भारतीय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के सेक्टर में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूनावाला ग्रुप की प्रमुख NBFC, पूनावाला फिनकॉर्प, अब अपने अगले ग्रोथ फेज की तैयारी में जुट गई है। कंपनी ने 5500 करोड़ रुपये तक की इक्विटी कैपिटल जुटाने की योजना बनाई है, जिसे आने वाले महीनों में अमल में लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव के तहत कंपनी ने तीन बड़े इनवेस्टमेंट बैंकों को एडवाइजर के तौर पर शॉर्टलिस्ट किया है, ताकि इस बड़े फंडरेजिंग प्रोसेस को सही दिशा और मजबूती मिल सके।

इस ट्रांजेक्शन को कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। फंड जुटाने का मकसद केवल पूंजी बढ़ाना नहीं है, बल्कि तेजी से बदलते फाइनेंशियल मार्केट में प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना और नए अवसरों का लाभ उठाना भी है।
5500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना और संभावित रास्ते
पूनावाला फिनकॉर्प यह इक्विटी कैपिटल कई तरीकों से जुटा सकती है। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट यानी QIP को एक प्रमुख विकल्प माना जा रहा है। इसके अलावा, अन्य इक्विटी रूट्स पर भी विचार किया जा सकता है, जो बाजार की स्थिति और निवेशकों की रुचि पर निर्भर करेगा।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इक्विटी के जरिए 5500 करोड़ रुपये तक जुटाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लिया जाना अभी बाकी है। कंपनी के पास इस फंडरेजिंग को पूरा करने के लिए 12 महीने का समय है, जिससे यह साफ है कि मैनेजमेंट किसी जल्दबाजी के बजाय रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ना चाहता है।
तीन बड़े इनवेस्टमेंट बैंक बने सलाहकार
सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े फंड जुटाने के लिए पूनावाला फिनकॉर्प ने तीन प्रमुख ग्लोबल और घरेलू इनवेस्टमेंट बैंकों से संपर्क किया है। इनमें जेफरीज, कोटक महिंद्रा कैपिटल और जेपी मॉर्गन जैसे नाम शामिल हैं। इन बैंकों का अनुभव और मार्केट में पकड़ इस ट्रांजेक्शन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
एडवाइजर के चयन से यह संकेत मिलता है कि कंपनी इस फंडरेजिंग को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना चाहती है। मजबूत सलाहकारों के साथ काम करने से वैल्यूएशन, टाइमिंग और स्ट्रक्चर जैसे अहम पहलुओं पर बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं।
बोर्ड की मंजूरी और पिछला फंडरेजिंग अनुभव
पूनावाला फिनकॉर्प के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 16 जनवरी 2026 को इस प्रस्तावित कैपिटल रेजिंग को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत बनी हुई है और शेयर बाजार में इसके प्रदर्शन को लेकर निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।
इससे पहले जुलाई 2025 में कंपनी ने प्रमोटर एंटिटी राइजिंग सन होल्डिंग्स के जरिए 1500 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दी थी। यह फंड प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट रूट से आया था और इससे कंपनी की बैलेंस शीट को और मजबूती मिली थी। उस समय भी यह साफ हो गया था कि प्रमोटर्स कंपनी के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं और ग्रोथ के लिए पूंजी लगाने को तैयार हैं।
अदार पूनावाला की भूमिका और नेतृत्व
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला, पूनावाला फिनकॉर्प के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति, ब्रांड पहचान और ऑपरेशनल स्ट्रक्चर को नए सिरे से आकार दिया है।
अदार पूनावाला की छवि एक लॉन्ग-टर्म विजन वाले उद्योगपति की है, जो स्थिर और सतत विकास में विश्वास रखते हैं। यही सोच पूनावाला फिनकॉर्प की रणनीतियों में भी दिखाई देती है, जहां जोखिम प्रबंधन और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
फाइनेंशियल सर्विसेज का व्यापक पोर्टफोलियो
