लुधियाना जिले के समराला कस्बे में 3 नवंबर 2025 की रात एक गोली चली—और पंजाब के कबड्डी जगत ने अपना एक उभरता सितारा खो दिया। मृतक खिलाड़ी गुरविंदर सिंह, जो अपनी फिटनेस, समर्पण और खेल भावना के लिए जाने जाते थे, की हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। शुरुआत में मामला गैंगवार जैसा लगा, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी, इस हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं—और सामने आई एक ऐसी साजिश, जो पंजाब से लेकर विदेश तक फैली हुई थी।

रक्तदान कैंप से शुरू हुई दुश्मनी, बनी जानलेवा रंजिश
एसएसपी डॉ. ज्योति यादव बैंस के अनुसार, हत्या की जड़ एक मामूली सी लगने वाली घटना में थी—एक रक्तदान शिविर में हुई कहासुनी।
कुछ हफ्ते पहले समराला में आयोजित रक्तदान कैंप में धर्मवीर उर्फ धर्मा और उसके साथी (जो “बाबू समराला” एंटी ग्रुप से जुड़े थे) का झगड़ा करण मादपुर के पिता से हुआ था। वह झगड़ा इतना बढ़ा कि करण मादपुर ने अपने साथी गुरतेज सिंह उर्फ तेजी के साथ बदला लेने की ठान ली।
3 नवंबर की रात करण मादपुर और उसके साथी हथियारों से लैस होकर धर्मवीर को निशाना बनाने निकले। लेकिन दुर्भाग्य से गोली गुरविंदर सिंह को लगी, जो उस समय मौके पर मौजूद तो थे, मगर विवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने खोली साजिश की परतें
वारदात के तुरंत बाद खन्ना पुलिस हरकत में आई। एसएसपी बैंस के नेतृत्व में कई टीमें गठित की गईं, जिन्होंने समराला और आसपास के इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी। जल्द ही पता चला कि आरोपी तरनतारन जिले में छिपे हुए हैं।
पुलिस ने सीआईए स्टाफ और समराला थाना पुलिस की मदद से एक संयुक्त अभियान चलाया। सुराग के आधार पर पुलिस टीम ने तरनतारन में रेड की, जहां से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया—जिनमें मुख्य आरोपी करण मादपुर और गुरतेज सिंह शामिल थे।
विदेश से निर्देश दे रहा था गैंगस्टर टिड्डी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लगातार विदेश में बैठे गैंगस्टर जतिंदर टिड्डी के संपर्क में थे। वारदात के बाद टिड्डी ने उन्हें अपने साथी दविंदर सिंह के घर तरनतारन में जाकर छिपने की सलाह दी थी। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए वे लगातार लोकेशन बदलते रहे और देश छोड़ने की कोशिश में थे।
एसएसपी ने बताया कि इसके पीछे बठिंडा जेल में बंद गैंगस्टर रवि राजगढ़ का भी हाथ था। यही नहीं, सोशल मीडिया पर अनमोल बिश्नोई के नाम से वायरल हुई एक पोस्ट भी इस साजिश का हिस्सा थी, जिसे सुखदीप सिंह सीपा नामक व्यक्ति ने विदेश में बैठकर पोस्ट किया था—ताकि लोकप्रियता मिले और भ्रम फैलाया जा सके।
हथियार बरामदगी के दौरान मुठभेड़
पुलिस ने तरनतारन से गिरफ्तारी के बाद जब आरोपियों को दोराहा के पास कुब्बे गांव में ले जाकर हथियार बरामद करने का प्रयास किया,
तभी अचानक करण मादपुर ने चालाकी से पिस्तौल उठाई और पुलिस पर गोली चला दी।गोली सीआईए इंचार्ज नरपिंदरपाल सिंह की जांघ में लगी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें करण मादपुर घायल हो गया। दूसरा आरोपी गुरतेज सिंह पहली मंजिल से कूदकर भागने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके से एक पिस्तौल और कई जिंदा कारतूस बरामद हुए।
क्रिमिनल रिकॉर्ड्स का जाल
इस केस में पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी चौंकाने वाला है।
- संदीप सिंह (निवासी दयालपुर): 15 केस दर्ज
- हरकरण सिंह उर्फ करण मादपुर: 5 केस
- गुरतेज सिंह उर्फ तेजी: 5 केस
- राजवीर सिंह लाली: 1 केस
- राजवीर सिंह रवि राजगढ़: 17 केस
- सुखदीप सिंह सीपा: 2 केस
- जतिंदर कुमार टिड्डी: 3 केस
इन सबके अलावा कई स्थानीय लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है जिन्होंने आरोपियों को छिपाने या भागने में मदद की।
एसएसपी बैंस का बयान
एसएसपी डॉ. ज्योति यादव बैंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा — “यह हत्या पूरी तरह रंजिश का नतीजा है। निर्दोष खिलाड़ी गुरविंदर सिंह की जान चली गई। हमने सभी मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जो भी गैंगस्टरों के संपर्क में रहकर अपराध करता है, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”
समाज में गूंजता सवाल — कब बदलेगा यह सिस्टम?
गुरविंदर सिंह की मौत ने पंजाब के युवाओं के सामने एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया है —
क्या खेल और युवा प्रतिभा को हमेशा अपराध की आग में झोंका जाता रहेगा?
क्या पुलिस और प्रशासन समय रहते इन अपराधी नेटवर्क्स को रोक नहीं सकते?
लोगों में गुस्सा है, और सोशल मीडिया पर #JusticeForGurvinder ट्रेंड कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक खिलाड़ी की हत्या नहीं, बल्कि पूरे समाज की हार है।
