक्षित और तेज़ है। प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है—
1. QR कोड स्कैन करके भुगतान
कैंटीन विंडो पर लगाए गए QR कोड को परिजन अपने मोबाइल से स्कैन कर तुरंत ऑनलाइन पेमेंट कर सकेंगे। यह राशि सीधे बंदी के खाते में जुड़ जाएगी।
2. भुगतान होते ही वस्तुएं उपलब्ध
पेमेंट का अपडेट तुरंत जेल सिस्टम में दिखाई देगा और कैदी अपनी जरूरत के सामान—जैसे खाद्य सामग्री, साबुन, टूथपेस्ट, तेल, कपड़े आदि—कैंटीन से ले सकेगा।
3. हर सप्ताह 2 लाख रुपये की एंट्री अब कैशलेस
जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों ब्लॉकों में परिजन हर सप्ताह लगभग 2 लाख रुपये कैंटीन में जमा करते हैं। यह सारी राशि अब बैंक खाते में डिजिटल रूप से जाएगी, जिससे नकद लेन-देन के जोखिम और गड़बड़ी खत्म होंगी।
4. पारदर्शिता और ऑडिट आसान
हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।
कैशलेस कैंटीन के साथ मिलने वाली अतिरिक्त डिजिटल सुविधाएँ
नर्मदापुरम जेल सिर्फ QR कोड या डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है। इस डिजिटल मॉडल में कई अन्य महत्वपूर्ण फीचर भी शामिल हैं—
1. विधिक सहायता की जानकारी मोबाइल पर
जैसे ही QR कोड स्कैन होगा, परिजन बंदी से जुड़ी कानूनी जानकारी भी देख पाएंगे—
- केस की वर्तमान स्थिति
- नियत तिथि (Next Hearing Date)
- अधिवक्ता जानकारी
- कानूनी सहायता हेतु सरकारी सुविधाएं
2. जेल मैनुअल की जानकारी
कैदियों के अधिकार, कर्तव्य, मिलने के नियम, अनुमत वस्तुएं—यह सब अब मोबाइल पर पढ़ा जा सकता है।
3. मुलाकात प्रणाली में भी डिजिटलाइजेशन
मुलाकात पंजीयन कक्ष में भी QR कोड लगाया गया है। परिजन मुलाकात के दौरान भी वहीं से पेमेंट कर सकते हैं। अब ना तो लंबी लाइन, ना नकद की परेशानी।
4. रिकॉर्ड रखने की नई व्यवस्था
हर कैदी की प्रोफ़ाइल डिजिटल रूप से अपडेट होगी—
- जमा राशि
- खर्च
- मेडिकल रिकॉर्ड
- बिहेवियर रिपोर्ट
- कोर्ट अपडेट
डिजिटल जेल: बंदियों के जीवन में बड़ा बदलाव
इस डिजिटल परिवर्तन से कैदियों की दिनचर्या में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे—
1. आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तुरंत
पहले कई बार बंदियों को रोजमर्रा की चीजों के लिए इंतजार करना पड़ता था। नकद जमा नहीं होने के कारण उनका खाता खाली रहता था और वे सामान नहीं खरीद पाते थे। अब यह समस्या खत्म होगी।
2. परिवार पर निर्भरता आसान
परिजन दूर बैठकर ही भुगतान कर सकेंगे। जो लोग महीनों तक जेल नहीं पहुंच पाते थे, अब मोबाइल से ही पैसा भेज सकेंगे।
3. मानवीयता और आत्मसम्मान में वृद्धि
डिजिटल सिस्टम से कैदियों और उनके परिजनों के बीच दूरी कम होगी। जानकारी और सुविधा दोनों का दायरा बढ़ेगा।
जेल प्रबंधन को मिलने वाले लाभ
नर्मदापुरम जेल प्रशासन का कहना है कि डिजिटल सिस्टम के बाद उनका काम बहुत आसान हो गया है—
1. समय की बचत
कैंटीन में प्रतिदिन होने वाले नकद लेन-देन में काफी समय लगता था। अब पूरा प्रोसेस ऑटोमेटेड हो गया है।
2. नकदी प्रबंधन का जोखिम खत्म
अब न तो कैश गायब होने का खतरा, न ही गलती की संभावना।
3. पारदर्शी सिस्टम
हर रुपये का हिसाब ऑनलाइन दर्ज होगा।
4. प्रशासन और बंदियों के बीच संचार मजबूत
QR कोड के माध्यम से साझा की गई सूचनाएं दोनों पक्षों को स्पष्टता देती हैं।
डिजिटल MP का सपना—जेल विभाग ने लिखी नई शुरुआत
यह मॉडल मध्य प्रदेश की अन्य जेलों के लिए प्रेरणा बन सकता है। भविष्य में पूरे राज्य की जेलें इस तकनीक को अपनाकर एक आधुनिक, स्मार्ट और सरल सिस्टम की ओर बढ़ सकेंगी। यह परिवर्तन दिखाता है कि डिजिटल इंडिया अभियान सिर्फ शहरों या दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के पुनर्वास और जेल सुधार की दिशा में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
