बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में एक दौर था जब किसी फिल्म में आइटम नंबर या एनर्जेटिक डांस की बात होती थी तो मुमैथ खान का नाम सबसे पहले लिया जाता था। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ के सुपरहिट गाने ‘देख ले’ से लेकर कई बड़ी फिल्मों तक, मुमैथ खान ने अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन अचानक वह परदे से गायब हो गईं। सालों तक दर्शकों के मन में यही सवाल रहा कि इतनी लोकप्रिय अभिनेत्री आखिर कहां चली गई। अब खुद मुमैथ खान ने अपनी जिंदगी की उस सच्चाई को साझा किया है, जिसने उनके करियर और जीवन दोनों की दिशा बदल दी।

मुमैथ खान ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी स्वेच्छा से फिल्म इंडस्ट्री नहीं छोड़ी। उनका जाना किसी करियर प्लान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का नतीजा था। उनके अनुसार, एक हादसे में उनके दिमाग की पांच नसें फट गई थीं। यह सुनना जितना डरावना है, उससे कहीं ज्यादा डरावना था उस दौर को जीना। डॉक्टरों ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर वह जीवित रहना चाहती हैं, तो कम से कम सात साल तक किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक दबाव नहीं ले सकतीं।
यह वही दौर था जब मुमैथ अपने करियर के शिखर पर थीं। फिल्मों की लाइन लगी हुई थी, साउथ और बॉलीवुड दोनों जगह उनकी मांग थी। लेकिन अचानक एक पल में सब कुछ थम गया। हादसे के बाद उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह लगातार 15 दिनों तक कोमा में रहीं। जब होश आया तो जिंदगी पहले जैसी नहीं थी। सर्जरी हुई, लंबा इलाज चला और हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता रहा।
मुमैथ खान बताती हैं कि उस समय उन्हें सिर्फ शारीरिक दर्द ही नहीं था, बल्कि मानसिक रूप से भी वह टूट चुकी थीं। एक कलाकार के लिए सबसे कठिन बात होती है अपनी पहचान से दूर होना। डॉक्टरों ने उन्हें न सिर्फ काम करने से मना किया था, बल्कि भारी सामान उठाने, तेज रोशनी में रहने और लंबे समय तक खड़े रहने तक पर रोक लगा दी थी। फिल्मों में डांस करने वाली मुमैथ के लिए यह किसी सजा से कम नहीं था।
उन्होंने उस समय को स्वीकार करना सीख लिया। मुमैथ का कहना है कि उन्होंने खुद से लड़ाई नहीं की, बल्कि हालात को समझने की कोशिश की। उन्होंने माना कि जिसने उन्हें यह पहचान दी, उसी ईश्वर ने उनके जीवन को एक विराम भी दिया है। इसी स्वीकार्यता ने उन्हें टूटने से बचाया।
इन सात वर्षों के दौरान मुमैथ ने खुद को खाली नहीं छोड़ा। उन्होंने पढ़ाई की, खुद को समझा और यह जानने की कोशिश की कि वह असल में किन चीजों से प्यार करती हैं। इस आत्ममंथन के दौर में उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें मेकअप और हेयर स्टाइलिंग में गहरी रुचि है। कैमरे के सामने रहने से ज्यादा उन्हें अब कलाकारों को संवारने में सुकून मिलने लगा।
यहीं से उनकी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू हुई। मुमैथ खान ने हैदराबाद में अपना मेकअप और हेयर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शुरू किया। यह सिर्फ एक अकादमी नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की जगह है, जो इस इंडस्ट्री में कुछ बनना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से जूझते हैं। उनकी अकादमी प्रोफेशनल कोर्स कराती है और जरूरतमंद छात्रों को पढ़ाई के लिए लोन की सुविधा भी देती है।
गरीबी में पली-बढ़ी मुमैथ खान के लिए यह कदम बेहद निजी था। उन्होंने खुद 13 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। संघर्ष, अस्वीकृति और मेहनत उन्होंने बहुत करीब से देखी है। शायद इसी वजह से आज वह दूसरों के सपनों को संवारने में अपना भविष्य देखती हैं।
आज 40 साल की उम्र में मुमैथ खान सिंगल हैं और यह उनका खुद का फैसला है। वह कहती हैं कि समाज हर किसी को जज करता है, लेकिन उन्होंने खुद को किसी को सफाई देने के बोझ से मुक्त कर लिया है। उन्हें अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है। वह वही कर रही हैं जिससे उन्हें खुशी मिलती है।
मुमैथ का यह भी कहना है कि स्टारडम क्षणिक होता है, लेकिन आत्मसम्मान और आत्मसंतोष जीवनभर साथ रहते हैं। इंडस्ट्री से दूर रहकर भी वह खुद को असफल नहीं मानतीं। उनके लिए सफलता का मतलब अब बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं, बल्कि किसी छात्र का आत्मनिर्भर बनना है।
यह कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं है, बल्कि उस हिम्मत की है जो हालात के सामने हार नहीं मानती। मुमैथ खान का जीवन बताता है कि जब रास्ता बंद हो जाए, तो नई दिशा बनाना भी एक कला है।
