वित्तीय जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि समय पर EMI जमा करने वाला व्यक्ति कभी भी खराब क्रेडिट प्रोफाइल में नहीं आता। अधिकांश उपभोक्ता सोचते हैं कि EMI समय से भर देना ही क्रेडिट स्कोर की सुरक्षा और मजबूती की कुंजी है। लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है। कई लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि मॉडल EMI अदायगी और भुगतान इतिहास के बावजूद अचानक क्रेडिट स्कोर गिर जाता है। ऐसा क्यों होता है, इसका विश्लेषण गहराई से आवश्यक है।

क्रेडिट स्कोर, सरल शब्दों में, आपकी पूरी वित्तीय विश्वसनीयता की संक्षिप्त रेटिंग है। यह उस व्यक्ति की क्षमता को दर्शाता है जिस पर बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं भरोसा कर सकती हैं। सामान्यत: 300 से 900 तक के बीच उपलब्ध स्कोर में 750 से ऊपर का स्कोर उत्कृष्ट माना जाता है। जिन लोगों का स्कोर 800 और उससे ऊपर होता है, उन्हें प्रीमियम श्रेणी में शामिल माना जाता है, जहां ब्याज दरें कम, अनुमोदन दर अधिक, और दस्तावेजी प्रक्रिया सरल हो जाती है।
लेकिन कई उपभोक्ताओं के सामने यह स्थिति आई है कि वे वर्षों से हर किस्त समय पर भरते रहे और फिर भी स्कोर एक बार में 40, 50 या कुछ मामलों में 100-150 अंकों तक गिर जाता है। यह गिरावट केवल भविष्य की लोन क्षमता को प्रभावित नहीं करती, बल्कि होम लोन, ऑटो लोन, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड लिमिट और यहां तक कि नौकरी संबंधी प्रोफाइल तक को प्रभावित कर सकती है।
क्रेडिट स्कोर वास्तव में कैसे संचालित होता है
क्रेडिट स्कोर के निर्माण की प्रक्रिया एक साधारण जोड़-घटाव नहीं है। यह उस विस्तृत गणना का परिणाम है जो व्यक्ति के उधार इतिहास, वर्तमान देनदारियों, भुगतान की समयबद्धता, खाते की सक्रियता, क्रेडिट उपयोग और रिपोर्टिंग विवरण पर आधारित होती है।
भारत में प्रचलित प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो—CRIF High Mark, Experian, Equifax और CIBIL—बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त डेटा के आधार पर स्कोर तैयार करते हैं। बैंक हर माह निर्धारित तारीखों पर आपके खाते से संबंधित अपडेट भेजते हैं, लेकिन यहां से ही गलती की शुरुआत होती है।
कई बार बैंक अपनी रिपोर्टिंग देर से करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि EMI 5 तारीख को जमा हुई और बैंक का अपडेट 20 तारीख को गया, तो ब्यूरो रिपोर्ट में यह Update Delay के रूप में दर्ज हो सकता है। रिपोर्ट में एक अस्थायी स्थिति बनी रहती है, जिससे स्कोर घट सकता है।
EMI समय पर भरकर भी होने वाली चार बड़ी गलतियां
1. डुप्लिकेट लोन एंट्री का दर्ज होना
मान लीजिए आपने होम लोन लिया और उसी समझौते की दो रिपोर्ट ऊपर चली गई। यूं प्रतीत होगा कि आप पर दो बड़े लोन चल रहे हैं। इससे ब्यूरो यह मान लेता है कि आपके ओवरऑल डेब्ट-टू-इनकम अनुपात में बढ़ोतरी हो गई है। बैंक यह सोचते हैं कि ग्राहक पर लोड बढ़ गया, और इसे जोखिम चिह्नित कर देते हैं। इससे स्कोर गिर जाता है।
