संगीत की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। रिएलिटी सिंगिंग शो ‘इंडियन आइडल 3’ के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग का अचानक निधन हो गया। उनकी उम्र महज 43 वर्ष थी। जिस तरह से यह घटना घटी, उसने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि उनके चाहने वालों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार का कहना है कि प्रशांत रात में बिल्कुल ठीक थे, उन्होंने अच्छे से खाना खाया, आराम से सोए, लेकिन अगली सुबह वह कभी उठ नहीं पाए।

यह खबर जैसे ही सामने आई, पूरे देश में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। कोई यकीन नहीं कर पा रहा कि हमेशा मुस्कुराते, सादगी से भरे और जमीन से जुड़े रहने वाले प्रशांत अब इस दुनिया में नहीं रहे।
परिवार का बयान और टूटती उम्मीदें
परिवार के अनुसार, प्रशांत तमांग की तबीयत में रात को किसी भी तरह की परेशानी नजर नहीं आई थी। वह रोज़ की तरह घर पर थे, सामान्य दिनचर्या में रहे और बिना किसी शिकायत के सो गए। सुबह जब काफी देर तक वह नहीं उठे, तो परिवार को चिंता हुई। जब उन्हें जगाने की कोशिश की गई और कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो घबराहट बढ़ गई।
तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि इस पूरी घटना में उन्हें किसी भी तरह की गड़बड़ी या साजिश का संदेह नहीं है। यह एक अचानक और प्राकृतिक घटना थी, जिसने सब कुछ पल भर में बदल दिया।
स्ट्रोक या दिल का दौरा, सवाल कई हैं
शुरुआती जानकारी के अनुसार, प्रशांत तमांग को स्ट्रोक आया था। वहीं, उनके एक करीबी दोस्त और सिंगर महेश सेवा ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे उनके दिल्ली स्थित जनकपुरी वाले घर पर दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया। इस विरोधाभास ने कई सवाल खड़े किए, लेकिन परिवार की ओर से साफ कहा गया है कि प्रशांत पूरी तरह स्वस्थ थे और कुछ दिन पहले तक भी सामान्य बातचीत कर रहे थे।
महेश सेवा के अनुसार, उन्होंने हाल ही में प्रशांत से बात की थी और उस समय वह बिल्कुल ठीक थे। उनकी आवाज़ में वही ऊर्जा और सादगी थी, जिसके लिए वह जाने जाते थे। अचानक इस तरह की खबर आना किसी के लिए भी यकीन करना मुश्किल है।
पुलिस की जांच और आधिकारिक जानकारी
पुलिस के मुताबिक, प्रशांत तमांग को उनकी पत्नी माता चानन देवी अस्पताल लेकर पहुंची थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने परिवार और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए। सभी ने एक ही बात कही कि उन्हें किसी भी प्रकार की अनियमितता या संदिग्ध स्थिति का शक नहीं है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिवार ने यही बताया कि प्रशांत रात को अच्छी तरह सोए थे, लेकिन सुबह नहीं उठे। फिलहाल, मामले में किसी तरह की आपराधिक जांच की जरूरत नहीं समझी गई है।
दार्जिलिंग से दिल्ली तक का प्रेरणादायक सफर
प्रशांत तमांग का जन्म 4 जनवरी 1983 को दार्जिलिंग में हुआ था। वह एक नेपाली भाषी गोरखा परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनका बचपन साधारण परिस्थितियों में बीता, लेकिन जीवन ने उन्हें बहुत जल्दी जिम्मेदारियां सौंप दीं।
उनके पिता पश्चिम बंगाल पुलिस में कार्यरत थे। सेवा के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए प्रशांत को स्कूल तक छोड़ना पड़ा। इतनी कम उम्र में उन्होंने अपने पिता का पद संभाल लिया और परिवार की जिम्मेदारी उठाई।
संगीत का जुनून और दोस्तों का साथ
हालांकि, जिम्मेदारियों के बीच भी प्रशांत के दिल में संगीत के लिए गहरा जुनून था। वह अक्सर खाली समय में गाना गुनगुनाते और स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। उनके दोस्तों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
