मध्य प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीद और बिक्री से जुड़े कारोबार में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव सामने आया है। परिवहन विभाग ने सेकंड हैंड वाहन बाजार को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना प्राधिकार पत्र कोई भी व्यक्ति या संस्था इस व्यापार में शामिल नहीं हो सकेगी। यह निर्णय न केवल डीलरों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा, बल्कि आम वाहन मालिकों के लिए भी राहत और सुरक्षा का कारण बनेगा।

राज्य में लंबे समय से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी, स्वामित्व हस्तांतरण में देरी और वाहनों के दुरुपयोग जैसी समस्याएं आम हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने नियमों को और कड़ा करने का फैसला लिया है।
प्राधिकार पत्र को क्यों बनाया गया अनिवार्य
परिवहन विभाग का मानना है कि पुराने वाहनों के कारोबार में अव्यवस्था का सबसे बड़ा कारण यह है कि बड़ी संख्या में डीलर बिना किसी औपचारिक अनुमति के काम कर रहे हैं। ऐसे में न तो उनकी जवाबदेही तय हो पाती है और न ही वाहन मालिकों को पर्याप्त सुरक्षा मिल पाती है। नए नियमों के तहत प्रत्येक डीलर को परिवहन विभाग से विधिवत प्राधिकार पत्र प्राप्त करना होगा।
यह प्राधिकार पत्र डीलर की पहचान, उसकी कार्यक्षमता और उसकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल वही डीलर बाजार में सक्रिय हों, जो नियमों का पालन करने के लिए तैयार हों।
एक जनवरी से सघन जांच अभियान की शुरुआत
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि यह नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। एक जनवरी से पूरे प्रदेश में सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान आरटीओ और परिवहन विभाग के अन्य अधिकारी यह जांच करेंगे कि कौन-कौन से डीलर प्राधिकार पत्र के साथ काम कर रहे हैं और कौन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
बिना प्राधिकार पत्र के पुराने वाहनों का कारोबार करते पाए जाने पर संबंधित डीलर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, व्यापार बंद करने के आदेश और अन्य दंडात्मक प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
आरटीओ और परिवहन आयुक्त को दिए गए निर्देश
परिवहन आयुक्त ने प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय पुराने वाहन डीलरों की सूची तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी डीलर प्राधिकार पत्र के लिए आवेदन करें। इंदौर जैसे बड़े शहरों में जहां करीब सौ से अधिक डीलर पुराने वाहनों का व्यापार करते हैं, वहां यह अभियान विशेष रूप से प्रभावी माना जा रहा है।
आरटीओ को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे डीलरों को नए नियमों की जानकारी दें और उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने में मार्गदर्शन प्रदान करें, ताकि कोई यह न कह सके कि उसे नियमों की जानकारी नहीं थी।
वाहन मालिकों को कैसे मिलेगा लाभ
नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ आम वाहन मालिकों को मिलने वाला है। जब कोई वाहन मालिक अपनी पुरानी गाड़ी किसी अधिकृत डीलर को सौंपेगा, तो केंद्रीय मोटरयान नियम के तहत निर्धारित फॉर्म 29-सी भरा जाएगा। इस फॉर्म की जानकारी जैसे ही आरटीओ को प्राप्त होगी, संबंधित डीलर उस वाहन का ‘डीम्ड ओनर’ यानी माना गया मालिक बन जाएगा।
इसका सीधा अर्थ यह है कि वाहन सौंपने के बाद मूल मालिक की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त हो जाएगी। यदि भविष्य में उस वाहन से कोई दुर्घटना होती है या उसका दुरुपयोग किया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी डीलर की होगी, न कि पुराने मालिक की।
डीलरों की जिम्मेदारी और जवाबदेही
नए प्रावधानों के तहत डीलरों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अब उन्हें न केवल वाहन की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड रखना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वाहन का स्वामित्व समय पर नए खरीदार के नाम स्थानांतरित हो।
यदि डीलर इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतता है और वाहन से जुड़ा कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसके लिए वही जिम्मेदार माना जाएगा। इससे डीलरों को अपने कामकाज में अधिक पारदर्शिता और सतर्कता बरतनी होगी।
शोरूम संचालकों के लिए भी नए नियम
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल स्वतंत्र सेकंड हैंड वाहन डीलरों तक सीमित नहीं हैं। नए वाहनों के शोरूम संचालक यदि पुरानी गाड़ियों का एक्सचेंज या खरीद-बिक्री का काम करते हैं, तो उन्हें भी प्राधिकार पत्र लेना अनिवार्य होगा।
अक्सर देखा गया है कि नए वाहनों के शोरूम में पुरानी गाड़ियों के एक्सचेंज के दौरान दस्तावेजों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। नए नियमों के बाद शोरूम संचालकों को भी वही जिम्मेदारी निभानी होगी, जो एक स्वतंत्र सेकंड हैंड डीलर पर लागू होती है।
पंजीकरण प्रक्रिया और शुल्क
प्राधिकार पत्र प्राप्त करने के लिए डीलरों को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के माध्यम से वाहन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए निर्धारित शुल्क 25 हजार रुपये रखा गया है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी है, ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो।
पंजीकरण के दौरान डीलर को अपनी पहचान, व्यापार स्थल, वित्तीय विवरण और अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्राधिकार पत्र जारी किया जाएगा।
पुराने वाहन बाजार में सुधार की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से पुराने वाहनों का बाजार अधिक संगठित और भरोसेमंद बनेगा। लंबे समय से यह बाजार अनौपचारिक रूप से संचालित हो रहा था, जिससे न केवल वाहन मालिकों को नुकसान उठाना पड़ता था, बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता था।
नए नियमों के तहत हर लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे टैक्स चोरी और धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कम होंगी।
उपभोक्ताओं का बढ़ेगा भरोसा
जब कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी बेचता है या सेकंड हैंड वाहन खरीदता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि कहीं भविष्य में उसे किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े। नए नियमों के लागू होने से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि अब उन्हें यह भरोसा होगा कि डीलर अधिकृत है और उसकी जवाबदेही तय है।
यह भरोसा ही किसी भी बाजार को स्थायी और मजबूत बनाता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में पुराने वाहनों के कारोबार से जुड़े नए नियम केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं। प्राधिकार पत्र की अनिवार्यता, सघन जांच अभियान और डीलरों की बढ़ी हुई जिम्मेदारी यह संकेत देती है कि परिवहन विभाग अब इस क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह बदलाव न केवल व्यापारियों, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।
