गाजा पट्टी एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठी है। यहां चल रहा युद्ध अब मानवीय त्रासदी का नया रूप ले चुका है। राफा बॉर्डर के नीचे बनी सुरंगों में करीब 200 हमास आतंकवादी फंसे हुए हैं, और बाहर इजरायली सेना ने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। यह वह क्षण है जब न तो बाहर निकलने की कोई उम्मीद बची है और न ही जीवित लौटने की संभावना।

यह खबर गाजा से निकलकर पूरी दुनिया में हलचल मचा रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन आतंकियों को किसी भी प्रकार की राहत या सुरक्षित निकास मार्ग देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद इजरायली सेना ने सुरंगों के मुहानों पर पत्थर और सीमेंट भरना शुरू कर दिया है ताकि कोई भी आतंकी बाहर न निकल सके।
इजरायली सेना का स्पष्ट संदेश: आतंक के लिए अब कोई जगह नहीं
इजरायल की सेना इस बार किसी भी समझौते के मूड में नहीं है। सेना प्रमुख अयाल जमीर ने मीडिया से कहा कि “हमास के आतंकियों के लिए कोई दया नहीं है। उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।” इजरायल का यह सख्त रुख इस बात की पुष्टि करता है कि वह अब इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने के इरादे से आगे बढ़ रहा है।
पिछले कुछ महीनों में इजरायली सेना ने गाजा के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। राफा बॉर्डर, जो मिस्र की सीमा से सटा हुआ है, अब युद्ध का केंद्र बन गया है। यहीं पर इन 200 आतंकियों ने सुरंगों में छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन अब यही सुरंग उनका कब्रिस्तान बनती दिख रही है।
सुरंगों का जाल और आतंक की रणनीति
गाजा में हमास ने वर्षों से सुरंगों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया है। इनका उपयोग हथियारों की तस्करी, हमलों की योजना और छिपने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन इस बार इजरायल ने इन सुरंगों को नष्ट करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है।
सूत्रों के अनुसार, इजरायल ने ड्रोन, थर्मल सेंसर और बम डिटेक्टरों की मदद से राफा के नीचे फैली सुरंगों का पूरा नक्शा तैयार किया। जैसे ही सेना को यह पता चला कि यहां बड़ी संख्या में हमास के लड़ाके मौजूद हैं, तत्काल घेराबंदी कर दी गई।
सेना ने सुरंगों के निकास बिंदुओं को बंद करने के बाद उनमें पत्थर और कंक्रीट डालना शुरू कर दिया। अब वे सुरंगें जिनका कभी इस्तेमाल हथियारों और विस्फोटकों को छिपाने के लिए होता था, उन्हीं आतंकियों के लिए मौत का गड्ढा बन चुकी हैं।
नेतन्याहू का बयान: “हम आतंक के खिलाफ किसी भी कीमत पर नहीं झुकेंगे”
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि इजरायल अब पीछे नहीं हटेगा। “हमास ने निर्दोषों के खून से अपने हाथ रंगे हैं। वे अब दया के पात्र नहीं हैं। अगर वे सुरंगों में फंसे हैं, तो वहीं उनका अंत होगा।”
इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब किसी तरह का युद्धविराम या समझौता नहीं होने वाला।
हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अगर ये लड़ाके आत्मसमर्पण कर दें तो उन्हें जिंदा छोड़ दिया जा सकता है। लेकिन नेतन्याहू के कार्यालय ने तुरंत इसे खारिज करते हुए कहा कि “किसी भी आतंकवादी को माफी नहीं मिलेगी।”
गाजा की मानवीय त्रासदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
गाजा के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। यहां बिजली, पानी और भोजन की भारी कमी हो चुकी है। अस्पतालों में घायल नागरिकों की भरमार है और शवगृहों में जगह नहीं बची है।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 69,000 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और मानवाधिकार संगठनों ने इजरायल से युद्धविराम की अपील की है, लेकिन नेतन्याहू का कहना है कि “जब तक हमास का अंतिम आतंकी जीवित है, शांति संभव नहीं है।”
इजरायल ने लौटाए 15 फलस्तीनियों के शव
शनिवार को इजरायल ने गाजा को 15 फलस्तीनियों के शव लौटाए। एक दिन पहले ही हमास ने एक इजरायली बंधक के अवशेष सौंपे थे। इस अदला-बदली को कुछ लोग “मानवता की अंतिम कोशिश” कह रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल विपरीत हैं।
गाजा के अस्पतालों में चारों ओर चीख-पुकार है। खान यूनिस और नासिर अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि लगातार हो रही बमबारी से घायल और मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है।
भविष्य का डर: क्या यह युद्ध कभी रुकेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा। यह मध्य-पूर्व की स्थिरता को गहरा झटका दे सकता है। राफा बॉर्डर की स्थिति से मिस्र और जॉर्डन जैसे पड़ोसी देश भी चिंतित हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा, तो गाजा में “मानव जीवन का सबसे बड़ा नुकसान” दर्ज हो सकता है। इजरायल का उद्देश्य स्पष्ट है—हमास का सफाया। वहीं, हमास भी खुद को “आखिरी सांस तक लड़ने वाला संगठन” बताकर अपने समर्थकों में उग्रता बनाए रख रहा है।
अंतिम सत्य: सुरंगें अब मौत की खामोश गवाही बन चुकी हैं
राफा की वे सुरंगें जो कभी हमास के लिए सुरक्षा का प्रतीक थीं, अब उनकी कब्रगाह बन चुकी हैं। वहां फंसे 200 आतंकियों का अंजाम तय है। बाहर इजरायली सेना की तैयारी पूर्ण है, और अंदर सांसें थमने को हैं। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं, बल्कि उस नफरत की परिणति है जिसने इंसानियत को मिट्टी में मिला दिया है।
