मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने हाल ही में वाहन पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता का खुलासा किया है। जांच में यह सामने आया कि राज्य के कई ऑटोमोबाइल डीलर्स ने वाहन मालिकों की जानकारी को नजरअंदाज करते हुए हजारों वाहनों को चुनिंदा या फर्जी मोबाइल नंबरों पर पंजीकृत कर दिया। यह मामला सुरक्षा और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से बेहद गंभीर माना जा रहा है।

परिवहन विभाग की तकनीकी जांच के अनुसार, 1 जनवरी 2025 के बाद पंजीकृत 1,71,413 वाहनों का रजिस्ट्रेशन केवल 1,342 मोबाइल नंबरों पर किया गया। इस चौंकाने वाले तथ्य ने विभाग को सख्त कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। विभाग ने सभी डीलर्स को 31 जनवरी तक वाहन मालिकों के सही मोबाइल नंबर अपडेट करने का निर्देश दिया है, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
वाहन मालिकों को झेलनी पड़ रही परेशानी
इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा नुकसान वाहन मालिकों को हो रहा है। गलत मोबाइल नंबरों के कारण उन्हें ई-चालान की सूचना नहीं मिल रही है और परिवहन विभाग की डिजिटल सेवाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते वाहन मालिक न केवल कानूनी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं, बल्कि कई बार उन्हें वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
परिवहन आयुक्त के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि इस गड़बड़ी के पीछे डीलर्स की लापरवाही और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी मुख्य कारण हैं। विभाग ने सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को संबंधित डीलर्स की सूची सौंप दी है और सुधार के लिए सात दिन का अल्टीमेटम जारी किया है।
सात दिन का अल्टीमेटम और कड़ी कार्रवाई
परिवहन विभाग ने चेताया है कि 31 जनवरी 2026 तक यदि सभी वाहन मालिकों के मोबाइल नंबर सही नहीं किए गए, तो संबंधित डीलर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन वाहनों का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी नहीं किया जाएगा और उनसे जुड़ी डिजिटल सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दी जाएंगी।
यह कदम विभाग की स्पष्ट नीति का हिस्सा है कि वाहन पंजीकरण पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होना चाहिए। गलत नंबरों पर रजिस्ट्रेशन ने न केवल कानूनी जटिलताएं पैदा की हैं, बल्कि नागरिकों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाई है।
डिजिटल प्रक्रिया में ओटीपी और फर्जीवाड़ा
आज के समय में वाहन पंजीकरण पूरी तरह डिजिटल है, जिसमें ओटीपी सत्यापन अनिवार्य होता है। कई बार सर्वर डाउन होने या ग्राहक के मोबाइल नंबर का आधार से लिंक न होने पर ओटीपी नहीं आता। ऐसी परिस्थितियों में डीलर्स ने अपने टारगेट और कमीशन सुरक्षित करने के लिए शोरूम के किसी कर्मचारी या अपने ही मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल कर लिया।
कई शोरूम में एक साथ 50 से 100 वाहनों की डिलीवरी होती है। काम का दबाव कम करने के लिए ऑपरेटर हर ग्राहक का वास्तविक मोबाइल नंबर सत्यापित करने के बजाय कॉपी-पेस्ट तकनीक अपनाते रहे। इससे कागजों में प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन सरकारी डेटाबेस में गलत जानकारी दर्ज होती चली गई।
कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
परिवहन विभाग ने अपने सॉफ्टवेयर डेटाबेस पर ‘डुप्लीकेट मोबाइल मैपिंग’ कमांड चलाकर जांच की। इसके जरिए उन मोबाइल नंबरों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल तय सीमा से अधिक बार हुआ था। परिणाम चौंकाने वाले रहे। एक ही मोबाइल नंबर पर सैकड़ों वाहन पंजीकृत पाए गए।
सॉफ्टवेयर ने यह भी ट्रैक किया कि फर्जी एंट्रियां किस डीलर आईडी से की गई थीं। इससे सबसे अधिक गड़बड़ी करने वाले शोरूम और एजेंसियों की पहचान आसान हो गई। यह जांच विभाग की तकनीकी दक्षता और डेटा निगरानी के लिए भी मिसाल बन गई है।
सुधार की दिशा में कदम
अब डीलर्स को अपने रिकॉर्ड को सही करने के लिए अंतिम मौका दिया गया है। इस कदम से वाहन मालिकों को ई-चालान की सही सूचना, डिजिटल सेवाओं की सुविधा और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। परिवहन विभाग की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि राज्य में डिजिटल प्रणाली में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम राज्य में वाहन पंजीकरण प्रक्रिया की पारदर्शिता, सुरक्षा और डिजिटल विश्वसनीयता को मजबूत करेगा।
