मध्यप्रदेश में पंचायतों को आत्मनिर्भर, सक्षम और विकास उन्मुख बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास शुरू होने जा रहा है।
24 से 26 नवंबर तक भोपाल का कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर एक ऐसा मंच बनेगा, जहाँ प्रदेशभर के लगभग 2000 पंचायत जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिलकर ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों पर व्यापक मंथन करेंगे। यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों की पहचान करेगा, बल्कि भविष्य के लिए एक सुदृढ़ और जवाबदेह पंचायत व्यवस्था का खाका भी तैयार करेगा।

सम्मेलन का उद्घाटन और नेतृत्व
इस कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों होगा। सरकार ने इसे उन योजनाओं के समन्वय और निगरानी से जोड़ दिया है, जिनका उद्देश्य ग्रामीण विकास को गति देना है। आयुक्त पंचायतराज छोटे सिंह के अनुसार, यह आयोजन
- प्रशासनिक मजबूती
- वित्तीय पारदर्शिता
- सामुदायिक नेतृत्व
—इन तीन स्तंभों पर आधारित होगा।
कार्यशाला किन विषयों पर केंद्रित रहेगी?
यह आयोजन कई प्रमुख विकास क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति और भविष्य रणनीति पर केंद्रित होगा—
- स्वनिधि से समृद्धि अभियान
- ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते शहरीकरण के साथ समन्वय
- जल संरक्षण एवं वाटरशेड प्रोजेक्ट
- स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना
- स्वच्छ ग्राम मिशन
- प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति
- जनमन और ग्राम सड़क योजनाएँ
- पीएम पोषण कार्यक्रम
- पेसा ग्राम सभाओं का प्रभावी संचालन
- सामाजिक अंकेक्षण और डिजिटल मॉनिटरिंग
- मनरेगा और आजीविका मिशन का बेहतर क्रियान्वयन
हर बिंदु पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत प्रशिक्षण और व्यवहारिक परामर्श होगा।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मान
इस सम्मेलन में उन पंचायतों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं को बेहतरीन तरीके से लागू किया है। जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके साथ ही
- बिरसा (बालाघाट)
- पुष्पराजगढ़ (अनूपपुर)
की जनपद पंचायतों को भी उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।
यह प्रोत्साहन बाकी पंचायतों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।
डिजिटल ट्रैकिंग और वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान
आज के समय में विकास की असली गति डिजिटल सिस्टम से ही संभव है। इसलिए प्रशिक्षण में शामिल होंगे—
- आधुनिक ई-गवर्नेंस उपकरण
- फंड का डिजिटल रिकॉर्ड
- योजनाओं की लाइव मॉनिटरिंग
- पारदर्शी खर्च प्रणाली
- नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उपाय
यह ग्रामीण शासन की पूरी व्यवस्था को प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद बनाएगा।
पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बड़ा अवसर
इस सम्मेलन से जनप्रतिनिधियों को मिलेगा:
- योजना निर्माण का ज्ञान
- नीतियों को जमीनी स्तर पर उतारने की समझ
- संसाधनों के सही उपयोग का प्रशिक्षण
- समुदाय के साथ संवाद और नेतृत्व की क्षमता
बदलते ग्रामीण भारत के अनुरूप पंचायतों का सशक्तिकरण
ग्रामीण क्षेत्र अब पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर कृषि, उद्योग, पर्यटन और स्टार्टअप वेंचर्स का केंद्र बन रहे हैं। ऐसे में पंचायतों की भूमिका बदल चुकी है। उन्हें सिर्फ प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विकास के इंजन के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
कार्यशाला के मुख्य लक्ष्य
- योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन
- पारदर्शी और जवाबदेह शासन
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम
- जल-स्वास्थ्य-सड़क-बिजली क्षेत्रों को मजबूत बनाना
- स्थानीय नेतृत्व को और सशक्त बनाना
आगे की राह
यह आयोजन पंचायत व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसकी सिफारिशें भविष्य की नीतियों और बजट निर्धारण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि
“हर पंचायत आत्मनिर्भर बने, और हर ग्रामीण नागरिक सुविधाओं से परिपूर्ण जीवन जी सके।”
