हाल ही में बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान ने अपने पाकिस्तान दौरे के दौरान पाकिस्तान से जेएफ़-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमान ‘खरीदने में दिलचस्पी’ दिखाई है। यह कदम पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग का संकेत देता है।

जेएफ़-17 थंडर ब्लॉक-3 एक 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर विमान है, जो एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (एईएसए) रडार और लॉन्ग रेंज बीवीआर (बियॉन्ड विज़ुअल रेंज) मिसाइलों से लैस है। यह विमान विभिन्न प्रकार के युद्ध अभियानों में हिस्सा लेने की क्षमता रखता है और हल्के वजन के साथ उच्च कार्यकुशलता प्रदान करता है।
पाकिस्तान ने चीन की मदद से इन विमानों को विकसित किया और इसके निर्माण, अपग्रेडेशन और ओवरहॉलिंग की सभी सुविधाएं देश के भीतर उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जेएफ़-17 थंडर एक हल्का, चौथी पीढ़ी का मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट है, जिसे पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना के पुराने मिराज, एफ-7 और ए-5 विमानों के विकल्प के रूप में अपनाया।
पाकिस्तान से पहले हुए अंतरराष्ट्रीय सौदे
पाकिस्तान ने पहले ही अज़रबैजान, म्यांमार और नाइजीरिया को जेएफ़-17 विमान बेचे हैं। अज़रबैजान को 40 जेएफ़-17C ब्लॉक-3 विमान देने का सौदा 4.6 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रक्षा समझौते का हिस्सा था। इसके अलावा, माना जाता है कि इराक़, लीबिया और ईरान समेत कई देशों ने इस विमान की खरीद में दिलचस्पी दिखाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान से विमान खरीदने के पीछे मुख्य कारण इसकी किफ़ायती कीमत, राजनीतिक लचीलेपन और व्यापक उपलब्धता है। पश्चिमी सप्लायर्स के मुकाबले पाकिस्तान इस मामले में अधिक लचीला और स्थानीय रखरखाव के मामले में सक्षम है।
एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान का पाकिस्तान दौरा
बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख हसन महमूद ख़ान ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। इस बैठक में ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट, एयरोस्पेस और ऑपरेशनल सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया गया। पाकिस्तानी वायुसेना ने बांग्लादेश को ट्रेनिंग सेंटर्स और दीर्घकालिक तकनीकी सहायता देने का आश्वासन भी दिया।
मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल आईएसआर और इंटीग्रेटेड एयर ऑपरेशंस सेंटर, साइबर कमांड और नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क का दौरा किया। इस दौरान बांग्लादेश को आईएसआर, साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और पायलटलेस सिस्टम्स की पाकिस्तानी क्षमताओं से रूबरू कराया गया।
बांग्लादेश ने अपने पुराने बेड़े के रखरखाव और हवाई निगरानी को बेहतर करने के लिए एयर डिफेंस रडार सिस्टम्स में सहयोग लेने की बात कही। यह दौरा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का प्रतीक माना जा रहा है।
जेएफ़-17 ब्लॉक-3 की तकनीकी और युद्धक क्षमताएँ
जेएफ़-17 थंडर ब्लॉक-3 विमान आधुनिक रडार और मिसाइलों से लैस है। इसमें हवा-से-हवा, हवा-से-ज़मीन और हवा-से-समुद्र हमलों की क्षमता है। इसकी रेंज लगभग 150 किलोमीटर है और यह बीवीआर मिसाइल से लक्ष्य का पीछा कर सकता है।
यह विमान हल्के वजन, उच्च गति और बहुमुखी ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे एयर डिफेंस, हवाई युद्ध, बॉर्डर सिक्योरिटी और हल्के हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जेएफ़-17 थंडर ने 2019 और मई 2025 में भारत के साथ तनावपूर्ण परिस्थितियों में सफल प्रदर्शन किया, जो इसके战略 महत्व को बढ़ाता है।
पाकिस्तान और चीन की साझेदारी के कारण यह विमान किफायती होने के साथ-साथ तकनीकी लचीलेपन भी प्रदान करता है। इसके संचालन और रखरखाव के लिए पश्चिमी सप्लायर्स पर निर्भर रहना आवश्यक नहीं है।
वैश्विक रक्षा बाजार में बदलते रुझान
विशेषज्ञों का मानना है कि जेएफ़-17 की बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि कई देश पश्चिमी देशों के बजाय विकासशील देशों से आधुनिक विमान खरीदना पसंद कर रहे हैं। इसकी किफ़ायती कीमत, राजनीतिक लचीलापन और स्थानीय रखरखाव की सुविधा इसे सीमित बजट वाली वायुसेनाओं के लिए आदर्श विकल्प बनाती है।
एलेक्स प्लिट्सास और डगलस बेरी जैसे विशेषज्ञ कहते हैं कि पाकिस्तान-चीन साझेदारी के कारण यह विमान युद्धक दक्षता और लागत में संतुलन प्रदान करता है। यह टॉप-टियर जेट नहीं है, लेकिन चौथी पीढ़ी के विमान के रूप में कई मल्टी-रोल मिशनों के लिए प्रभावी है।
जेएफ़-17 प्रोजेक्ट का इतिहास
जेएफ़-17 प्रोजेक्ट की शुरुआत 1995 में पाकिस्तान और चीन के बीच एमओयू से हुई। पहला टेस्ट मॉडल 2003 में तैयार हुआ और 2010 में पाकिस्तानी वायुसेना ने इसे अपनाया। प्रोजेक्ट में रूसी मिग निर्माता मिकोयान भी शामिल रही।
ब्लॉक-3 संस्करण में एईएसए रडार, आधुनिक हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और बेहतर एवियोनिक्स शामिल हैं। इस संस्करण का लक्ष्य पाकिस्तानी वायुसेना को क्षेत्र में सैन्य संतुलन बनाए रखने में मदद करना है।
