अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जब भी किसी बड़े टूर्नामेंट की तैयारी शुरू होती है, तो आमतौर पर टीमों का फोकस रणनीति, खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन पर रहता है। लेकिन आगामी टी20 विश्व कप से पहले पाकिस्तान क्रिकेट एक अलग ही कारण से चर्चा में आ गया है। मैदान के बाहर शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है। मामला किसी हार, चयन विवाद या प्रदर्शन से नहीं, बल्कि प्रचार पोस्टर में कप्तान की तस्वीर न होने से जुड़ा है।

टी20 विश्व कप के लिए जैसे ही टिकटों की बिक्री से संबंधित प्रचार सामग्री सामने आई, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। बोर्ड का कहना है कि प्रचार पोस्टर में पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा की तस्वीर न होना भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है। इसी मुद्दे को लेकर बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।
प्रचार पोस्टर बना विवाद की जड़
टी20 विश्व कप के टिकटों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए जारी किए गए प्रचार पोस्टर में कुछ चुनिंदा टीमों के कप्तानों की तस्वीरें लगाई गई थीं। इन पोस्टरों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के कप्तान दिखाई दिए, लेकिन पाकिस्तान के कप्तान की तस्वीर इसमें शामिल नहीं थी। इसी बात को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सवाल उठाए।
बोर्ड के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी एक बड़े टूर्नामेंट के दौरान प्रचार सामग्री में पाकिस्तान के कप्तान को नजरअंदाज किया गया था। उस समय भी बोर्ड ने आपत्ति दर्ज कराई थी और बाद में प्रचार सामग्री में बदलाव किया गया था।
भेदभाव का आरोप और नाराजगी
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि भले ही टीम वर्तमान में रैंकिंग में शीर्ष स्थानों पर न हो, लेकिन उसका इतिहास और विश्व कप में उसकी मौजूदगी हमेशा दर्शकों का ध्यान खींचती रही है। बोर्ड का तर्क है कि पाकिस्तान क्रिकेट का एक समृद्ध अतीत रहा है और उसकी टीम हमेशा से चर्चा में रही है, ऐसे में कप्तान की तस्वीर को नजरअंदाज करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
बोर्ड से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रचार पोस्टर केवल खिलाड़ियों की तस्वीर भर नहीं होते, बल्कि वे किसी टीम की पहचान और सम्मान से जुड़े होते हैं। कप्तान की तस्वीर न होने से यह संदेश जाता है कि टीम को जानबूझकर हाशिए पर रखा जा रहा है।
क्रिकेट जगत में बन रहा मजाक
जहां पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में इस पर अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विश्लेषक इसे एक गैरज़रूरी विवाद बता रहे हैं। उनका कहना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम को मैदान के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए, न कि प्रचार पोस्टरों पर।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बोर्ड की बचकानी हरकत बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि पाकिस्तान क्रिकेट को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए।
आईसीसी की चुप्पी
अब तक इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आईसीसी की चुप्पी ने इस विवाद को और हवा दे दी है। यह साफ नहीं है कि प्रचार पोस्टर में बदलाव किया जाएगा या नहीं, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भरोसा है कि उनकी आपत्ति को गंभीरता से लिया जाएगा।
क्रिकेट प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्रचार रणनीतियां अक्सर व्यावसायिक और मार्केटिंग जरूरतों के हिसाब से तय की जाती हैं। इसमें आमतौर पर उन खिलाड़ियों या टीमों को प्रमुखता दी जाती है, जिनकी लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर ज्यादा होती है। ऐसे में हर टीम के कप्तान को समान रूप से जगह मिलना जरूरी नहीं समझा जाता।
एशिया कप की पुरानी यादें
यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ महीने पहले भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी। एक बड़े एशियाई टूर्नामेंट के दौरान प्रचार सामग्री में पाकिस्तान के कप्तान को शामिल नहीं किया गया था। उस समय बोर्ड ने एशियाई क्रिकेट परिषद से बात की थी और बाद में स्थिति में बदलाव हुआ था।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को उम्मीद है कि इस बार भी बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। हालांकि आलोचकों का कहना है कि बार-बार ऐसे मुद्दे उठाना बोर्ड की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
मैदान के बाहर ज्यादा शोर
पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। एक समय दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में गिने जाने वाले पाकिस्तान ने कई बार अप्रत्याशित प्रदर्शन से सबको चौंकाया है। लेकिन हाल के वर्षों में टीम का प्रदर्शन अस्थिर रहा है। ऐसे में विश्व कप से पहले इस तरह के विवाद टीम के फोकस को भटका सकते हैं।
पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि कप्तान की तस्वीर पोस्टर में है या नहीं, इससे टीम के प्रदर्शन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। असली जवाब मैदान पर बल्ले और गेंद से दिया जाता है।
प्रशंसकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसकों की प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ समर्थक बोर्ड के रुख का समर्थन कर रहे हैं और इसे सम्मान से जुड़ा मामला बता रहे हैं। वहीं कई प्रशंसक इसे गैरजरूरी विवाद मानते हुए टीम को खेल पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया कि जब टीम का प्रदर्शन लगातार सवालों के घेरे में रहा है, तब बोर्ड को प्रचार पोस्टर की चिंता क्यों हो रही है।
विश्व कप से पहले माहौल
टी20 विश्व कप से पहले हर टीम अपनी रणनीति, संयोजन और मानसिक मजबूती पर काम कर रही है। ऐसे समय में पाकिस्तान क्रिकेट का यह विवाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी छवि को प्रभावित कर सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड को ऐसे मुद्दों को तूल देने से बचना चाहिए और खिलाड़ियों को शांत माहौल देना चाहिए।
निष्कर्ष
टी20 विश्व कप जैसे बड़े आयोजन से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का प्रचार पोस्टर को लेकर नाराज होना यह दिखाता है कि टीम और बोर्ड के लिए सम्मान और पहचान का सवाल कितना अहम है। लेकिन साथ ही यह भी सच है कि बार-बार इस तरह के विवाद पाकिस्तान क्रिकेट को मजाक का विषय बना देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस विवाद का कोई समाधान निकलता है या यह सिर्फ सोशल मीडिया की बहस बनकर रह जाता है। असली परीक्षा तो विश्व कप के मैदान पर ही होगी, जहां प्रदर्शन ही हर सवाल का जवाब देगा।
