पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां असंतोष, आक्रोश और सड़कों पर उतरने की चेतावनी एक साथ दिखाई दे रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने देशव्यापी बंद और व्यापक विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक हालात को लेकर गंभीर चिंताएं गहराने लगी हैं।

इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की कुख्यात अदियाला जेल में बंद हैं। हाल ही में अदालत द्वारा उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भ्रष्टाचार के एक मामले में 17-17 साल की सजा सुनाए जाने के बाद पीटीआई समर्थकों में आक्रोश और तेज हो गया है। पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है और दावा कर रही है कि इमरान खान को योजनाबद्ध तरीके से राजनीति से बाहर करने की कोशिश की जा रही है।
जेल से आंदोलन की दिशा तय होने का दावा
पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन इमरान खान के सीधे निर्देश पर शुरू किया जा रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब संवैधानिक सीमाओं के भीतर अंतिम प्रयास का समय आ गया है। उनके अनुसार, अगर यह आंदोलन भी असफल रहा तो इसके बाद हालात पूरी तरह बदल सकते हैं।
गंडापुर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इमरान खान को रिहा नहीं किया गया, तो पीटीआई पाकिस्तान की हर सड़क और हर गली को जाम कर देगी। यह बयान केवल राजनीतिक दबाव नहीं बल्कि सत्ता प्रतिष्ठान के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
अदियाला जेल और दुर्व्यवहार के आरोप
इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। पार्टी और उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है और बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। इन आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
संयुक्त राष्ट्र के कुछ मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इमरान खान के कथित एकांत कारावास पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार से स्थिति में सुधार की मांग की है। इससे पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सजा के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान
अदालत द्वारा सुनाई गई 17 साल की सजा ने राजनीतिक माहौल को और अधिक विस्फोटक बना दिया है। पीटीआई का कहना है कि यह फैसला निष्पक्ष नहीं बल्कि सत्ता में बैठे लोगों के दबाव में लिया गया है। पार्टी का दावा है कि इमरान खान को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह सैन्य और राजनीतिक प्रतिष्ठान के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार समर्थक वर्ग इस फैसले को कानून की जीत बता रहा है। उनका कहना है कि इमरान खान को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता और भ्रष्टाचार के मामलों में सजा मिलना स्वाभाविक है।
देशव्यापी बंद का संभावित असर
पीटीआई के देशव्यापी बंद के आह्वान से पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ने की आशंका है। व्यापार, परिवहन और रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। पिछली बार जब पीटीआई ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे, तब कई शहरों में हिंसा, आगजनी और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था।
इस बार भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि किसी भी तरह की अराजकता को सख्ती से निपटा जाएगा।
राजनीतिक संघर्ष या जनांदोलन?
पीटीआई इस आंदोलन को लोकतंत्र और इंसाफ की लड़ाई बता रही है, जबकि विरोधी इसे सत्ता में वापसी की हताश कोशिश करार दे रहे हैं। इमरान खान की लोकप्रियता अब भी एक बड़े वर्ग में बनी हुई है, खासकर युवाओं और शहरी मध्यम वर्ग के बीच। यही वजह है कि सड़कों पर बड़े जमावड़े की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि सवाल यह भी है कि क्या यह आंदोलन वाकई इमरान खान की रिहाई तक पहुंच पाएगा या फिर यह भी पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास के कई अधूरे आंदोलनों में शामिल हो जाएगा।
आने वाले दिनों में क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन पाकिस्तान के लिए बेहद संवेदनशील हो सकते हैं। एक ओर राजनीतिक अस्थिरता है, दूसरी ओर आर्थिक संकट और सुरक्षा चुनौतियां। ऐसे में व्यापक विरोध प्रदर्शन हालात को और बिगाड़ सकते हैं।
पीटीआई के लिए यह आंदोलन प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है, जबकि सरकार इसे कानून-व्यवस्था का सवाल मान रही है। टकराव की यह स्थिति पाकिस्तान को एक और बड़े राजनीतिक संकट की ओर धकेल सकती है।
