मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की ग्राम पंचायत धोलश्री में हाल ही में एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि सरपंच विनीता बाई द्वारा विभिन्न दस्तावेजों और योजनाओं में दो तरह के हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी या अनियमित कामों में सरपंच अलग तरह के हस्ताक्षर कर रही हैं, जबकि सही और पारदर्शी कामों में उनका हस्ताक्षर अलग तरीके से किया जा रहा है। इस विवाद ने पंचायत के प्रशासनिक कार्यों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है और ग्रामीणों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

ग्रामीणों की शिकायत और ज्ञापन
ग्रामीण प्रीतमसिंह रघुवंशी ने इस मामले को लेकर पंचायत कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने बताया कि कई सरकारी योजनाओं और वित्तीय लेन-देन में सरपंच के हस्ताक्षरों में असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि इस फर्जीवाड़े की जांच नहीं की गई, तो ग्राम पंचायत की कई योजनाओं और परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच के इस कदम से पंचायत का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और गांव की जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है।
आरोपों का विस्तार और जांच की आवश्यकता
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सरपंच ने कई विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर गलत हस्ताक्षर किए हैं। उदाहरण के तौर पर, भूमि वितरण, सड़क निर्माण, जल आपूर्ति योजनाओं के लिए जो दस्तावेज बन रहे हैं, उनमें असंगति देखने को मिल रही है। वहीं, सही और पारदर्शी परियोजनाओं के लिए अलग प्रकार के हस्ताक्षर किए जाने का आरोप लगाया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दोहरे हस्ताक्षर और दस्तावेजों में अंतर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। यदि मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया, तो यह पंचायत प्रशासन और ग्रामीण विकास कार्यों पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
प्रशासन और सरकारी निगरानी
स्थानीय प्रशासन और जिला अधिकारी अब इस मामले की जांच कर रहे हैं। पंचायत स्तर पर दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की समीक्षा की जा रही है। अधिकारी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी तरह का वित्तीय या प्रशासनिक नुकसान न हो। ग्रामीणों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष और त्वरित जांच आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
ग्रामीणों में बढ़ती नाराजगी
गांव के लोग इस मामले को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि यदि सरपंच की जिम्मेदारी में पारदर्शिता नहीं होगी, तो पंचायत की विकास योजनाएँ प्रभावित होंगी। ग्रामीण संगठन और युवा वर्ग इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने पंचायत कार्यालय और स्थानीय प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष
रायसेन जिले की ग्राम पंचायत धोलश्री में सरपंच पर लगे फर्जी हस्ताक्षर के आरोप ने प्रशासनिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है। यह मामला न केवल पंचायत प्रशासन की पारदर्शिता की परीक्षा है, बल्कि ग्रामीण जनता के अधिकार और उनके विकास के लिए बनाई गई योजनाओं की सुरक्षा का भी मुद्दा है। आगामी समय में प्रशासन की निष्पक्ष जांच ही तय करेगी कि इस विवाद का समाधान कैसे होता है और भविष्य में पंचायत प्रशासन की विश्वसनीयता कैसे बनी रहती है।
