भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। ट्रेडिंग की शुरुआत में ही निवेशकों को झटका लगा और कुछ ही समय में कंपनी का शेयर करीब पांच प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इस गिरावट ने न केवल निवेशकों की चिंता बढ़ाई, बल्कि पूरे बाजार के सेंटिमेंट को भी प्रभावित किया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर बीएसई पर पिछले कारोबारी सत्र में 1577 रुपये के आसपास बंद हुआ था, लेकिन आज बाजार खुलते ही यह दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में शेयर 1575 रुपये के करीब खुला, मगर बिकवाली का सिलसिला इतना तेज रहा कि कुछ ही देर में यह 1497 रुपये तक फिसल गया।
मार्केट कैप से उड़े करीब एक लाख करोड़ रुपये
शेयर में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। कुछ ही घंटों के भीतर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मार्केट कैप से करीब एक लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। निवेशकों के लिए यह नुकसान चौंकाने वाला था, क्योंकि रिलायंस को लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार की सबसे मजबूत और भरोसेमंद कंपनियों में गिना जाता रहा है।
इस गिरावट के साथ रिलायंस निफ्टी 50 इंडेक्स में सबसे बड़ा दबाव बनाने वाला शेयर बनकर उभरा। बेंचमार्क इंडेक्स में आई कुल गिरावट का बड़ा हिस्सा अकेले इसी स्टॉक की वजह से दर्ज किया गया।
गिरावट की वजह क्या रही
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट और उस पर कंपनी की सफाई को माना जा रहा है। हाल ही में एक वैश्विक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि रूस से कच्चा तेल लेकर आ रहे तीन टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं और उनका रुख रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की तरफ है।
इस रिपोर्ट के सामने आते ही बाजार में अटकलों का दौर शुरू हो गया। निवेशकों को आशंका हुई कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर रिलायंस जैसे बड़े कारोबारी समूह पर पड़ सकता है।
कंपनी की ओर से आई सफाई
इन अटकलों के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि उसे जनवरी महीने में रूस से कच्चे तेल की कोई डिलीवरी मिलने की उम्मीद नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि पिछले तीन हफ्तों से कंपनी को रूस से कोई भी तेल कार्गो नहीं मिला है।
कंपनी ने यह भी साफ किया कि जिस रिपोर्ट में तीन टैंकरों के जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ने का दावा किया गया था, वह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। रिलायंस का कहना है कि मौजूदा समय में उसकी कच्चे तेल की आपूर्ति योजनाएं पहले से तय रणनीति के तहत चल रही हैं।
अमेरिकी बयान से बढ़ी बाजार की चिंता
इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का पहलू भी जुड़ गया है। अमेरिका की ओर से हाल ही में यह संकेत दिए गए कि यदि भारत रूस से तेल की खरीद कम नहीं करता है, तो व्यापारिक टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं।
इस बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। बाजार को यह डर सताने लगा कि अगर अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है जिनका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आयात से गहरा जुड़ाव है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो कभी रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनी रही है, इस चर्चा के केंद्र में आ गई।
ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेज उछाल
शेयर में आई गिरावट के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी असामान्य बढ़ोतरी देखी गई। इसका मतलब यह रहा कि बड़ी संख्या में निवेशकों ने या तो मुनाफावसूली की या जोखिम से बचने के लिए अपने शेयर बेच दिए।
दिन के मध्य तक शेयर कुछ हद तक संभलने की कोशिश करता दिखा, लेकिन दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। एक समय कंपनी का शेयर करीब चार प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ 1513 रुपये के आसपास ट्रेड करता नजर आया।
हालिया प्रदर्शन पर नजर
अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर के हालिया प्रदर्शन को व्यापक नजरिए से देखें, तो तस्वीर थोड़ी संतुलित नजर आती है। बीते एक हफ्ते में शेयर में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि दो हफ्तों के दौरान इसमें करीब ढाई प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।
मासिक आधार पर भी शेयर मामूली तौर पर नीचे रहा है। हालांकि तिमाही आधार पर कंपनी ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है और पिछले तीन महीनों में शेयर में दो अंकों की बढ़त दर्ज की गई है।
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो पिछले एक साल में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर ने करीब 25 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल दिखाया है, जो इसकी बुनियादी मजबूती को दर्शाता है।
तकनीकी संकेत क्या कहते हैं
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से रिलायंस का शेयर अभी भी मिड और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि लंबी अवधि में ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स भी फिलहाल न्यूट्रल जोन में बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि शेयर न तो ओवरसोल्ड स्थिति में है और न ही ओवरबॉट में। बाजार के जानकार मानते हैं कि मौजूदा गिरावट भावनात्मक और खबर आधारित ज्यादा है, न कि कंपनी के बुनियादी कारोबार से जुड़ी।
निवेशकों के लिए संदेश
इस गिरावट ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि बड़े और मजबूत माने जाने वाले शेयर भी वैश्विक घटनाओं और राजनीतिक बयानों से अछूते नहीं रहते। निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं, बल्कि तथ्यों को समझने और लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहने का है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार ऊर्जा, रिटेल, डिजिटल और दूरसंचार जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। कंपनी की बुनियादी स्थिति में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बाजार का हिस्सा है।
निष्कर्ष
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में आई यह तेज गिरावट एक खबर और उससे जुड़े वैश्विक संकेतों का नतीजा मानी जा रही है। कंपनी की सफाई के बावजूद बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा, जिसका असर शेयर की कीमत पर पड़ा।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है। फिलहाल निवेशकों की नजर कंपनी के अगले कदम और बाजार के मूड पर टिकी हुई है।
