हर दौर में महिलाएं अपनी पहचान, सपनों और जीवन की प्राथमिकताओं को लेकर संघर्ष करती रही हैं। उनके भीतर मां बनने की इच्छा भी होती है और अपनी स्वतंत्र पहचान, करियर, सपनों और जीवन की रफ्तार भी। आधुनिक समय ने इस संघर्ष को और अधिक परिभाषित किया है। अपनी जिंदगी के अलग-अलग उतार–चढ़ावों से गुजर चुकी अभिनेत्री रिया ने खुलकर स्वीकार किया कि वह एग फ्रीजिंग जैसे विकल्प पर विचार कर रही हैं।
एक महिला के रूप में यह न केवल एक निर्णय, बल्कि जीवन की गहराई से जुड़ा सवाल भी है—
क्या शरीर की जैविक समय सीमा और जीवन की इच्छाएं हमेशा एक साथ चल पाती हैं?

रिया ने हाल ही में बताया कि वह अपनी गायनोकॉलोजिस्ट से परामर्श लेकर आई हैं, क्योंकि उनके भीतर ‘बॉडी क्लॉक’ ने एक हलचल और अधूरापन पैदा किया। उम्र बढ़ने के साथ शरीर संकेत देने लगता है। रिया भी इसी दुविधा में थीं कि क्या वह अभी मां बनने की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं या नहीं।
एग फ्रीजिंग क्यों बना विकल्प?
आधुनिक समय में लाखों महिलाएं इस प्रक्रिया पर विचार करती हैं।
कुछ कारण—
- करियर प्राथमिकता
- मानसिक तैयारी
- सही साथी की तलाश
- जीवन को स्थिर बनाने की चाह
रिया ने भी इन्हीं भावनात्मक और तार्किक पक्षों के बीच संतुलन खोजने की कोशिश की। उन्होंने स्वीकार किया—
“शरीर कहता है बच्चे पैदा करो, लेकिन ज़िंदगी अभी कहती है इंतजार करो।”
यह कथन मात्र शब्द नहीं, बल्कि आधुनिक स्त्री के मन की प्रतिध्वनि है।
भावनाओं का द्वंद्व और मन की उलझन
रिया ने साफ कहा कि कभी–कभी वह बहुत उलझ जाती हैं।
उनके भीतर कई प्रश्न पलट–पलटकर आते हैं—
क्या मैं अभी तैयार हूँ?
क्या मेरा जीवन स्थिर हो चुका है?
क्या मैं मां बनकर अपने बच्चे को सबसे अधिक समय और प्यार दे पाऊंगी?
उम्र बढऩे के साथ महिला शरीर हार्मोनल बदलाव झेलता है। इसी समय एक स्वाभाविक ख्वाहिश भी जन्म लेती है—
मातृत्व का अनुभव।
बहुत सी महिलाएं इस द्वंद्व की यात्रा से गुजरती हैं—
मां बनना चाहती हैं लेकिन जल्दबाजी में नहीं
और इंतजार की कीमत भी भारी पड़ सकती है
रिया का फैसला कई महिलाओं की कहानी है।
एग फ्रीजिंग : आधुनिक दौर का भावनात्मक विज्ञान
अंडाणुओं को सुरक्षित रखने की यह प्रक्रिया, भविष्य में मातृत्व के विकल्पों को खुला रखती है।
जीवन आगे कैसे बदले?
कौन होगा जीवन साथी?
कब बनेगी परिवार बनाने की तैयारी?
उन सबके बीच यह एक स्थायी सुरक्षा जैसा है।
यह केवल विज्ञान नहीं—
यह स्त्री के अधिकार, स्वतंत्र निर्णय, शरीर की इच्छा और भावनात्मक शांति का मेल है।
चर्चा समाज में क्यों?
क्योंकि रिया का नाम पहले ही कई विवादों से घिर चुका है।
जब वह जीवन पर खुलकर बात करती हैं—तो यह चर्चा का विषय बन जाता है।
उनके साहस को सराहना भी मिलती है
और सवाल भी
लेकिन एक बात स्पष्ट है—
वह जीवन को स्थिर रखने और भविष्य के प्रति सजग रहने का निर्णय ले रही हैं।
किसी महिला के लिए यह कदम उसकी आत्मनिर्भरता और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक है।
वर्तमान समय की स्त्री और मातृत्व की जटिलता
पुराने समय में परिस्थिति अलग थी—
शादी की उम्र तय
मातृत्व की उम्र सीमित
और जीवन की भूमिका पूर्वनिर्धारित
आज की महिला स्वयं अपनी भूमिका चुनना चाहती है—
कब शादी
कब करियर
कब मातृत्व
किसके साथ
और यह निर्णय उसके भीतर के आत्मसम्मान से जुड़ा है।
रिया भी इसी प्रवाह में हैं।
समाज की उम्मीदें बनाम स्वयं की इच्छा
भारतीय समाज में—
मां बनना लड़की की नियति माना जाता है
लेकिन आज की महिला चाहती है—
पहले स्वयं को समझना
स्थिर होना
और समझदारी से निर्णय लेना
रिया ने यही कहा—
“मैं दिमाग से नहीं, शरीर से बात कर रही थी।”
यानी मन तैयार नहीं
लेकिन शरीर संकेत दे रहा है।
निष्कर्ष : यह सिर्फ रिया की नहीं, नए समय की स्त्री की कहानी है
हर महिला अपने जीवन में एक मोड़ पर पहुंचती है—
जहाँ मातृत्व, करियर, स्वतंत्रता, पहचान और जिम्मेदारी साथ खड़े होते हैं।
रिया का निर्णय इस संघर्ष की कहानी है
जो बहादुरी, आत्मसम्मान और भविष्य की तैयारी की मिसाल है।
