मध्यप्रदेश का पुलिस प्रशासनिक ढांचा इन दिनों एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस में पदोन्नति की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया एक बार फिर गति पकड़ रही है। यह प्रक्रिया न केवल अधिकारियों के कैरियर का अहम मोड़ निर्धारित करती है, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था, नेतृत्व संरचना और पुलिसिंग गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है। इसी क्रम में वर्ष 2024 के लिए आयोजित रिव्यू विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक दिल्ली में पूरी हो चुकी है, जिसने पांच पदों पर प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया। अब इसके तुरंत बाद वर्ष 2025 के लिए भी डीपीसी प्रक्रिया की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं, जिसमें छह अधिकारियों को पदोन्नति मिलने की संभावना है।

राज्य पुलिस सेवा के लिए आईपीएस कैडर में प्रवेश केवल प्रमोशन का विषय नहीं है, बल्कि यह वर्षों की मेहनत, सेवा अभिलेख, आचरण, कार्यदक्षता और नेतृत्व क्षमता का समुचित मूल्यांकन है। हर वर्ष यह प्रक्रिया विभाग की व्यस्तताओं, फाइल चलन, दस्तावेज़ तैयारियों और आयोग की बैठकों के बीच अपने समय पर आगे बढ़ती है। लेकिन इस बार अधिकारियों का कहना है कि तैयारी में कुछ विलंब हुआ है और प्रक्रिया को और पहले शुरू होना चाहिए था।
दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण रिव्यू डीपीसी—वर्ष 2024 की पदोन्नति पर लगी अंतिम मोहर
दिल्ली में आयोजित रिव्यू डीपीसी केवल एक नियमित बैठक नहीं थी, बल्कि वह उन पांच अधिकारियों के लिए एक निर्णायक क्षण था जो लंबे समय से आईपीएस पदोन्नति सूची में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह बैठक अत्यंत औपचारिक और विस्तृत मूल्यांकन पर आधारित होती है, जिसमें अधिकारियों की बीती सेवा में कोई त्रुटि, विवाद या लंबित जांच न हो, इसका विशेष रूप से परीक्षण किया जाता है।
संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होते हैं। यहां वे हर उस अधिकारी के रिकॉर्ड को देखते हैं, जिनका नाम पदोन्नति सूची में सम्मिलित किया जा रहा है। इसमें ACR अर्थात वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन का परीक्षण सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी अधिकारी की पेशेवर सक्रियता, नेतृत्व की गुणवत्ता, अनुशासन और कार्य के प्रति जिम्मेदारी का मूल्यांकन इन्हीं प्रतिवेदनों के आधार पर होता है।
रिव्यू डीपीसी एक प्रकार से वह मंच है जहां किसी भी विसंगति को दूर कर अंतिम सूची तय की जाती है। इस बैठक में न केवल अधिकारियों को पदोन्नति दी जाती है बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि प्रक्रिया पूर्णतया कानूनी, पारदर्शी और पूरी तरह से प्रशासनिक मानकों पर आधारित हो।
अब 2025 बैच के लिए शुरू हुई अगली प्रक्रिया—छह अधिकारी होंगे प्रमोशन के पात्र
पुलिस मुख्यालय ने अब वर्ष 2025 की डीपीसी के लिए प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह प्रक्रिया एक दिन या सप्ताह में पूरी होने वाली नहीं, बल्कि एक विस्तृत और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें दस्तावेज़ों की जांच, सत्यापन और समन्वय का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
वर्ष 2025 की डीपीसी में कुल छह अधिकारियों के प्रमोशन की संभावना है। यह संख्या कैडर की रिक्तियों और केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के आधार पर निर्धारित होती है। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अब प्रक्रिया में कोई देरी न हो, ताकि उन अधिकारियों को समय पर पदोन्नति मिल सके जो अपने करियर के इस महत्वपूर्ण मोड़ का वर्षों से इंतज़ार कर रहे हैं।
डीपीसी की तैयारी इतनी लंबी क्यों होती है—संपूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में पदोन्नति हेतु डीपीसी की तैयारी एक दो कदम की प्रक्रिया नहीं होती। इसमें कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व होता है। अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी रिकॉर्ड ठीक से संकलित और सत्यापित किए जाएं।
डीपीसी के लिए सबसे पहले पात्र अधिकारियों की सूची तैयार की जाती है। इसमें सेवा अवधि, वरिष्ठता क्रम और कट ऑफ डेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वरिष्ठता सूची के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि किस अधिकारी को किस क्रम में प्रमोशन मिलना चाहिए।
