आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बीमारियां अक्सर बिना शोर किए शरीर में घर बना लेती हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल भी ऐसी ही एक समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में साइलेंट किलर कहा जाता है। बाहर से देखने पर व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ नजर आता है, लेकिन अंदर ही अंदर उसकी नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल जमा होता रहता है। यह जमाव धीरे-धीरे रक्त प्रवाह को बाधित करता है और समय के साथ हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोलेस्ट्रॉल अपने आप में बुरा नहीं होता, बल्कि इसका असंतुलन समस्या पैदा करता है। शरीर को हार्मोन बनाने और कोशिकाओं की मरम्मत के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है, लेकिन जब LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है और HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है, तब दिल की सेहत खतरे में पड़ जाती है।
बिना दवा कोलेस्ट्रॉल कम करने की उम्मीद
अक्सर जब किसी की रिपोर्ट में हाई कोलेस्ट्रॉल आता है, तो पहला डर दवाइयों को लेकर होता है। लंबे समय तक दवा खाने की चिंता, साइड इफेक्ट का डर और जीवनभर दवाओं पर निर्भर रहने का तनाव आम लोगों को परेशान करता है। ऐसे में यह जानना राहत देता है कि सही खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करके भी कोलेस्ट्रॉल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
हाल ही में मशहूर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि अगर कुछ आसान लेकिन प्रभावी आदतों को अपनाया जाए, तो केवल एक महीने के भीतर बैड कोलेस्ट्रॉल को 30 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि कोलेस्ट्रॉल सीधे तौर पर हमारी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी से जुड़ा हुआ है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की असली वजहें
डॉ. सोलंकी के मुताबिक आज के समय में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी है। जंक फूड, फास्ट फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और रिफाइंड तेल का अत्यधिक इस्तेमाल नसों में सूजन पैदा करता है। इसके साथ ही घंटों बैठकर काम करना, मोबाइल और स्क्रीन के सामने लंबा समय बिताना और व्यायाम से दूरी शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है।
जब शरीर कैलोरी को सही तरीके से खर्च नहीं कर पाता, तो वही अतिरिक्त फैट कोलेस्ट्रॉल के रूप में नसों में जमा होने लगता है। यही कारण है कि आज कम उम्र के लोगों में भी हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
रिफाइंड तेल से दूरी क्यों जरूरी
डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी का पहला और सबसे अहम सुझाव रिफाइंड तेल को पूरी तरह छोड़ने का है। रिफाइंड तेलों को बनाने की प्रक्रिया में उन्हें अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इससे तेल के प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वह शरीर के लिए नुकसानदायक बन जाता है।
रिफाइंड तेल का लगातार सेवन नसों में सूजन बढ़ाता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को तेजी से जमा होने में मदद करता है। इसकी जगह अगर कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली का तेल या ऑलिव ऑयल अपनाया जाए, तो शरीर को हेल्दी फैट मिलता है। ये तेल शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL को बढ़ाने में मदद करते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
हेल्दी फैट का सही मतलब
अक्सर लोग फैट शब्द सुनते ही घबरा जाते हैं, लेकिन सभी फैट नुकसानदायक नहीं होते। शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। ऑलिव ऑयल और कोल्ड प्रेस्ड तेलों में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट दिल की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
डॉ. सोलंकी के अनुसार जब शरीर को सही फैट मिलता है, तो वह खुद बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने लगता है। इससे नसों में जमा पुराना फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है और रक्त प्रवाह बेहतर होता है।
फाइबर: कोलेस्ट्रॉल का प्राकृतिक दुश्मन
कोलेस्ट्रॉल कम करने में घुलनशील फाइबर की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। डॉक्टर शालिनी का कहना है कि रोजाना दो चम्मच घुलनशील फाइबर का सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है।
ओट्स, इसबगोल की भूसी, फ्लैक्स सीड्स और चिया सीड्स जैसे फाइबर शरीर के अंदर स्पंज की तरह काम करते हैं। ये आंतों में मौजूद अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को सोख लेते हैं और उसे पाचन तंत्र के जरिए बाहर निकाल देते हैं। नियमित रूप से फाइबर लेने से न केवल कोलेस्ट्रॉल कम होता है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है।
ड्राई फ्रूट्स का संतुलित सेवन
मेवे केवल ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ नहीं हैं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। डॉक्टर शालिनी के अनुसार रोजाना 20 से 30 ग्राम बादाम और अखरोट का सेवन कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद करता है।
इन मेवों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स नसों की सूजन को कम करते हैं और बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने में सहायक होते हैं। हालांकि, मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि जरूरत से ज्यादा मेवे लेने से कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है।
पैदल चलना: सबसे आसान लेकिन असरदार उपाय
कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए सिर्फ डाइट पर ध्यान देना काफी नहीं है। शारीरिक गतिविधि उतनी ही जरूरी है। डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी रोजाना 7,000 से 10,000 कदम पैदल चलने की सलाह देती हैं।
पैदल चलने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और जमा हुआ फैट धीरे-धीरे ऊर्जा में बदलने लगता है। इससे न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि नसों में रक्त का प्रवाह भी बेहतर होता है। नियमित वॉक दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और हार्ट अटैक के खतरे को कम करती है।
सब्जियों से भरी थाली का महत्व
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए भोजन की थाली में सब्जियों की मात्रा बढ़ाना बेहद जरूरी है। डॉक्टर शालिनी का कहना है कि लंच और डिनर में एक बड़ा कटोरा उबली या कम तेल में पकी सब्जियां जरूर शामिल करनी चाहिए।
सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोस्टेरॉल्स शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं। ये तत्व नसों में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को धीरे-धीरे कम करने में मदद करते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां, लौकी, तोरई, गाजर और ब्रोकली जैसे विकल्प दिल के लिए खास तौर पर फायदेमंद माने जाते हैं।
एक महीने में बदलाव कैसे संभव
डॉ. सोलंकी का दावा है कि अगर कोई व्यक्ति ईमानदारी से इन आदतों को एक महीने तक अपनाता है, तो उसकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट में साफ सुधार देखने को मिलता है। शरीर को जब सही पोषण और नियमित गतिविधि मिलती है, तो वह खुद को रिपेयर करना शुरू कर देता है।
पहले कुछ हफ्तों में शरीर हल्का महसूस होने लगता है, ऊर्जा बढ़ती है और थकान कम होती है। इसके बाद ब्लड रिपोर्ट में LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटने लगता है और HDL में सुधार दिखता है।
दवा से पहले जीवनशैली पर ध्यान क्यों जरूरी
हालांकि कई मामलों में दवाएं जरूरी होती हैं, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि अगर स्थिति गंभीर न हो, तो जीवनशैली में बदलाव पहला कदम होना चाहिए। सही खान-पान और एक्टिव लाइफस्टाइल न केवल कोलेस्ट्रॉल, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करने में मदद करती है।
निष्कर्ष
हाई कोलेस्ट्रॉल आज भले ही एक आम समस्या बन गई हो, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी द्वारा बताए गए उपाय यह साबित करते हैं कि बिना दवा भी कोलेस्ट्रॉल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जरूरत है तो सिर्फ सही जानकारी, अनुशासन और नियमितता की। अगर समय रहते इन आदतों को अपनाया जाए, तो दिल की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।
