भारत के शेयर बाजार में इस समय IPO की लहर कुछ ऐसी चल रही है कि हर तरफ चर्चा सिर्फ नए इश्यू, रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन और शानदार लिस्टिंग की हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस उछाल ने निवेशकों को ऐसा भरोसा दिला दिया है कि मानो हर नया IPO सुनहरा अवसर बनकर उनके सामने आ रहा है। इसी माहौल में, प्री-IPO मार्केट ने भी अलग तेजी पकड़ ली है। निवेशकों में यह धारणा बन चुकी है कि अगर प्री-IPO में हिस्सा ले लिया जाए, तो असल IPO आने से पहले ही उन्हें भारी मुनाफा मिल सकता है।

लेकिन इस चमकदार दिखने वाले क्षेत्र की सच्चाई उतनी साफ नहीं है जितनी दिखती है। इसी भ्रम को तोड़ते हुए, देश के प्रसिद्ध उद्यमी और निवेश विशेषज्ञ नितिन कामथ ने हाल ही में बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि आजकल प्री-IPO निवेश में बिना जांच के पैसा लगाना मूर्खता से कम नहीं है।
लोग प्री-IPO में ऐसे कूद रहे जैसे वहां सोने की खान छिपी हो
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि आजकल बेहद खतरनाक चलन देखने को मिल रहा है। प्री-IPO शेयरों को सोने की खान मानकर लोग उनमें पैसे झोंक रहे हैं। कई निवेशक यह सोचकर इन शेयरों को खरीद रहे हैं कि IPO आने से पहले ही उनकी कीमत कई गुना बढ़ जाएगी। लेकिन असलियत में यह उम्मीद कई बार उलट साबित होती है।
कामथ ने बताया कि अनलिस्टेड मार्केट में कई प्री-IPO शेयर 100 प्रतिशत से लेकर 500 प्रतिशत तक प्रीमियम पर बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा अलग से भारी-भरकम कमीशन और गलत प्राइसिंग का जोखिम भी मौजूद रहता है। यह सब निवेशक के मुनाफे को शुरू होने से पहले ही समाप्त कर सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में ऐसा हुआ कि लोग भारी प्रीमियम पर अनलिस्टेड शेयर खरीदते रहे और जब IPO आया, तो शेयर की लिस्टिंग प्राइस उसी कीमत से भी नीचे चली गई जिस पर निवेशक ने प्री-IPO खरीदा था। परिणाम यह हुआ कि निवेश की शुरुआत ही घाटे से हो गई।
वॉट्सएप पर प्रमोशन और तेजी से बढ़ती धोखाधड़ी
कामथ ने यह भी खुलासा किया कि अनलिस्टेड शेयरों की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि कई प्लेटफॉर्म और ब्रोकर वॉट्सएप पर लगातार मैसेज भेजकर निवेशकों को लुभा रहे हैं।
ऐसी रणनीति न सिर्फ गैर-पेशेवर है, बल्कि धोखे का खतरा भी बढ़ाती है। कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि सिर्फ वॉट्सएप संदेश मिलने पर पैसा लगाना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
प्री-IPO मार्केट में कोई रेगुलेशन नहीं है, न ही पारदर्शिता। ऐसे में कोई भी निवेशक गलत जानकारी के आधार पर गलत कीमत चुका सकता है। नितिन कामथ के अनुसार यह निवेश का सबसे खतरनाक तरीका बनता जा रहा है।
प्री-IPO निवेश में क्या है सबसे बड़ा खतरा
नितिन कामथ ने यह साफ किया कि प्री-IPO निवेश आकर्षक दिख सकता है, लेकिन इसके भीतर कई परतें हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
सबसे बड़ा खतरा यह है कि कीमत पहले से ही काफी ज्यादा बढ़ी रहती है। ऐसे में वास्तविक IPO आने पर बाजार उस ऊंची कीमत को स्वीकार न करे।
इसके अलावा कोई यह गारंटी नहीं दे सकता कि IPO लिस्टिंग हमेशा ऊंची ही होगी।
उन्होंने कहा कि निवेश करने से पहले सिर्फ उत्साह और जल्दी मुनाफे की चाहत पर भरोसा करना सबसे बड़ी गलती है। बाजार की गर्मी लोगों की सोच पर हावी हो रही है और यह ट्रेंड भारी नुकसान की वजह बन सकता है।
फाइव ईयर डेटाः सच्चाई कहां छिपी है
2020 से 2025 तक भारत के IPO बाजार में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली। इन पांच वर्षों में कंपनियों ने 5.39 लाख करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई, जो 2000 से 2020 के बीच जुटाई गई कुल राशि से भी ज्यादा है।
यानी सिर्फ पांच साल में जुटाई गई रकम 20 साल की कुल पूंजी से भी आगे निकल गई।
यह आंकड़ा बताता है कि कंपनियों के लिस्टिंग प्लान बड़े पैमाने पर बदले और अधिक स्थापित कंपनियों ने बाजार में आने का फैसला किया।
क्यों बढ़ा है IPO का साइज
पिछले पांच वर्षों में औसत IPO साइज पहले की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है। इसका मतलब यह है कि अब स्टार्टअप या शुरुआती चरण की कंपनियों की बजाय बड़ी और स्थापित कंपनियां IPO लेकर आ रही हैं।
इस बदलाव ने निवेशकों के बीच और अधिक भरोसा पैदा किया और प्री-IPO तथा IPO बाजार दोनों में तेजी देखी गई।
PE फंड्स और प्रमोटर्स तेजी से हिस्सेदारी बेच रहे हैं
मजबूत मार्केट ने प्राइवेट इक्विटी फर्मों को भी बाहर निकलने का मौका दिया।
जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच सेकेंडरी सेल दोगुनी हो गई जबकि ब्लॉक डील्स में कमी आई।
यह इस बात का संकेत है कि बड़े निवेशक अब मुनाफा बुक कर रहे हैं और प्री-IPO की चमक से खुद को मुक्त कर रहे हैं, जबकि खुदरा निवेशक इस चमक में उलझते जा रहे हैं।
नितिन कामथ की चेतावनी किस ओर इशारा करती है
उनकी चेतावनी उन निवेशकों के लिए है जो आंख बंद करके ट्रेंड का पीछा करते हैं।
प्री-IPO निवेश में जोखिम कम नहीं, बल्कि असल जोखिम वही है जिसे लोग देख नहीं पाते।
बाजार की गर्मी हर दिन सभी के लिए फायदेमंद नहीं होती।
कामथ की सलाह साफ है कि निवेश करते समय ज्ञान, धैर्य और विवेक जरूरी है।
हर चमक सोना नहीं होती और खासकर प्री-IPO की चमक तो कई बार पूरी तरह कृत्रिम भी साबित होती है।
