हर साल गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की झलक देखने को मिलती है। लेकिन इस बार 26 जनवरी की परेड कुछ खास होने जा रही है। देशवासी एक ऐसा दृश्य देखेंगे, जो पहले कभी एक साथ सामने नहीं आया। भारतीय सेना की परंपरागत शान और आधुनिक प्रशिक्षण का अनूठा संगम इस बार परेड में नजर आएगा, जब ज़ांस्कर पोनी, बैक्ट्रियन ऊंट, प्रशिक्षित बाज जिन्हें रैप्टर्स कहा जाता है और सेना के जांबाज डॉग्स एक साथ कदमताल करते दिखाई देंगे।

इस ऐतिहासिक टुकड़ी की कमान भोपाल की कैप्टन हर्षिता राघव के हाथों में होगी। यह न केवल भारतीय सेना के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि मध्यप्रदेश और खासकर भोपाल के लिए भी गौरव का विषय है।
पहली बार एक साथ दिखेंगे सेना के बाज और डॉग्स
भारतीय सेना में वर्षों से जानवरों की भूमिका बेहद अहम रही है। चाहे सीमाओं पर रसद पहुंचाने का काम हो, ऊंचाई वाले इलाकों में गश्त या फिर आतंकी गतिविधियों की पहचान, जानवरों ने हमेशा सैनिकों का साथ निभाया है। लेकिन पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में सेना के बाज-डॉग्स को औपचारिक रूप से परेड का हिस्सा बनाया गया है।
इन बाजों को विशेष रूप से हवाई निगरानी और सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। वहीं आर्मी डॉग्स विस्फोटकों की पहचान, दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने और खोजी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन दोनों की एक साथ परेड यह दर्शाती है कि भारतीय सेना पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ प्रकृति की ताकत का भी कुशलता से उपयोग करती है।
ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट की अहम भूमिका
परेड में शामिल होने वाले ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट भारतीय सेना की उन टुकड़ियों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो देश के सबसे कठिन और दुर्गम इलाकों में तैनात रहती हैं। लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में ज़ांस्कर पोनी सेना के लिए जीवनरेखा की तरह हैं। बर्फीले रास्तों और ऊंची चोटियों पर जहां आधुनिक वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां ये पोनी रसद और उपकरण पहुंचाने में मदद करती हैं।
इसी तरह बैक्ट्रियन ऊंट रेगिस्तानी इलाकों में सेना के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं। दो कूबड़ वाले ये ऊंट अत्यधिक गर्मी और लंबे सफर को सहन करने में सक्षम होते हैं। इनका परेड में शामिल होना भारतीय सेना की भौगोलिक विविधता में तैनाती को दर्शाता है।
भोपाल की कैप्टन हर्षिता राघव के हाथों ऐतिहासिक जिम्मेदारी
इस विशेष टुकड़ी की कमान कैप्टन हर्षिता राघव संभालेंगी, जो भोपाल की रहने वाली हैं। यह जिम्मेदारी मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कैप्टन हर्षिता भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर से जुड़ी हैं, जो सेना के पशु बल की देखरेख, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालता है।
इस कोर में सेवा देना अत्यंत अनुशासन, तकनीकी ज्ञान और संवेदनशीलता की मांग करता है। कैप्टन हर्षिता ने अपने प्रशिक्षण और सेवा काल में इन सभी गुणों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यही कारण है कि उन्हें इस ऐतिहासिक परेड का नेतृत्व करने का अवसर मिला।
रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर की अनदेखी लेकिन अहम भूमिका
भारतीय सेना का रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर अक्सर सुर्खियों में नहीं रहता, लेकिन इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह कोर सेना के सभी पशुओं जैसे घोड़े, खच्चर, ऊंट और डॉग्स की देखभाल, प्रशिक्षण और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है।
इस कोर के अधिकारी न केवल सैन्य रणनीति को समझते हैं, बल्कि पशु चिकित्सा और व्यवहार विज्ञान में भी विशेषज्ञ होते हैं। कैप्टन हर्षिता राघव इसी कोर की प्रतिनिधि हैं और उनकी अगुवाई में यह टुकड़ी सेना की उस ताकत को सामने लाएगी, जो आमतौर पर पर्दे के पीछे रह जाती है।
महिला नेतृत्व का सशक्त प्रतीक
गणतंत्र दिवस परेड में एक महिला अधिकारी द्वारा इस तरह की विशिष्ट टुकड़ी का नेतृत्व करना बदलते भारत और बदलती सेना की तस्वीर पेश करता है। यह दिखाता है कि आज भारतीय सेना में महिलाएं केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी मजबूती से खड़ी हैं।
कैप्टन हर्षिता की मौजूदगी उन लाखों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो सेना में जाने का सपना देखती हैं। यह संदेश साफ है कि काबिलियत और समर्पण के आगे कोई भी सीमा बाधा नहीं बन सकती।
कर्तव्य पथ पर दिखेगा अनुशासन और समन्वय का अद्भुत दृश्य
जब ये सभी पशु और उनके प्रशिक्षक कर्तव्य पथ पर कदमताल करेंगे, तो वह दृश्य अनुशासन, प्रशिक्षण और समन्वय का बेहतरीन उदाहरण होगा। बाजों की उड़ान, डॉग्स की सटीक चाल और पोनी व ऊंटों की सधी हुई गति दर्शाएगी कि सेना किस स्तर की तैयारी और नियंत्रण के साथ काम करती है।
यह परेड केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह दिखाने का माध्यम होगी कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में तैयार है, चाहे वह पहाड़ हों, रेगिस्तान हों या आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां।
गणतंत्र दिवस परेड का बढ़ता वैश्विक महत्व
हर साल गणतंत्र दिवस परेड को देखने के लिए देश-विदेश की नजरें भारत पर टिकी रहती हैं। इस बार यह परेड इसलिए भी खास होगी क्योंकि इसमें सेना की अनोखी क्षमताओं का प्रदर्शन होगा। यह संदेश जाएगा कि भारत न केवल आधुनिक हथियारों में मजबूत है, बल्कि पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग में भी अग्रणी है।
भोपाल के लिए गर्व का क्षण
कैप्टन हर्षिता राघव का भोपाल से होना इस शहर के लिए गर्व की बात है। यह साबित करता है कि देश के हर कोने से प्रतिभाएं निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपना परचम लहरा रही हैं। भोपाल की यह बेटी अब देश के सामने सेना की एक अनोखी तस्वीर पेश करेगी।
