भारत में रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। हर दिन लाखों यात्री लंबी और छोटी दूरी की ट्रेनों से सफर करते हैं। भोपाल रेलवे मंडल से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में भी रोज़ाना भारी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ चोरी, छेड़छाड़ और असुरक्षा की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 में रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक नया और सख्त सुरक्षा मॉडल लागू किया है।

यह नया मॉडल केवल अतिरिक्त जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निगरानी के तरीकों, गश्त के स्वरूप और त्वरित कार्रवाई की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया गया है। भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों और स्टेशनों को इस मॉडल के तहत सबसे पहले कड़ा सुरक्षा कवच दिया गया है।
सादे कपड़ों में जवान: सुरक्षा का बदला हुआ चेहरा
नई सुरक्षा व्यवस्था की सबसे अहम विशेषता है सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती। अब रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी के जवान वर्दी में ही नहीं, बल्कि सामान्य यात्रियों की तरह सादे कपड़ों में भी ट्रेनों के भीतर और प्लेटफॉर्म पर गश्त कर रहे हैं। इसका उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर बिना पूर्व सूचना के नजर रखना और अपराधियों को पकड़ना है।
अक्सर अपराधी वर्दीधारी जवानों को देखकर सतर्क हो जाते थे और मौके से बच निकलते थे। सादे कपड़ों में तैनात जवान इस कमी को दूर कर रहे हैं। ये जवान सामान्य यात्रियों के बीच रहकर पूरे सफर के दौरान कोचों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करते हैं।
आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त रणनीति
इस नए सुरक्षा मॉडल में रेलवे सुरक्षा बल और सरकारी रेलवे पुलिस के बीच समन्वय को सबसे ज्यादा मजबूत किया गया है। दोनों एजेंसियां अब अलग-अलग नहीं, बल्कि संयुक्त रूप से योजना बनाकर कार्रवाई कर रही हैं। ट्रेनों के भीतर गश्त, स्टेशनों पर चेकिंग और संदिग्धों की पहचान के लिए साझा सूचना तंत्र विकसित किया गया है।
संयुक्त रणनीति का असर साफ नजर आने लगा है। वर्ष 2025 के दौरान की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में अपराधियों को पकड़ा गया है और चोरी गए सामान की उल्लेखनीय रिकवरी हुई है। इससे यात्रियों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है।
2025 में संयुक्त कार्रवाई की बड़ी उपलब्धियां
नए सुरक्षा मॉडल के तहत वर्ष 2025 में आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में 160 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन आरोपियों पर ट्रेनों और स्टेशनों में चोरी, यात्रियों से छेड़छाड़ और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। इसके साथ ही 125 मामलों में चोरी गया सामान बरामद किया गया, जिसकी कुल कीमत करीब 33 लाख रुपये आंकी गई।
इस रिकवरी में बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, नकदी और अन्य कीमती सामान शामिल हैं। राहत की बात यह रही कि चोरी हुए मोबाइल फोन में से लगभग आधे यात्रियों को वापस लौटाए जा चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि यात्रियों के भरोसे को भी मजबूत करती है।
संवेदनशील रूट और ट्रेनों पर विशेष नजर
भोपाल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों और रूटों को विशेष निगरानी सूची में रखा गया है। बिलासपुर एक्सप्रेस और इंदौर एक्सप्रेस में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इन ट्रेनों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इन ट्रेनों में सफर के दौरान हर कोच पर नजर रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा इटारसी से रानी कमलापति स्टेशन के बीच के रूट को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। इस रूट पर अतिरिक्त पेट्रोलिंग की जा रही है और तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया गया है। स्टेशनों और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
रात की ट्रेनों और भीड़भाड़ वाले कोचों पर फोकस
रेलवे अधिकारियों के अनुसार अपराध की घटनाएं अक्सर रात के समय और भीड़भाड़ वाले कोचों में होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था में रात में चलने वाली ट्रेनों पर विशेष फोकस किया गया है। इन ट्रेनों में गश्त की आवृत्ति बढ़ाई गई है और सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती खास तौर पर की गई है।
भीड़भाड़ वाले जनरल और स्लीपर कोचों में भी चेकिंग तेज की गई है। जवान यात्रियों से संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनते हैं और संदिग्ध लोगों पर नजर रखते हैं। इससे अपराधियों में डर का माहौल बना है।
महिला यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
नई सुरक्षा व्यवस्था में महिला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। रेलवे ने महिला यात्रियों के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार या उत्पीड़न की किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
पहले जहां ऐसे मामलों के निपटारे में लंबा समय लग जाता था, वहीं अब औसतन दो महीने के भीतर मामलों का समाधान किया जा रहा है। सादे कपड़ों में महिला जवानों की तैनाती भी बढ़ाई गई है, ताकि महिला यात्रियों को तुरंत सहायता मिल सके और वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
तकनीकी निगरानी और आधुनिक संसाधन
नई सुरक्षा व्यवस्था केवल मानवीय गश्त तक सीमित नहीं है। रेलवे ने तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया है। स्टेशनों, प्लेटफॉर्म और संवेदनशील रूटों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इन कैमरों की फीड पर विशेष टीम नजर रखती है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है।
तकनीक और मानवीय प्रयासों के इस संयोजन से सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। अपराधियों के लिए ट्रेनों और स्टेशनों में छिपना अब आसान नहीं रहा।
यात्रियों में बढ़ता भरोसा और सकारात्मक असर
नई सुरक्षा व्यवस्था का सीधा असर यात्रियों के अनुभव पर पड़ा है। नियमित सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि अब ट्रेनों और स्टेशनों पर पहले की तुलना में अधिक सुरक्षा महसूस होती है। जवानों की लगातार मौजूदगी और सादे कपड़ों में गश्त से अपराधियों में डर बना हुआ है।
यात्रियों का यह भरोसा रेलवे के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षित सफर न केवल यात्रियों के मन की शांति से जुड़ा है, बल्कि रेलवे की साख और विश्वसनीयता को भी मजबूत करता है।
अधिकारियों का नजरिया और आगे की योजना
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भोपाल से गुजरने वाली और यहां से चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार गश्त, सादे कपड़ों में तैनाती और तकनीकी निगरानी के जरिए ट्रेनों के अंदर होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा रहा है।
आने वाले समय में इस सुरक्षा मॉडल को और विस्तार देने की योजना है। यात्रियों से मिले फीडबैक के आधार पर गश्त के पैटर्न और निगरानी व्यवस्था में लगातार सुधार किया जाएगा।
निष्कर्ष: सुरक्षित और भरोसेमंद रेल यात्रा की ओर कदम
भोपाल रेलवे द्वारा लागू किया गया नया सुरक्षा मॉडल यात्रियों के लिए एक सकारात्मक बदलाव लेकर आया है। सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती, आरपीएफ-जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई और महिला यात्रियों पर विशेष ध्यान ने ट्रेनों में सुरक्षा का माहौल मजबूत किया है।
यह व्यवस्था न केवल अपराध पर लगाम लगाने में सफल रही है, बल्कि यात्रियों के मन में भरोसा भी पैदा कर रही है। यदि इसी तरह सतर्कता और समन्वय बनाए रखा गया, तो रेलवे यात्रा और भी सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी।