पूनावाला फिनकॉर्प की सबसे बड़ी ताकत इसका विविध फाइनेंशियल सर्विसेज पोर्टफोलियो है। कंपनी अलग-अलग सेगमेंट में लोन और फाइनेंस सॉल्यूशंस प्रदान करती है, जिससे उसका जोखिम फैल जाता है और किसी एक सेक्टर पर निर्भरता कम हो जाती है।
कंपनी प्रॉपर्टी के बदले लोन, गोल्ड लोन, प्राइम पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन जैसे प्रोडक्ट्स में सक्रिय है। इसके अलावा, बिजनेस लोन, इंस्टेंट कंज्यूमर लोन, कमर्शियल व्हीकल लोन, सप्लाई चेन फाइनेंस और NBFC लोन भी इसके पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। पुरानी कारों के लिए फाइनेंस, प्रोफेशनल्स के लिए लोन, मशीनरी लोन और दुकानदार लोन जैसे प्रोडक्ट्स कंपनी को छोटे और मझोले ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करते हैं।
शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन
पूनावाला फिनकॉर्प के शेयरों ने पिछले एक साल में निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। कंपनी के शेयर की कीमत में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़त सिर्फ बाजार की तेजी का नतीजा नहीं है, बल्कि कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और ग्रोथ आउटलुक का भी संकेत देती है।
कंपनी का मार्केट कैप अब 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है, जो इसे NBFC सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी लगभग 64 प्रतिशत के आसपास है, जिससे यह साफ होता है कि प्रमोटर ग्रुप का कंपनी पर भरोसा कायम है।
तिमाही नतीजे और वित्तीय स्थिति
अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में पूनावाला फिनकॉर्प का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर 150.22 करोड़ रुपये हो गया, जबकि रेवेन्यू 1,818.42 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी न केवल ग्रोथ कर रही है, बल्कि मुनाफे के मोर्चे पर भी संतुलन बनाए हुए है।
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 55,017 करोड़ रुपये तक पहुंच चुके थे। यह AUM कंपनी के स्केल और मार्केट में उसकी पकड़ को दर्शाता है। इसके साथ ही, कंपनी में 5,264 कर्मचारी कार्यरत हैं, जो इसके ऑपरेशनल नेटवर्क की व्यापकता को दिखाता है।
इक्विटी कैपिटल से क्या बदलेगा
5500 करोड़ रुपये की इक्विटी कैपिटल जुटाने से पूनावाला फिनकॉर्प की बैलेंस शीट और मजबूत होगी। इससे कंपनी को नए लोन प्रोडक्ट्स लॉन्च करने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और नए सेगमेंट्स में विस्तार करने का मौका मिलेगा।
इसके अलावा, मजबूत कैपिटल बेस से कंपनी को रेगुलेटरी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी आसानी होगी। NBFC सेक्टर में कैपिटल एडिक्वेसी एक अहम फैक्टर होता है, और यह फंडरेजिंग उस दिशा में भी सहायक साबित हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह कदम
निवेशकों के नजरिए से यह फंडरेजिंग एक मिश्रित संकेत हो सकती है। एक तरफ, इक्विटी डाइल्यूशन की संभावना रहती है, वहीं दूसरी तरफ, मजबूत ग्रोथ कैपिटल से भविष्य में कंपनी की कमाई की क्षमता बढ़ सकती है। बाजार आमतौर पर ऐसे कदमों को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के संदर्भ में देखता है।
अगर फंड का इस्तेमाल सही रणनीति के तहत किया जाता है, तो यह पूनावाला फिनकॉर्प को NBFC सेक्टर में और ऊंचा स्थान दिला सकता है।
निष्कर्ष: अगले फेज की तैयारी
पूनावाला फिनकॉर्प का 5500 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव यह दिखाता है कि कंपनी भविष्य को लेकर आश्वस्त है और आक्रामक लेकिन संतुलित ग्रोथ की राह पर चलना चाहती है। मजबूत प्रमोटर सपोर्ट, विविध पोर्टफोलियो और शेयर बाजार में भरोसे के साथ यह कदम कंपनी को अगले स्तर पर ले जा सकता है।
आने वाले महीनों में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी, बाजार की स्थिति और फंडरेजिंग का स्ट्रक्चर यह तय करेगा कि यह योजना किस तरह आगे बढ़ती है। लेकिन इतना साफ है कि पूनावाला फिनकॉर्प NBFC सेक्टर में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने के मूड में है।
