लोकसभा ने 6 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया, जिसका उद्देश्य पान मसाला, गुटखा और अन्य हानिकारक वस्तुओं पर उपकर लगाकर प्राप्त धन को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च करना है। इसे ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ के नाम से पेश किया गया। वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि यह उपकर नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि इससे राज्यों और केंद्र को अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा सके।

विधेयक की चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जा रहा है और आम लोगों की बुनियादी जरूरतों पर कोई कर नहीं बढ़ाया जा रहा। उन्होंने कहा कि आयकर सीमा में व्यापक छूट दी गई है और 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर देने की आवश्यकता नहीं है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि जीएसटी व्यवस्था में सुधार किया गया है ताकि उपभोग्य वस्तुएं किफायती बनी रहें।
विधेयक की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
इस उपकर की आवश्यकता उस समय बढ़ी जब सरकार ने यह देखा कि रक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधिक वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में कई रक्षा परियोजनाओं के लिए निधियों की कमी रही, जिसका उल्लेख वित्त मंत्री ने बोफोर्स मामले के बाद की स्थिति का हवाला देते हुए किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई रक्षा परियोजनाओं पर निर्णय नहीं हो पाए और अब समय आ गया है कि अतिरिक्त संसाधन जुटाए जाएं।
उपकर का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रत्यक्ष निवेश सुनिश्चित करता है। पान मसाला और गुटखा जैसी हानिकारक वस्तुओं पर उपकर लगाने से न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि समाज में स्वास्थ्य-संवेदनाओं को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
विधेयक के अनुसार, उपकर उन मशीनों और प्रक्रियाओं पर लगाया जाएगा, जिनके माध्यम से पान मसाला और गुटखा का उत्पादन होता है। इससे उत्पन्न राजस्व का हिस्सा केंद्र और राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। 2017 में जीएसटी की शुरूआत के समय राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था लागू की गई थी। इस व्यवस्था को बाद में 2026 तक बढ़ा दिया गया था। नए उपकर के तहत इस राजस्व का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस उपकर से जीएसटी व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पान मसाला और गुटखा पर 40 प्रतिशत की जीएसटी पहले जैसी बनी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपकर केवल हानिकारक वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री पर लागू होगा, ताकि सामान्य नागरिकों के लिए कीमतों में वृद्धि न हो।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
इस कानून से न केवल राज्य और केंद्र को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स लगाने से उनका उपभोग घट सकता है और समाज में स्वास्थ्य चेतना बढ़ सकती है। साथ ही, रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक धन उपलब्ध होने से राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्व-निर्धारित परियोजनाओं में तेजी आएगी।
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विधेयक एक संतुलित दृष्टिकोण का उदाहरण है। आम नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केवल हानिकारक वस्तुओं पर कर लगाया जा रहा है। इससे सरकार को राजस्व बढ़ाने का अवसर मिलेगा और समाज में स्वास्थ्य और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
विधेयक के पारित होने की प्रक्रिया
विधेयक सदन में ध्वनिमत से पारित हुआ। वित्त मंत्री ने सदस्यों द्वारा प्रस्तुत संशोधनों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी भी तरह से सामान्य वस्तुओं पर असर नहीं डालेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस उपकर से प्राप्त धन का एक हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाएगा और इसका उपयोग केवल स्वास्थ्य और सुरक्षा क्षेत्र में किया जाएगा।
संसद में विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि इसे लागू करते समय सभी नियमों का पालन किया जाए। इसके तहत सभी उत्पादन इकाइयों, बिक्री और वितरण चैनलों पर निगरानी रखी जाएगी।
व्यापक समीक्षा और विशेषज्ञ दृष्टिकोण
वित्त मंत्री ने बताया कि यह उपकर नई व्यवस्था नहीं है। 2014 से पहले चार उपकर लगाए जाते थे। इसके अलावा, इस उपकर का संग्रह कैग की निगरानी में होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि राजस्व का सही उपयोग हो और किसी भी प्रकार का दुरुपयोग न हो।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है कि वह केवल राजस्व संग्रह की दृष्टि से ही नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए भी निर्णय ले रही है।
निष्कर्ष
स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025, भारतीय संसद की उस दूरदर्शिता का उदाहरण है, जिसमें राजस्व संग्रह, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा को संतुलित रूप से जोड़ा गया है। यह विधेयक दर्शाता है कि सरकार केवल आम नागरिकों के वित्तीय बोझ को बढ़ाए बिना सामाजिक और राष्ट्रीय हितों के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
यह निर्णय न केवल वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज में स्वास्थ्य चेतना बढ़ाने और हानिकारक वस्तुओं के उपभोग को घटाने के लिए भी एक सकारात्मक कदम है।
