डिजिटल युग में सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिकों की पहुंच में लाने की दिशा में भारत ने बीते कुछ वर्षों में बड़े कदम उठाए हैं। पासपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी प्रक्रिया भी अब पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आधारित हो चुकी है। आवेदन से लेकर अपॉइंटमेंट और स्टेटस ट्रैकिंग तक की सुविधा ने आम नागरिकों का समय और श्रम दोनों बचाया है। लेकिन इसी डिजिटल सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी अब लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

इसी बढ़ती समस्या को देखते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल ने आम नागरिकों को सचेत करने के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। यह चेतावनी केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश सहित देशभर के उन नागरिकों के लिए भी प्रासंगिक है, जो पासपोर्ट बनवाने या नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
फर्जी वेबसाइट और नकली लिंक बन रहे हैं ठगी का हथियार
आज के समय में किसी भी जानकारी के लिए सबसे पहले लोग गूगल सर्च या सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। पासपोर्ट आवेदन के मामले में भी यही प्रवृत्ति देखने को मिलती है। इसी आदत का फायदा उठाकर ठग नकली वेबसाइट, फर्जी मोबाइल ऐप और भ्रामक सोशल मीडिया लिंक तैयार कर रहे हैं, जो देखने में सरकारी वेबसाइट जैसे ही प्रतीत होते हैं।
इन वेबसाइट्स पर पासपोर्ट आवेदन से जुड़ी सभी सुविधाएं दिखाई जाती हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति आवेदन की प्रक्रिया शुरू करता है, उससे तय सरकारी शुल्क से कहीं अधिक रकम वसूल ली जाती है। कई मामलों में आवेदन पूरा होने के बाद भी न तो अपॉइंटमेंट मिलता है और न ही कोई आधिकारिक पुष्टि।
भोपाल पासपोर्ट कार्यालय की सख्त चेतावनी
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल को बीते कुछ महीनों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लोग पासपोर्ट आवेदन के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर कार्यालय ने एक औपचारिक एडवाइजरी जारी की है।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शितांशु चौरसिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पासपोर्ट सेवाओं के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट्स और अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे लिंक सक्रिय हैं, जो सरकारी वेबसाइट के नाम और डिज़ाइन का दुरुपयोग कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
तय सरकारी शुल्क से अधिक वसूली पूरी तरह अवैध
एडवाइजरी में यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई है कि पासपोर्ट आवेदन का शुल्क सरकार द्वारा पहले से निर्धारित है और इसमें किसी भी प्रकार की अतिरिक्त राशि लेना गैरकानूनी है।
सामान्य पासपोर्ट के लिए शुल्क 1500 रुपये निर्धारित है, जबकि तत्काल पासपोर्ट के लिए 3500 रुपये का शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सेवा के नाम पर पैसे मांगना पूरी तरह अवैध है।
इसके बावजूद कई फर्जी वेबसाइट और एजेंट आवेदन प्रक्रिया को “तेज़”, “गारंटी के साथ” या “बिना अपॉइंटमेंट” जैसी शर्तों के साथ प्रस्तुत कर लोगों से हजारों रुपये ऐंठ लेते हैं।
निजी जानकारी के दुरुपयोग का भी खतरा
ठगी केवल पैसों तक सीमित नहीं है। जब कोई व्यक्ति फर्जी वेबसाइट पर आवेदन करता है, तो वह अपनी निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, पैन नंबर, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी साझा करता है। कई मामलों में ओटीपी और बैंक से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाती है।
ऐसी स्थिति में न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पहचान की चोरी और साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि पासपोर्ट कार्यालय ने लोगों को बार-बार यह सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ अपनी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
केवल आधिकारिक माध्यम से ही करें आवेदन
भोपाल पासपोर्ट कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट आवेदन के लिए केवल दो ही आधिकारिक माध्यम हैं। पहला, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट www.passportindia.gov.in और दूसरा, एम-पासपोर्ट सेवा मोबाइल ऐप।
इन दोनों प्लेटफॉर्म्स के अलावा किसी भी वेबसाइट, ऐप या एजेंट के माध्यम से किया गया आवेदन असुरक्षित है। गूगल या सोशल मीडिया पर दिखने वाले स्पॉन्सर्ड लिंक, आकर्षक ऑफर या त्वरित सेवा के दावे अक्सर ठगी का माध्यम होते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ता भ्रम
आजकल फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े कई विज्ञापन और पोस्ट दिखाई देते हैं। इनमें खुद को सरकारी प्रतिनिधि बताने वाले लोग सीधे संपर्क करने को कहते हैं। ऐसे मामलों में लोग भरोसा कर बैठते हैं और बाद में ठगी का शिकार हो जाते हैं।
पासपोर्ट कार्यालय ने साफ किया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी प्रकार की पासपोर्ट सेवा प्रदान नहीं की जाती। यदि कोई व्यक्ति या पेज ऐसा दावा करता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए।
शिकायत दर्ज कराना भी है जरूरी
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को फर्जी वेबसाइट, लिंक या एजेंट की जानकारी मिलती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों की तुरंत शिकायत दर्ज कराना जरूरी है, ताकि अन्य लोग ठगी से बच सकें।
सरकारी तंत्र तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है, जब नागरिक भी सजग और जागरूक हों। शिकायत के माध्यम से ही फर्जी नेटवर्क को चिन्हित कर कार्रवाई की जा सकती है।
डिजिटल साक्षरता ही सबसे बड़ा बचाव
यह मामला केवल पासपोर्ट सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ तभी सुरक्षित रूप से उठाया जा सकता है, जब उपयोगकर्ता सतर्क और जागरूक हों।
सरकारी सेवाओं के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही उपयोग करना चाहिए। किसी भी सेवा में “गारंटी” या “तेज़ प्रक्रिया” जैसे शब्द अक्सर ठगी का संकेत होते हैं।
निष्कर्ष: सुविधा के साथ सतर्कता अनिवार्य
भोपाल पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जारी की गई यह एडवाइजरी एक चेतावनी भर नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शक भी है। डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाना जरूरी है, लेकिन बिना जांच-पड़ताल के किसी लिंक या एजेंट पर भरोसा करना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।
पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ से जुड़ी प्रक्रिया में थोड़ी सी लापरवाही आर्थिक, मानसिक और कानूनी परेशानी में बदल सकती है। इसलिए सही जानकारी, आधिकारिक माध्यम और सतर्कता ही सुरक्षित पासपोर्ट सेवा की कुंजी है।
