बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव आया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को अब 10 सर्कुलर रोड स्थित उनका सरकारी बंगला छोड़कर हार्डिंग रोड स्थित नए आवास में शिफ्ट होना होगा। यह निर्णय वर्षों पुरानी कानूनी याचिका और कोर्ट के फैसले के बाद आया है, जिसने बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

नीतीश सरकार की पूर्व मुख्यमंत्री सुविधाएं
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में 2005 से शुरू हुई एक नीति के तहत राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला, सुरक्षा, और स्टाफ जैसी सुविधाएं दी जाती थीं। इसके तहत राबड़ी देवी और लालू यादव जैसे पूर्व मुख्यमंत्री 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रहे थे। 2010 में नियमों में बदलाव कर इसे और अधिक स्पष्ट किया गया। इस व्यवस्था ने वर्षों तक पूर्व मुख्यमंत्रियों को आलीशान आवास और सुविधाओं का लाभ दिया।
तेजस्वी यादव की याचिका ने बदला खेल
हालांकि 2017 में तेजस्वी यादव द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। तेजस्वी ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अपने पुराने सरकारी बंगले को न छोड़ने के मुद्दे को कोर्ट में उठाया। उनके केस में अदालत ने 2019 में फैसला सुनाते हुए न केवल उनकी याचिका खारिज की, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली आजीवन बंगला और अन्य सुविधाओं को समाप्त करने का आदेश भी दिया। इस फैसले का असर अब राबड़ी देवी पर पड़ा।
राबड़ी देवी का नया आवास
हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब राबड़ी देवी को हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास संख्या 39 में शिफ्ट होना होगा। इस नई व्यवस्था के तहत उन्हें केवल विधायक या नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मिलने वाली सुविधाएं ही दी जाएंगी। 10 सर्कुलर रोड का बंगला अब उनके लिए उपलब्ध नहीं रहेगा।
सियासत में हलचल और प्रतिक्रियाएँ
इस फैसले के बाद बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड बंगला छोड़ना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे लालू-राबड़ी परिवार के लिए महत्वपूर्ण घटना है। इसके साथ ही कई विधायकों और मंत्रियों को भी नए VIP आवास आवंटित किए गए हैं। इस बदलाव से बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बयानबाजी तेज हो गई है।
कोर्ट के फैसले का महत्व
पटना हाई कोर्ट का यह फैसला राज्य में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली विशेष सुविधाओं और नियमों पर एक बड़ा उदाहरण बन गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को आजीवन बंगला और अन्य सुविधाएं देने का नियम बिना समीक्षा के जारी नहीं रह सकता। इसके साथ ही यह फैसला कानून की सर्वोच्चता और न्यायपालिका की भूमिका को भी उजागर करता है।
निष्कर्ष
राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड से हटना और हार्डिंग रोड में नए आवास में शिफ्ट होना केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका, सरकारी नियमों और राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन का उदाहरण भी है। बिहार की सियासत में यह घटना लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
