बिग बॉस 19 का ग्रैंड फिनाले हमेशा की तरह उत्साह, मनोरंजन और चमकदार रोशनी में सजा हुआ था, लेकिन इस बार एक ऐसा क्षण आया जिसने पूरे वातावरण को भावुक कर दिया। मंच पर नृत्य, तालियों की आवाज, सितारों की मौजूदगी और विजेता के इंतजार के बीच कार्यक्रम अचानक एक गहरा मोड़ लेता है। स्क्रीन पर दिग्गज कलाकार धर्मेंद्र के जीवन की झलकियां दिखाई जाने लगीं। दर्शकों ने उन्हें हंसते, अभिनय करते और जीवन को एक बड़ी प्रार्थना की तरह जीते देखा। जैसे ही वह दृश्य आगे बढ़ा, कैमरे ने सलमान खान के चेहरे पर ठहराव लिया। उनकी आंखें भर आईं, और अगले ही पल आंसू गिर पड़े। मंच पर खड़े सलमान एकदम नि:शब्द होकर धर्मेंद्र को देख रहे थे, मानो उनके भीतर की स्मृतियां एक साथ उभर आई हों।

धर्मेंद्र को सिर्फ एक अभिनेता के रूप में नहीं देखा गया। वे ऐसे व्यक्ति थे जिनके व्यक्तित्व ने दो पीढ़ियों से अधिक समय तक फिल्म जगत में शिखर की रोशनी बनाए रखी। बड़े पर्दे पर उनका करियर लगभग छह दशक से ज्यादा लंबा रहा और इसी सफर को सलमान खान ने अंतिम बार सार्वजनिक मंच पर भावनाओं में पिरोकर याद किया।
सलमान खान का वह क्षण जो इतिहास में दर्ज हो गया
देहली के आसपास से शुरू हुई फुसफुसाहट, फिर मुम्बई की फिल्मनगरी की चमक में स्थायी नाम बन जाना धर्मेंद्र की जिंदगी का सामान्य परिचय है, लेकिन सलमान खान के लिए धर्मेंद्र वह इंसान थे जिनके साथ रहकर फिल्में करने से अधिक जीवन से सीखने का अवसर मिला। सलमान ने गहरी आवाज में कहा कि हमने अपने ही-मैन को खो दिया है और कोई दूसरा उनके समान कभी नहीं हो सकता। उनके चेहरे पर जो दर्द उतरा, वह किसी अभिनेता के अंदाज में नहीं था, बल्कि एक बेटे की पीड़ा की तरह थी, जिसने अपने बड़े का कंधा थामा हो।
सलमान ने याद किया कि धर्मेंद्र ने जिस गर्मजोशी के साथ लोगों से संबंध बनाए, हर कलाकार के लिए वह एक उदाहरण और आश्चर्य रहा। सलमान ने मंच पर रुककर सांस ली और कहा कि जिस व्यक्ति ने जीवन को राजसी ढंग से जिया, वह साधु की सादगी भी अपने भीतर लेकर चलता था।
धर्मेंद्र की यात्रा का नया स्मरण
धर्मेंद्र का जीवन संघर्ष से शुरू हुआ, भूमिका बदलती रही, लेकिन व्यक्तित्व एक जैसा रहा। पंजाब की धरती से उठकर मुंबई की चमक में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। लंबे समय तक उन्हें स्क्रीन पर एक साधारण, भरा-पूरा, सहज पुरुष के रूप में ही देखा गया। फिर अचानक वही चेहरा एक्शन की परिभाषा बन गया और वह ही-मैन कहलाए।
फिल्मों में उनके कई किरदार भारतीय सिनेमा की नींव बन गए। चाहे धरम वीर हो, शोले हो या फूल और पत्थर जैसी हिट फिल्में – हर फिल्म में वह इंसान उभरता था, जिसे दर्शकों ने अपनी आत्मा के भीतर स्वीकार किया।
सलमान ने मंच पर बताते हुए कहा कि धर्मेंद्र ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, वे अपने हर किरदार को जीवन की तरह जीते थे। उनके भीतर निर्मलता थी और इंसानियत उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान।
सलमान ने परिवार को सलाम किया
धर्मेंद्र के निधन के बाद सनी देओल और बॉबी देओल ने जिस आत्मसम्मान और सरलता के साथ अंतिम संस्कार संपन्न किया, सलमान ने उस क्षण को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि आज के समय में भावनाएं सोशल मीडिया के जरिए कही जाती हैं, जहां लाइक्स और व्यूज़ तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन धर्मेंद्र जैसे इंसान के लिए जब प्रेम उमड़ा तो वह डिजिटल आंकड़ों से ऊपर था। यह एक इंसान के चरित्र और उसकी सादगी का सम्मान था।
सलमान की आवाज तब और भारी हो गई जब उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को हुआ, जो सलमान के पिता का भी जन्मदिन है। उन्होंने कहा कि समय ऐसा था कि दो दिन लगातार उन्होंने जीवन और मृत्यु के अर्थों को महसूस किया।
धर्मेंद्र का अंतिम सफर और अंतिम प्रार्थनाएं
अस्पताल में भर्ती रहने के बाद घर लौटना जीवन के अंतिम पड़ाव जैसा था। परिवार ने उन्हें सुरक्षित माहौल में रखा। बहुत से लोगों ने उम्मीदें लगाईं, अफवाहें भी फैलीं कि वह स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन मृत्यु कभी तय समय नहीं पूछती। 89 वर्ष की उम्र में धर्मेंद्र ने अंतिम सांस ली। उनके साथ आदर का रिश्ता रखने वाले कलाकारों की भीड़ अंतिम संस्कार में शामिल हुई।
बिग बॉस का मंच केवल शो नहीं, एक स्मृति बना
फिनाले एपिसोड केवल मनोरंजन नहीं रहा। उस रात एक बड़ा सांस्कृतिक क्षण बना। टीवी इतिहास ऐसे पलों को हमेशा संभालकर रखता है क्योंकि वह सिर्फ किसी शो की नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। दर्शकों ने टीवी स्क्रीन के उस पार बैठे हुए आंसुओं की आवाज महसूस की।
एक पीढ़ी को लगा कि वे राजसी सिनेमा के golden era के सबसे चमकदार सितारे को विदाई दे चुके हैं। एक नई पीढ़ी ने पहली बार यह जाना कि फिल्में बनाने का इल्म केवल तकनीक से नहीं, बल्कि संवेदनाओं से बनता था।
अंतिम बातें, जिनमें प्यार जीवित रहा
सलमान ने कहा कि धर्मेंद्र की याद हमेशा रहेगी। वह सिर्फ फिल्मों में नहीं, बल्कि हर बातचीत में, हर अभिनय प्रशिक्षण में, हर मंच और हर सम्मान में मौजूद रहेंगे। उनका जीवन उन लोगों के लिए एक दस्तावेज बन गया है, जिन्होंने अभिनय को पेशा नहीं, जीवन माना।
