दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया की भू-राजनीति एक बार फिर तेज़ी से करवट लेती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में नए प्रयोग कर रहा है और अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के बाद अब म्यांमार की ओर पाकिस्तान के बढ़ते कूटनीतिक कदमों ने नई दिल्ली की रणनीतिक चिंताओं को गहरा कर दिया है।

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार की सक्रियता इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र बिंदु बनकर उभरी है। हाल ही में बांग्लादेश की सरकार के साथ संवाद स्थापित करने के बाद अब उनकी नजर म्यांमार पर टिकती दिख रही है। इस दिशा में म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे का पाकिस्तान दौरा एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
म्यांमार के विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा
म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे 24 जनवरी की रात चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस्लामाबाद पहुंचने पर उनका औपचारिक और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पाकिस्तान ने इस दौरे को दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से मजबूत करने के एक बड़े अवसर के रूप में प्रस्तुत किया।
यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब म्यांमार आंतरिक संकट और गृह युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है। देश में सैन्य जुंटा और विभिन्न सशस्त्र गुटों के बीच संघर्ष जारी है। ऐसे हालात में पाकिस्तान का म्यांमार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास कई सवाल खड़े करता है, खासकर भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में।
इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय वार्ता
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के बीच विस्तृत और व्यापक बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने इसे उपयोगी और सकारात्मक बताया। बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने पर सहमति बनी और सहयोग के कई नए क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
संयुक्त प्रेस वार्ता में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान और म्यांमार के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और इसी सकारात्मक आधार पर दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों ने सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
किन मुद्दों पर बनी सहमति
इस बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने, एक-दूसरे के नागरिकों को कांसुलर सहायता प्रदान करने और भविष्य में समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे ने भी पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने व्यापार, व्यवसाय, निवेश, सेना-से-सेना संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैज्ञानिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पाकिस्तान की बदली हुई विदेश नीति की झलक
पाकिस्तान लंबे समय से दक्षिण एशिया में अपनी कूटनीति को भारत-केंद्रित दृष्टिकोण से देखता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में उसने यह महसूस किया है कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उसे नए साझेदारों की तलाश करनी होगी।
बांग्लादेश के साथ रिश्तों को सुधारने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार बनने के बाद पाकिस्तान ने वहां अपनी सक्रियता बढ़ाई है। अब म्यांमार की ओर बढ़ते कदम यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान भारत के पूर्वी पड़ोस में अपने लिए नई जगह तलाशने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ती है चिंता
भारत की चिंता केवल कूटनीतिक संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे सुरक्षा निहितार्थ भी हैं। म्यांमार भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिजोरम के साथ लंबी सीमा साझा करता है। यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, जहां अलग-अलग जातीय और सशस्त्र समूह सक्रिय रहे हैं।
म्यांमार में जारी अस्थिरता और गृह युद्ध की स्थिति इस चिंता को और बढ़ा देती है। यदि पाकिस्तान म्यांमार में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल होता है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है।
बांग्लादेश से म्यांमार तक संभावित गलियारा
भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजर में पाकिस्तान की मंशा लंबे समय से बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल कर पूर्वोत्तर भारत में अशांति फैलाने की रही है। अब यदि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ-साथ म्यांमार में भी अपनी पहुंच बढ़ाने में कामयाब होता है, तो यह उसके लिए एक संभावित रणनीतिक गलियारा बन सकता है।
म्यांमार की वर्तमान अव्यवस्था और कमजोर आंतरिक नियंत्रण पाकिस्तान के ऐसे प्रयासों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकते हैं। यही वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर रख रहा है।
म्यांमार का आंतरिक संकट और क्षेत्रीय प्रभाव
म्यांमार पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक और सैन्य उथल-पुथल से गुजर रहा है। सैन्य तख्तापलट के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है। कई सशस्त्र गुट जुंटा सेना के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिससे पूरे देश में अस्थिरता का माहौल है।
इस अस्थिरता का असर केवल म्यांमार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में शरणार्थियों की आवाजाही और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पहले ही चिंता का विषय बने हुए हैं।
पाकिस्तान-म्यांमार सैन्य सहयोग की आशंका
बैठक में सेना-से-सेना सहयोग की बात सामने आना भारत के लिए विशेष चिंता का विषय माना जा रहा है। यदि पाकिस्तान और म्यांमार के बीच सैन्य स्तर पर सहयोग बढ़ता है, तो इससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
हालांकि अभी तक इस दिशा में किसी ठोस समझौते की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा इस विषय पर सकारात्मक रुख दिखाना संकेत देता है कि भविष्य में ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं।
भारत की संभावित रणनीति
भारत पारंपरिक रूप से म्यांमार के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश करता रहा है। चाहे वह सुरक्षा सहयोग हो या आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट, भारत ने हमेशा म्यांमार को अपने ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का अहम हिस्सा माना है।
पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत के सामने चुनौती यह होगी कि वह म्यांमार में अपने प्रभाव को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करे। इसके लिए कूटनीतिक संवाद, विकास परियोजनाएं और सुरक्षा सहयोग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्षेत्रीय राजनीति में नया मोड़
दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया की राजनीति में यह घटनाक्रम एक नए मोड़ की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान का बांग्लादेश और अब म्यांमार के साथ रिश्ते सुधारने का प्रयास भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता को एक नए आयाम में ले जा सकता है।
यह केवल द्विपक्षीय संबंधों का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।
निष्कर्ष: सतर्क नजरें और बदलता परिदृश्य
पाकिस्तान और म्यांमार के बीच बढ़ते संपर्क भारत के लिए एक चेतावनी संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं। बांग्लादेश के बाद अब म्यांमार में पाकिस्तान की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।
भारत निश्चित रूप से इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेगा और अपनी कूटनीतिक व सुरक्षा रणनीतियों को उसी के अनुसार ढालेगा। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह पहल केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रहती है या क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली दिशा में आगे बढ़ती है।