ऐसे कई मामलों में उपभोक्ता यह तक नहीं जानते कि उनके नाम पर डुप्लिकेट लोन चल रहा है। यह समस्या अक्सर उन ग्राहकों में देखी जाती है जिन्होंने समय-समय पर बैंक से टॉप-अप लोन या बैलेंस ट्रांसफर कराया है।
2. KYC डेटा mismatch—नाम, पता, जन्मतिथि
क्रेडिट ब्यूरो सख्त नियम के तहत डेटा को मिलाता है। यदि बैंक ने नाम में ‘Kumar’ और दूसरी संस्था ने ‘Kumaar’ लिखा, तो दोनों रिकॉर्ड असमान समझे जाते हैं। उसके बाद एक नया रिकॉर्ड add हो जाता है, जिससे आपकी लोन प्रोफाइल multiple history की तरह दिखाई देती है।
ऐसी छोटी गलतियां क्रेडिट स्कोर में अचानक बदलाव ला देती हैं।
3. बैंक के अपडेट में देर होना
कई बार बैंक EMI या कार्ड भुगतान को late process करते हैं, जबकि आपने धन समय पर दिया होता है। बैंक रिपोर्टिंग के दौरान इसे “Pending Settlement” या “Not Updated Yet” स्थिति में भेजते हैं। ब्यूरो इसे संभावित विलंब के रूप में लॉग करते हैं। इससे temporary रूप से स्कोर गिर जाता है।
4. पुराने बंद खाते अपडेट न कराना
लोग अक्सर खातों को बंद मानकर छोड़ देते हैं, जबकि बैंक रिपोर्ट नहीं भेजते। पुराना कार्ड active दिखता रहता है। इससे किसी व्यक्ति का credit limit utilization ratio बढ़ा हुआ दिखता है।
उदाहरण—
व्यक्ति की कुल उपलब्ध लिमिट 2 लाख है
वह 60,000 उपयोग करता है
यानी उपयोग प्रतिशत—30 प्रतिशत
यदि एक कार्ड इस्तेमाल-रहित है, पर बंद नहीं दिख रहा
ब्यूरो इसे exposed risk मानता है।
क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्ट क्यों साल में एक बार पढ़ना जरूरी है
कानून अनुसार हर व्यक्ति को वर्ष में एक मुफ्त रिपोर्ट प्राप्त करने का अधिकार है। अधिकांश लोग इस सुविधा का उपयोग ही नहीं करते। परिणाम? समस्याएं समय पर पहचान नहीं होतीं।
रिपोर्ट पढ़ते समय तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—
- active loan count
- last payment date
- settlement या write-off history
EMI भरते रहने से इतिहास अच्छा जरूर बनता है
कभी-कभी एक छोटी गलती भविष्य के loan eligibility को अधिक प्रभावित कर देती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने कभी EMI में 30 दिन की देरी की हो तो उसका remark वर्षों तक दर्ज रह सकता है।
यहां ध्यान देने की बात यह है कि सही समय पर भुगतान होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि ब्यूरो तक सही सूचना समय पर पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।
यदि कोई mismatch हो, तो संबंधित बैंक से rectification application देकर इसे ठीक कराया जा सकता है। प्रक्रिया आमतौर पर 7 से 25 कार्य दिवसों में पूर्ण हो जाती है।
वित्तीय आदतें जो स्कोर को स्थिर रखती हैं
- क्रेडिट कार्ड लिमिट का 30% से नीचे उपयोग
- पुराने accounts बंद करने से पहले NOC हासिल करना
- हर तिमाही रिपोर्ट जांचना
- एक साथ बहुत अधिक लोन आवेदन न करना
- ऑटो-डिडक्ट पहले से सक्रिय रखना
सुधार की प्रक्रिया प्रभावी क्यों है
जब व्यक्ति उचित जानकारी के साथ बैंक से correction करवाता है, तो ब्यूरो उसी महीने स्कोर सुधार देता है। कई बार एक छोटी rectification से 40-80 अंक सुधार भी मिलता है।
