पाकिस्तान में इन दिनों एक ऐसा सवाल गूंज रहा है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। सवाल यह है कि आखिर Gen Z पर लिखे एक लेख से ऐसा क्या हुआ कि उसे कुछ ही घंटों में हटवाना पड़ा। यह कोई साधारण लेख नहीं था, बल्कि वह आवाज थी, जो पाकिस्तान की युवा पीढ़ी के भीतर लंबे समय से दबे असंतोष को शब्द दे रही थी। अमेरिका में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र जोरैन निज़ामनी द्वारा लिखा गया यह लेख अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया और देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया।

Gen Z और बदलती वैश्विक राजनीति
दुनिया भर में जेनरेशन Z यानी 1990 के दशक के अंत और 2000 के बाद जन्मी पीढ़ी ने राजनीति, समाज और संस्कृति को नए सिरे से परिभाषित करना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश, नेपाल और कई अन्य देशों में युवाओं की भागीदारी ने राजनीतिक बदलावों को जन्म दिया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान में भी Gen Z चुपचाप किसी बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। जोरैन निज़ामनी का लेख इसी सवाल की ओर इशारा करता नजर आया।
‘It is Over’ नाम का लेख और उसका संदेश
यह लेख ‘It is Over’ शीर्षक से 1 जनवरी को एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित हुआ था। लेख का लहजा आक्रामक नहीं था, लेकिन इसकी बातों में वह सच्चाई थी, जिसने सत्ता को असहज कर दिया। जोरैन ने लिखा कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी अब सरकार और सेना के पारंपरिक राष्ट्रवादी नारों से प्रभावित नहीं होती। युवा यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब उन्हें रोजगार, समान अवसर और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं, तो उनसे अंधी देशभक्ति की उम्मीद क्यों की जा रही है।
सत्ता और युवा के बीच गहराती खाई
लेख में जोरैन ने उस पीढ़ीगत खाई को रेखांकित किया, जो पाकिस्तान की राजनीति में साफ दिखाई देती है। एक ओर सत्ता में बैठे बुजुर्ग नेता हैं, जिनकी सोच और प्राथमिकताएं बीते दौर की हैं, वहीं दूसरी ओर युवा हैं, जो वैश्विक दुनिया से जुड़े हुए हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और वैश्विक शिक्षा ने Gen Z को सवाल पूछने की आदत सिखा दी है। यही आदत पाकिस्तान के सत्ताधारियों को असहज कर रही है।
सेना और सरकार का जिक्र क्यों नहीं फिर भी विवाद
दिलचस्प बात यह है कि लेख में न तो पाकिस्तानी सेना प्रमुख का नाम लिया गया था और न ही मौजूदा सरकार पर सीधा हमला किया गया था। इसके बावजूद लेख को हटाने का आदेश दिया गया। यह अपने आप में संकेत देता है कि समस्या किसी व्यक्ति या संस्था के नाम लेने की नहीं थी, बल्कि उस सोच की थी, जो लेख के जरिए सामने आ रही थी। लेख में यह साफ कहा गया था कि देशभक्ति भाषणों से नहीं आती, बल्कि तब पैदा होती है जब नागरिकों को सम्मानजनक जीवन मिलता है।
बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से टूटा भरोसा
जोरैन ने अपने लेख में पाकिस्तान में बढ़ती बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि युवा यह देख रहे हैं कि मेहनत के बावजूद उन्हें आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल रहे। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद ने उनके भरोसे को तोड़ दिया है। ऐसे माहौल में Gen Z के लिए देश के भीतर भविष्य देख पाना मुश्किल होता जा रहा है।
पलायन बनता जा रहा है विकल्प
