मध्यप्रदेश में शहरी क्षेत्रों और उनसे सटे ग्रामीण इलाकों के विकास के बीच जो दूरी वर्षों से बनी हुई थी, वह अब खत्म होने जा रही है। राज्य सरकार ने एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, जो आने वाले समय में गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों को बदल सकता है। यह कदम है – शहरी सीमाओं से लगे 16 प्रमुख शहरों की ग्राम पंचायतों में हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय।

यह निर्णय केवल आवास निर्माण का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक सेमी अर्बन डेवलपमेंट मॉडल है, जिसमें गांवों को शहर जैसा ढांचा, सुविधाएं और आर्थिक मजबूती प्रदान की जाएगी।
क्यों जरूरी था यह कदम?
पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण शहरों की सीमाएं लगातार फैलती गईं। शहरों की सीमा के ठीक बाहर बसे गांव धीरे-धीरे शहर जैसे दिखने लगे, लेकिन सुविधाओं के मामले में वे अभी भी गांव ही रह गए।
यहां सड़कें टूट-फूट का शिकार,
सीवेज सिस्टम नहीं,
पीने के पानी की दिक्कत,
गंदगी का अंबार,
और
बेतरतीब निर्माण
जैसी समस्याएं कई वर्षों से बनी हुई थीं।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पंचायत विभाग ने सेमी अर्बन एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। यह मॉडल आने वाले 25–30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
16 शहरों के किन इलाकों में होगा विकास?
पंचायत विभाग ने उन पंचायतों की पहचान कर ली है, जो इन 16 बड़े शहरों की सीमा से जुड़ी हैं:
✔ भोपाल
✔ इंदौर
✔ जबलपुर
✔ ग्वालियर
✔ उज्जैन
✔ रतलाम
✔ सागर
✔ रीवा
✔ सतना
✔ कटनी
✔ मुरैना
✔ खंडवा
✔ देवास
✔ छिंदवाड़ा
✔ बुरहानपुर
✔ सिंगरौली
इन शहरों के आसपास के गांवों में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है। लोग शहरों में काम के लिए जाते हैं, लेकिन रहने के लिए पास के गांवों को चुनते हैं। अब इस प्रोजेक्ट से इन गांवों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो शहरों में मिलती हैं।
क्या मिलेगा ग्रामीणों को इस प्रोजेक्ट से?
यह प्रोजेक्ट गांवों की तस्वीर बदलने वाला है। इसके तहत:
✔ हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम जैसे प्रोजेक्ट पंचायतें भी चला सकेंगी
✔ गांवों में शहर जैसा मास्टर प्लान लागू होगा
✔ सड़कें, स्ट्रीटलाइट, सीवेज, ड्रेनेज और जल-आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था बनेगी
✔ बढ़ेगी रोजगार की संभावनाएं
✔ जमीन का मूल्य बढ़ेगा, आर्थिक मजबूती आएगी
✔ ग्रामीण क्षेत्रों को स्मार्ट सेमी-अर्बन क्षेत्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम
यह पहला मौका है जब पंचायत को सीधे ऐसे अधिकार दिए जाएंगे, जहां वे बड़े स्तर के आवासीय और विकास प्रोजेक्टों को संचालित कर सकेंगी।
प्रस्ताव को मंजूरी कब मिलेगी?
24 से 26 नवंबर को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में तीन दिवसीय त्रिस्तरीय पंचायत सम्मेलन होने जा रहा है।
इस सम्मेलन में:
✔ पंचायत प्रतिनिधि
✔ सरपंच
✔ सचिव
✔ जिला पंचायत सदस्य
✔ विशेषज्ञ
सभी इस ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
उनकी राय, सुझाव और आपत्तियों को शामिल करने के बाद अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होगी।
सबसे खास बात यह है कि पहली बार किसी बड़े शहरी विकास योजना पर ग्राम पंचायतों को बराबर का निर्णय अधिकार दिया जा रहा है।
क्यों अलग है यह योजना?
यह योजना केवल गांवों को शहर बनाने के लिए नहीं, बल्कि गांवों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार की गई है।
देशभर में पहली बार किसी राज्य ने शहरों के साथ लगी पंचायतों को यह अधिकार दिया है कि वे स्वयं हाउसिंग प्रोजेक्ट, कमर्शियल डवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे बड़े प्रोजेक्ट चला सकें।
इसके तीन प्रमुख असर होंगे:
1️⃣ स्थानीय अर्थव्यवस्था का तेज विकास
गांवों में निर्माण, निवेश और रोजगार बढ़ेगा।
2️⃣ शहरों पर दबाव कम होगा
लोग गांवों में ही बेहतर सुविधाएं पाकर वहीं बसना पसंद करेंगे।
3️⃣ लंबी अवधि का स्मार्ट विकास
25–30 साल आगे तक की योजना होने से भविष्य में अव्यवस्था नहीं होगी।
इस योजना से किसे सबसे ज्यादा फायदा?
✔ गांवों में रहने वाले नागरिक
✔ उन लोगों को जो शहरों में नौकरी करते हैं, लेकिन गांवों में रहते हैं
✔ किसान जिनकी जमीन की कीमत बढ़ेगी
✔ पंचायतें जिन्हें आर्थिक शक्ति मिलेगी
✔ हाउसिंग कंपनियां जिन्हें नए क्षेत्र मिलेंगे
सरकार की बड़ी रणनीति
सरकार का लक्ष्य है कि अगले 5 वर्षों में इन 16 शहरों के आसपास के कम से कम 100+ गांवों को सेमी-अर्बन क्षेत्र घोषित किया जाए। इससे मध्यप्रदेश के विकास का मॉडल देश में एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।