इसके बाद अधिकारियों की ACR का संकलन किया जाता है। कई बार विभिन्न जिलों में कार्यरत अधिकारियों के रिकॉर्ड समय पर नहीं मिलते, जिससे देरी होती है। इस अभिलेख में किसी अधिकारी के कार्य, चरित्र, व्यवहार और उपलब्धियों से जुड़ी हर जानकारी होती है, जिसे प्रमोशन का आधार माना जाता है।
इसके बाद देखा जाता है कि किसी अधिकारी पर कोई विभागीय जांच तो लंबित नहीं है। यदि कोई जांच लंबित हो तो उसकी रिपोर्ट और प्रगति का विवरण भी डीपीसी टीम के सामने रखा जाता है। ऐसे मामलों में अधिकारी को पदोन्नति सूची से बाहर भी किया जा सकता है, जब तक कि मामला साफ न हो जाए।
सभी रिकॉर्ड तैयार होने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है। इसके बाद UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग बैठक की तारीख निर्धारित करता है। इस चरण में अक्सर सबसे ज्यादा समय लगता है, क्योंकि आयोग पूरे देश के विभिन्न राज्यों की बैठकों का समय तय करता है।
इन सभी प्रक्रियाओं को समाहित करने में दो से तीन महीने का समय लगना सामान्य बात है। कई बार प्रशासनिक व्यस्तताओं या दस्तावेज़ों में कमी की वजह से यह समय बढ़ भी जाता है।
अधिकारियों का तर्क—प्रक्रिया में देरी से प्रभावित होती है वरिष्ठता
राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारियों का कहना है कि 2025 बैच की डीपीसी की तैयारी समय पर शुरू हो जानी चाहिए थी। अब प्रक्रिया में पिछले वर्ष का विलंब शामिल हो गया है, जिससे पदोन्नति का समय प्रभावित हो सकता है। वरिष्ठता पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि हिंदी राज्यों में आईपीएस पदोन्नति लंबे समय से संवेदनशील और प्रतिस्पर्धात्मक मामला रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि अगर सभी रिकॉर्ड समय पर तैयार हों और शासन जल्द प्रस्ताव भेज दे, तो UPSC की बैठक निर्धारित करने में भी कम समय लगता है। लेकिन कई बार विभागीय फाइलों में देरी पदोन्नति के पूरे चक्र को पीछे धकेल देती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पदोन्नति—प्रदेश की सुरक्षा और नेतृत्व पर पड़ता है असर
आईपीएस पद केवल एक प्रमोशन नहीं है। यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था और policing की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला पद है। एक नए आईपीएस अधिकारी के रूप में अधिकारी न केवल जिला पुलिस का नेतृत्व करते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण सुरक्षा योजनाओं, अपराध नियंत्रण रणनीतियों और प्रशासनिक नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी भी उठाते हैं।
राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी जब आईपीएस बनते हैं, तो वे अपने वर्षों के जमीनी अनुभव को उच्च स्तरीय नेतृत्व में बदलते हैं। ऐसे में समय पर पदोन्नति होना आवश्यक है, ताकि नेतृत्व का शून्य न बने और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन संभव हो।
प्रदेश में पुलिसिंग की गुणवत्ता पर भी पड़ता है प्रभाव
मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में पुलिस बल की प्रभावशीलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उच्च पदों पर योग्य और अनुभवी अधिकारी तैनात हों। यदि पदोन्नति में देरी होती है तो कई जिलों में नेतृत्व का अभाव पैदा हो सकता है। इससे पुलिस व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
रिव्यू डीपीसी और आगामी डीपीसी दोनों ही राज्य की प्रशासनिक मशीनरी के लिए आवश्यक कदम हैं। वे न केवल अधिकारियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था की दिशा भी तय करते हैं।
कुल मिलाकर
मध्यप्रदेश में आईपीएस पदोन्नति से जुड़ी यह प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है। रिव्यू डीपीसी का पूरा होना और 2025 बैच की तैयारी शुरू होना अधिकारियों के लिए राहत की बात है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन और पुलिस मुख्यालय किस गति से आगे बढ़कर प्रस्ताव को UPSC तक पहुंचाते हैं।
यह प्रक्रिया जितनी सुचारू और समय पर होगी, उतना ही बेहतर प्रभाव प्रदेश की पुलिसिंग, प्रशासनिक नेतृत्व और समग्र कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा।
