भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 5,673 पुराने सर्कुलर रद्द कर दिए हैं। ये सर्कुलर 1944 से जारी थे और अब इनकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी थी। इसके साथ ही लगभग 9,000 सर्कुलर को समेकित कर 244 नई मास्टर गाइडलाइन बनाई गई हैं। इस बदलाव का उद्देश्य बैंकों को नियमों को एक जगह पर समझने में सुविधा देना और आम ग्राहकों के लिए भी बैंकिंग प्रक्रिया को सरल बनाना है।

डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मू ने बताया कि नए बदलाव से बैंकिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी। बैंकों को अब अलग-अलग समय पर जारी सर्कुलर खोजने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि सभी दिशानिर्देशों को समेकित रूप में मास्टर गाइडलाइन के रूप में देखा जा सकेगा। यह कदम बैंकिंग प्रक्रिया में सुधार और नियमों की समझ को आसान बनाने के लिए किया गया है।
पुराने सर्कुलर और उनकी अवधि
भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा रद्द किए गए सर्कुलर 1944 से चल रहे थे। इन सर्कुलरों में विभिन्न बैंकिंग नियम, प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश शामिल थे। समय के साथ कई नियम अप्रासंगिक हो गए और बैंकिंग व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के आगमन के बाद इनकी उपयोगिता कम हो गई। इसलिए RBI ने फैसला किया कि इन पुराने सर्कुलरों को रद्द कर उन्हें मास्टर गाइडलाइन में बदलना आवश्यक है।
244 नई मास्टर गाइडलाइन
244 मास्टर गाइडलाइन में विभिन्न बैंकिंग प्रक्रियाओं और नीतियों का समेकित विवरण शामिल है। इनमें डिजिटल बैंकिंग, सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े लोन, पर्सनल लोन नियम, और अन्य बैंकिंग संचालन के दिशा-निर्देश शामिल हैं। नई गाइडलाइन के तहत बैंकों को नियमों के पालन में आसानी होगी और ग्राहकों को भी उनके बैंकिंग व्यवहार के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
RBI ने डिजिटल बैंकिंग के लिए सात विशेष मास्टर गाइडलाइन भी बनाई हैं। इनका असर न केवल बैंकों पर पड़ेगा बल्कि ग्राहकों के लिए भी लाभकारी साबित होगा। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों के दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
आम लोगों पर प्रभाव
RBI के नए कदम का असर आम ग्राहकों पर भी होगा। सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े लोन और निवेश पर बदलाव हो सकता है। डिजिटल बैंकिंग और लेनदेन के नियम अब अधिक स्पष्ट हो जाएंगे। पर्सनल लोन, EMI, और अन्य वित्तीय उत्पादों के उपयोग में बदलाव संभव है। ग्राहकों को अपने बैंकिंग व्यवहार को नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुकूलित करना होगा।
अक्टूबर में पेश किया गया मसौदा
RBI ने अक्टूबर 2025 में 238 मास्टर गाइडलाइन का मसौदा पेश किया था। इसे विभिन्न बैंकिंग अधिकारियों और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया। शुक्रवार को 244 मास्टर गाइडलाइन जारी कर दी गई। यह पहली बार है जब RBI ने इतने व्यापक बदलाव किए हैं।
बैंकिंग सुधार और पारदर्शिता
इस कदम से बैंकिंग प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता बढ़ेगी। बैंकों को नियमों की जानकारी आसानी से मिलेगी और ग्राहकों के लिए बैंकिंग व्यवहार अधिक सरल हो जाएगा। यह कदम भारतीय बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
RBI द्वारा 5,673 पुराने सर्कुलर रद्द करना और 244 नई मास्टर गाइडलाइन जारी करना भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह कदम बैंकिंग नियमों को सरल, पारदर्शी और ग्राहकों के लिए अधिक समझने योग्य बनाने की दिशा में किया गया है। डिजिटल बैंकिंग और सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े निवेश और लोन पर इसका असर विशेष रूप से महसूस किया जाएगा। आम लोगों के लिए यह बदलाव बैंकिंग लेनदेन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाएगा।
