साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का रहस्य अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है, लेकिन जांच की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे नए सवाल सामने आते जा रहे हैं। पहले जहां पूरा ध्यान उनकी मृत्यु के कारणों पर केंद्रित था, वहीं अब जांच का दायरा उनकी आय और संपत्ति तक पहुंच गया है। कथा वाचन के माध्यम से लोकप्रियता हासिल करने वाली साध्वी की आर्थिक स्थिति को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा के दो बैंक खाते पाए गए हैं। जब इन खातों की जांच की गई तो सामने आया कि एक खाते में लगभग 56 हजार रुपये और दूसरे खाते में करीब 80 हजार रुपये जमा थे। कुल मिलाकर उनके बैंक खातों में केवल 1 लाख 36 हजार रुपये की राशि पाई गई। यह तथ्य इसलिए चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि साध्वी प्रेम बाईसा नियमित रूप से कथा आयोजन करती थीं और उनकी मांग पूरे प्रदेश में थी।
बताया जाता है कि महीने में लगभग 22 से 23 दिन उनका कथा कार्यक्रम तय रहता था। कम समय में ही उन्होंने व्यापक पहचान बना ली थी। धार्मिक आयोजनों में उनकी उपस्थिति को लेकर लोगों में उत्साह देखा जाता था। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि वह कथा के लिए कोई निश्चित शुल्क निर्धारित नहीं करती थीं। जहां जैसा आयोजन और परिस्थिति होती, उसी के अनुरूप वे कार्यक्रम स्वीकार कर लेती थीं। उनका उद्देश्य धन संचय से अधिक धर्म प्रचार को बताया जाता है।
फिर भी यह माना जा रहा है कि प्रत्येक कथा आयोजन से उन्हें कम से कम एक से दो लाख रुपये तक की आय हो जाती थी। यदि औसत आय का अनुमान लगाया जाए तो वर्षभर में उनकी कमाई लगभग 20 से 25 लाख रुपये के बीच हो सकती थी। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि यदि इतनी आमदनी हो रही थी तो बैंक खातों में इतनी कम राशि क्यों है।
जांच अधिकारियों के लिए यह बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि साध्वी की आय किस माध्यम से आती थी और उसका उपयोग या हस्तांतरण किस प्रकार किया जाता था। क्या धनराशि नकद रूप में रहती थी, क्या वह किसी ट्रस्ट या आश्रम के माध्यम से संचालित होती थी, या फिर किसी अन्य व्यक्ति के पास जाती थी। फिलहाल इस संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन आर्थिक पहलू की जांच अब प्रमुख दिशा बन चुकी है।
इस मामले की जांच कर रही अधिकारी ने बताया कि अब तक की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी गई है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकला है और प्रक्रिया जारी है। जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले को परख रही हैं ताकि किसी भी संभावना को नजरअंदाज न किया जाए।
मौत के कारणों को लेकर भी अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया गया है। प्रारंभिक जानकारी में कार्डियक अरेस्ट की संभावना जताई गई थी, लेकिन इसी बीच एक कंपाउंडर की भूमिका भी जांच के घेरे में आई। आरोप है कि बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के साध्वी को इंजेक्शन लगाया गया था। इस आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत लापरवाही और उतावलेपन का मामला दर्ज किया गया। हालांकि फिलहाल गिरफ्तारी नहीं की गई है और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।
कंपाउंडर से कई दौर की पूछताछ की गई है और आवश्यकता पड़ने पर उसे दोबारा बुलाया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि उससे जमानती मुचलका भरवाया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
साध्वी प्रेम बाईसा की लोकप्रियता और धार्मिक गतिविधियों को देखते हुए उनके अनुयायियों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता है। जहां एक ओर लोग उनकी मृत्यु के वास्तविक कारण जानना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी आय और संपत्ति को लेकर उठे सवाल भी चर्चा का विषय बन गए हैं।
धार्मिक आयोजनों में पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी अब बहस तेज हो गई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या धार्मिक कार्यक्रमों से प्राप्त धन का लेखा-जोखा व्यवस्थित तरीके से रखा जाता था या नहीं। यदि रखा जाता था तो वह विवरण कहां है।
जांच एजेंसियां इस संभावना को भी देख रही हैं कि क्या आय का कोई हिस्सा आश्रम संचालन, धार्मिक गतिविधियों या सामाजिक कार्यों में व्यय किया गया। यदि ऐसा है तो उसके दस्तावेजी प्रमाण क्या हैं। इन सभी सवालों के उत्तर अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल यह मामला आस्था, प्रशासनिक जांच और आर्थिक पारदर्शिता के त्रिकोण में खड़ा दिखाई दे रहा है। एक ओर श्रद्धा और विश्वास का विषय है, तो दूसरी ओर कानून और जवाबदेही की प्रक्रिया।
जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब केवल चिकित्सकीय जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आर्थिक पहलू भी उतनी ही गंभीरता से जांच के केंद्र में आ गया है।
आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि खातों में कम राशि का कारण क्या था और क्या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता शामिल थी या नहीं। फिलहाल पूरा प्रदेश इस मामले के अंतिम सच का इंतजार कर रहा है।