लेख का सबसे अहम हिस्सा वह था, जिसमें पाकिस्तान से हो रहे बड़े पैमाने पर पलायन का जिक्र किया गया। जोरैन के अनुसार, डर और दबाव के कारण युवा खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे, लेकिन वे चुपचाप देश छोड़ने का रास्ता चुन रहे हैं। डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बड़ी संख्या में विदेश जा रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में हजारों डॉक्टर और इंजीनियर पाकिस्तान छोड़ चुके हैं।
Gen Z की खामोश नाराज़गी
लेख में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी अब खुलकर सड़कों पर उतरने के बजाय खामोश तरीके से अपनी नाराज़गी जाहिर कर रही है। वे बेहतर इंटरनेट, सस्ती तकनीक और व्यक्तिगत आज़ादी चाहते हैं, लेकिन उन्हें पाबंदियां ही मिल रही हैं। यही कारण है कि Gen Z पाकिस्तान में अपना भविष्य सुरक्षित नहीं मान रहा।
लेख हटाने के बाद उठा विरोध
जैसे ही यह लेख वेबसाइट से हटाया गया, सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया। कई वरिष्ठ पत्रकारों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया। उनका कहना था कि सच्चाई को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे। लेख की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और जोरैन रातोंरात पाकिस्तानी Gen Z के लिए एक प्रतीक बन गए।
समर्थन में उठी आवाजें
कई चर्चित हस्तियों ने लेख की तारीफ की और इसे पाकिस्तान के युवाओं की भावनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति बताया। कुछ ने कहा कि यह लेख हर उस युवा की आवाज है, जो सिस्टम से निराश हो चुका है। राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी इसे साझा किया और कहा कि बिना न्याय और रोजगार के केवल प्रचार से देश नहीं चल सकता।
जोरैन निज़ामनी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद जोरैन निज़ामनी ने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि लेख उनके निजी अनुभव और विचारों पर आधारित था। उनका उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि सच्चाई को सामने लाना था। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई अक्सर असहज होती है और इसलिए विवाद खड़ा करती है।
परिवार की प्रतिक्रिया
जोरैन की मां फ़ाज़िला क़ाज़ी ने भी बयान दिया कि इस लेख का मकसद किसी संस्था या व्यक्ति पर हमला करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक युवा की ईमानदार कोशिश थी, जो अपने देश की स्थिति को समझने और समझाने का प्रयास कर रहा था।
कौन हैं जोरैन निज़ामनी
जोरैन निज़ामनी पाकिस्तान के चर्चित कलाकार परिवार से आते हैं। वे प्रसिद्ध अभिनेता कैसर ख़ान निज़ामानी और अभिनेत्री फ़ाज़िला क़ाज़ी के बेटे हैं। वर्तमान में वे अमेरिका की अर्कांसस यूनिवर्सिटी में अपराध विज्ञान में पीएचडी कर रहे हैं। इसके अलावा वे एक वकील और प्रोफेसर भी हैं। उनकी शिक्षा और वैश्विक अनुभव ने उन्हें पाकिस्तान की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को अलग नजरिए से देखने की क्षमता दी है।
Gen Z और भविष्य की राजनीति
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पाकिस्तान की राजनीति में Gen Z की भूमिका क्या होगी। क्या यह पीढ़ी चुपचाप पलायन करती रहेगी या किसी बड़े बदलाव की नींव रखेगी। लेख को हटाया जाना भले ही तात्कालिक समाधान हो, लेकिन इससे उठे सवाल लंबे समय तक पाकिस्तान की राजनीति को परेशान करते रहेंगे।
निष्कर्ष
जोरैन निज़ामनी का लेख केवल एक राय नहीं था, बल्कि वह उस पीढ़ी की आवाज थी, जो अपने भविष्य को लेकर असमंजस में है। लेख को हटाने से भले ही सत्ता को अस्थायी राहत मिली हो, लेकिन Gen Z की बेचैनी को दबाया नहीं जा सकता। यह विवाद बताता है कि पाकिस्तान में बदलाव की चर्चा अब बंद कमरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह युवा मन में गहराई से पैठ बना चुकी है।
