ऑस्ट्रेलिया की धरती पर एशेज सीरीज हमेशा से इंग्लैंड क्रिकेट के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है। हर दौरे के साथ उम्मीदें जुड़ती हैं, रणनीतियां बनती हैं और दावे किए जाते हैं, लेकिन जब नतीजे उम्मीदों के अनुरूप नहीं आते, तो आलोचना का दौर भी उतना ही तेज होता है। मौजूदा एशेज सीरीज में इंग्लैंड की टीम एक बार फिर संघर्ष करती नजर आई है। पांच मैचों की इस प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड की टीम तीन मैच हारकर पहले ही सीरीज में पिछड़ चुकी है, जिससे न केवल खिलाड़ियों पर सवाल उठे हैं बल्कि टीम मैनेजमेंट और कोचिंग सिस्टम भी आलोचनाओं के घेरे में आ गया है।

ब्रेंडन मैकुलम की रणनीति पर उठे सवाल
इंग्लैंड के मौजूदा हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम को उनके आक्रामक और बेखौफ क्रिकेट दर्शन के लिए जाना जाता है। ‘बैजबॉल’ के नाम से चर्चित यह सोच शुरुआत में इंग्लैंड क्रिकेट के लिए किसी क्रांति से कम नहीं लगी थी। बेन स्टोक्स की कप्तानी में टीम ने टेस्ट क्रिकेट में एक नया अंदाज अपनाया, जिसमें नतीजे भी शुरुआती दौर में शानदार रहे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर यह रणनीति पूरी तरह विफल होती नजर आई। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने इंग्लैंड की आक्रामक बल्लेबाजी को बार-बार ध्वस्त किया और इंग्लैंड की कमजोरियों को उजागर कर दिया।
हार के बाद बयानबाजी तेज
सीरीज में पिछड़ने के बाद इंग्लैंड क्रिकेट के भीतर और बाहर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व खिलाड़ी, क्रिकेट विश्लेषक और फैंस सभी यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या मौजूदा कोचिंग सेटअप वाकई ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को चुनौती देने में सक्षम है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व स्पिन गेंदबाज मोंटी पनेसर का बयान सामने आया, जिसने इस बहस को और भी गर्म कर दिया।
मोंटी पनेसर का बड़ा बयान
मोंटी पनेसर ने खुलकर कहा कि अगर इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल करनी है, तो उसे ऐसे कोच की जरूरत है जो वहां की परिस्थितियों को गहराई से समझता हो। उन्होंने भारतीय टीम के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का नाम लेते हुए कहा कि शास्त्री इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं। पनेसर का मानना है कि शास्त्री न केवल ऑस्ट्रेलियाई हालात को समझते हैं, बल्कि उन्होंने वहां जाकर जीत हासिल करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।
रवि शास्त्री का ऑस्ट्रेलिया में रिकॉर्ड
रवि शास्त्री के कोचिंग कार्यकाल को भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम दौरों में गिना जाता है। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में दो बार टेस्ट सीरीज में हराकर इतिहास रचा। पहली बार 2018–19 में और दूसरी बार 2020–21 में, जब भारतीय टीम ने कई प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। इन जीतों ने यह साबित कर दिया कि शास्त्री की रणनीतिक समझ और मानसिक मजबूती पर काम करने की क्षमता बेहद प्रभावशाली है।
इंग्लैंड के लिए क्यों उपयुक्त हो सकते हैं शास्त्री
मोंटी पनेसर का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए केवल तकनीकी तैयारी ही काफी नहीं होती, बल्कि मानसिक और रणनीतिक स्तर पर भी टीम को मजबूत करना पड़ता है। उनके अनुसार रवि शास्त्री जानते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की मानसिकता क्या होती है, दबाव की परिस्थितियों में कैसे खेलती है और किन क्षणों में उसे चुनौती दी जा सकती है। यही वजह है कि पनेसर ने शास्त्री को इंग्लैंड का अगला हेड कोच बनाने की वकालत की।
मैकुलम की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच ब्रेंडन मैकुलम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोच बने रहना या न रहना उनके हाथ में नहीं है। उनका कहना है कि वह अपना काम पूरी ईमानदारी से करते रहेंगे और जो भी सबक इस दौरे से मिले हैं, उनसे सीखकर आगे सुधार की कोशिश करेंगे। मैकुलम ने यह भी कहा कि कोचिंग का यह काम उनके लिए अब भी बेहद रोमांचक है और वह खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने की कोशिश करते रहेंगे।
मैकुलम का अब तक का सफर
2022 में इंग्लैंड क्रिकेट को जब बड़ा झटका लगा था और एशेज सीरीज में टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा था, तब मैकुलम को हेड कोच नियुक्त किया गया था। बेन स्टोक्स के साथ मिलकर उन्होंने टीम की सोच और खेलने के अंदाज में बड़ा बदलाव किया। शुरुआती दौर में इंग्लैंड ने लगातार जीत दर्ज की और टेस्ट क्रिकेट में नई ऊर्जा दिखाई। लेकिन समय के साथ यह आक्रामक रणनीति विरोधी टीमों के लिए अनुमानित होने लगी और इंग्लैंड को लगातार हार का सामना करना पड़ा।
आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
मैकुलम के कार्यकाल में शुरुआती 11 टेस्ट मैचों में 10 जीत दर्ज करने वाली इंग्लैंड की टीम इसके बाद लय खोती नजर आई। अगले 33 टेस्ट मैचों में टीम को 16 बार हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसी शीर्ष टीमों के खिलाफ पांच मैचों की किसी भी टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड जीत हासिल नहीं कर सका। ये आंकड़े इंग्लैंड क्रिकेट के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।
इंग्लैंड क्रिकेट के सामने बड़ा फैसला
अब इंग्लैंड क्रिकेट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे का रास्ता क्या हो। क्या मैकुलम को और समय दिया जाए या फिर किसी नए चेहरे के साथ नई शुरुआत की जाए। रवि शास्त्री का नाम सामने आने के बाद यह बहस और भी दिलचस्प हो गई है। शास्त्री का अनुभव, उनका आक्रामक लेकिन संतुलित दृष्टिकोण और खिलाड़ियों के साथ संवाद की क्षमता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग का बदलता स्वरूप
आज के दौर में कोच की भूमिका सिर्फ रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रह गई है। खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति, फिटनेस, दबाव में प्रदर्शन और टीम के भीतर सामंजस्य बनाए रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है। रवि शास्त्री इस मोर्चे पर पहले ही खुद को साबित कर चुके हैं। यही कारण है कि उनका नाम इंग्लैंड के संभावित हेड कोच के तौर पर चर्चा में है।
निष्कर्ष
एशेज सीरीज में हार के बाद इंग्लैंड क्रिकेट एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। मोंटी पनेसर का बयान केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि इंग्लैंड क्रिकेट के भविष्य को लेकर उठता हुआ बड़ा सवाल है। क्या रवि शास्त्री वाकई इंग्लैंड के नए हेड कोच बन सकते हैं या मैकुलम को एक और मौका मिलेगा, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि इस बहस ने क्रिकेट जगत में हलचल जरूर मचा दी है।