दोस्तों की प्रेरणा ही थी कि उन्होंने साल 2007 में ‘इंडियन आइडल’ के ऑडिशन में हिस्सा लेने का फैसला किया। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मंच पर उनकी सादगी, भावनात्मक आवाज़ और विनम्र स्वभाव ने देशभर के दर्शकों का दिल जीत लिया।
इंडियन आइडल 3 की जीत और नई पहचान
‘इंडियन आइडल 3’ जीतने के बाद प्रशांत तमांग रातोंरात एक जाना-पहचाना नाम बन गए। उनकी जीत सिर्फ एक गायन प्रतियोगिता की जीत नहीं थी, बल्कि एक साधारण इंसान के असाधारण सपने के पूरे होने की कहानी थी।
उनकी सफलता ने हजारों युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सपनों को हासिल किया जा सकता है। उनकी आवाज़ में संघर्ष, ईमानदारी और भावनाएं साफ झलकती थीं।
पहला एल्बम और संगीत यात्रा
साल 2010 में प्रशांत तमांग ने अपना पहला म्यूजिक एल्बम ‘धन्यवाद’ रिलीज किया। यह एल्बम उनके प्रशंसकों के लिए एक तोहफे की तरह था। इसमें उनकी भावुक गायकी और सादगी भरी प्रस्तुति को खूब सराहा गया।
हालांकि, वह लगातार बड़े म्यूजिक प्रोजेक्ट्स में नहीं दिखे, लेकिन उनकी पहचान हमेशा एक ऐसे कलाकार की रही, जिसने दिल से गाया और दिल तक पहुंचा।
अभिनय की दुनिया में कदम
संगीत के बाद प्रशांत तमांग ने अभिनय की दुनिया में भी अपनी किस्मत आजमाई। हाल ही में वह चर्चित वेब सीरीज ‘पाताल लोक’ के दूसरे सीजन में नजर आए, जहां उन्होंने डेनियल लेचो नाम के एक हत्यारे का किरदार निभाया।
उनका यह किरदार उनके फैंस के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि यह उनकी असली छवि से बिल्कुल अलग था। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक सिंगर ही नहीं, बल्कि एक संजीदा अभिनेता भी हैं।
आने वाली फिल्म और अधूरा सपना
प्रशांत तमांग को सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ में भी देखा जाना था, जो 17 अप्रैल को थिएटर्स में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को लेकर उनके फैंस बेहद उत्साहित थे, लेकिन अब यह खुशी गहरे दुख में बदल गई है।
उनका यूं अचानक चले जाना उनके करियर के कई अधूरे सपनों को भी अपने साथ ले गया।
परिवार, पत्नी और चार साल की बेटी
प्रशांत तमांग अपने पीछे पत्नी गीता थापा और चार साल की बेटी आरिया तमांग को छोड़ गए हैं। उनकी बेटी अभी इतनी छोटी है कि शायद उसे अपने पिता की यादें पूरी तरह समझ में भी न आएं।
प्रशांत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे। वह अक्सर पत्नी और बेटी के साथ बिताए पलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते थे। उनकी पोस्ट्स में एक खुशहाल, सादा और परिवार से जुड़ा इंसान नजर आता था।
सोशल मीडिया पर शोक की लहर
जैसे ही उनके निधन की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई। फैंस, कलाकार और आम लोग सभी उनकी सादगी, संघर्ष और इंसानियत को याद करते नजर आए।
कई लोगों ने लिखा कि प्रशांत तमांग सिर्फ एक सिंगर नहीं थे, बल्कि उम्मीद की एक आवाज़ थे, जो बताती थी कि मेहनत और ईमानदारी से कोई भी मुकाम पाया जा सकता है।
अचानक मौत और बढ़ती चिंता
प्रशांत तमांग की अचानक मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कम उम्र में दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं। रात को बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति सुबह उठ ही न पाए, यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
उनका जाना सिर्फ एक कलाकार का जाना नहीं है, बल्कि एक प्रेरक जीवन कहानी का अचानक रुक जाना है।
एक आवाज़ जो हमेशा गूंजती रहेगी
भले ही प्रशांत तमांग अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी सादगी और उनका संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। harigeet pravaah के अनुसार, प्रशांत तमांग उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिनकी पहचान शोहरत से ज्यादा उनके इंसान होने से बनी।
उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सपनों को मरने नहीं देना चाहिए।
