मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay Tiger Reserve) में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। 2026 में होने वाली बाघ गणना (Tiger Census 2026) इस बार एकदम नए स्वरूप में होगी — पूरी तरह डिजिटल, वैज्ञानिक और पेपरलेस।

यह गणना सिर्फ बाघों की नहीं, बल्कि तेंदुआ, जंगली हाथी, बायसन और अन्य प्रमुख प्रजातियों की संख्या भी दर्ज करेगी। वन विभाग ने घोषणा की है कि इस बार डेटा संग्रह और विश्लेषण का काम अत्याधुनिक तकनीक से किया जाएगा, ताकि कोई भी जानवर दो बार गिना न जाए और हर मूवमेंट वैज्ञानिक रूप से रिकॉर्ड हो सके।
इतिहास की सबसे उन्नत बाघ गणना की शुरुआत
बाघ भारत की शान हैं — और मध्यप्रदेश तो वैसे भी “टाइगर स्टेट” के नाम से जाना जाता है। राज्य में करीब आधे से ज्यादा बाघ निवास करते हैं। इसलिए हर चार साल में होने वाली बाघ गणना न केवल वन विभाग बल्कि पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस बार की गणना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह पेपरलेस होगी। हर गतिविधि मोबाइल एप, डिजिटल कैमरों और जीपीएस आधारित सिस्टम से ट्रैक की जाएगी। 15 नवंबर से बाघों की गिनती का कार्य शुरू होगा और 18 नवंबर से डेटा रिकॉर्डिंग शुरू की जाएगी।
हर प्वाइंट पर कैमरे: जंगल की हर हरकत होगी रिकॉर्ड
इस बार रिजर्व क्षेत्र में 1164 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो दो चरणों में 582 प्वाइंट्स पर स्थापित होंगे।
हर प्वाइंट पर दो कैमरे लगाए जाएंगे ताकि एक भी मूवमेंट मिस न हो सके।
- पहला चरण: ब्यौहारी, दुबरी, बस्तुआ और मड़वास रेंज
- दूसरा चरण: पोंडी, टंसार, मोहन और भुइमाड रेंज
ये कैमरे दिन-रात 24 घंटे काम करेंगे और फोटो या वीडियो के रूप में हर जानवर की गतिविधि कैप्चर करेंगे।
कैमरों में नाइट विजन और मोशन सेंसर तकनीक भी होगी ताकि अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीरें मिल सकें।
गणना का वैज्ञानिक तरीका: दो चरणों में विभाजित प्रक्रिया
सर्वेक्षण दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा —
- पहला चरण:
- कुल 281 ग्रेड बनाए गए हैं,
- हर ग्रेड लगभग 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला होगा।
- इस चरण में कैमरे की इंस्टॉलेशन, कैलिब्रेशन और टेस्टिंग होगी।
- दूसरा चरण:
- कुल 301 ग्रेड तय किए गए हैं,
- हर ग्रेड में दो कैमरे होंगे।
- फोटो रिकॉर्डिंग और डेटा एनालिसिस इस चरण में किया जाएगा।
कुल मिलाकर 582 निगरानी बिंदुओं पर 1164 कैमरे काम करेंगे, जो बाघों, तेंदुओं, बायसन और जंगली हाथियों की मूवमेंट कैप्चर करेंगे।
सर्वे टीम को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
इस बार की जनगणना में केवल वन विभाग के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वन्यजीव वैज्ञानिक, GIS विशेषज्ञ, और डेटा एनालिस्ट भी शामिल किए गए हैं। टीम को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दिया गया है ताकि डेटा त्रुटिरहित रहे।
प्रत्येक टीम को डिजिटल टैबलेट दिए गए हैं, जिन पर वन्यजीवों की फोटो, स्थान और तारीख अपने-आप रिकॉर्ड होगी। इससे पारंपरिक कागज़ी कार्य समाप्त हो जाएगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
पेपरलेस सिस्टम: टेक्नोलॉजी का जंगल से संगम
वन विभाग ने विशेष ऐप विकसित किया है जिसके ज़रिए सभी डेटा क्लाउड पर सुरक्षित रहेगा। हर कैमरे से प्राप्त फोटो AI आधारित सॉफ्टवेयर से गुजरेगी, जो यह पहचान करेगा कि तस्वीर में बाघ है या कोई और प्रजाति।
इससे मैन्युअल त्रुटियों की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डिजिटल इंडिया” और “पर्यावरण संरक्षण में तकनीक के उपयोग” के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।
बाघों के साथ अन्य वन्यजीव भी आएंगे गणना में
इस बार की जनगणना में केवल बाघ नहीं, बल्कि अन्य बड़े जानवरों की संख्या भी दर्ज होगी —
- तेंदुआ (Leopard)
- जंगली हाथी (Wild Elephant)
- बायसन (Indian Bison)
- सांभर, चीतल, नीलगाय जैसे शाकाहारी जीव
इन सभी के मूवमेंट से बाघों के क्षेत्रीय प्रभुत्व (territory) और शिकार क्षेत्र की पहचान भी की जाएगी।
पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की भूमिका
स्थानीय ग्रामीणों, वन समितियों और स्कूलों को भी इस मिशन से जोड़ा जा रहा है। उन्हें यह सिखाया जा रहा है कि कैसे बाघों की उपस्थिति का पता उनके पैरों के निशान या मल से लगाया जा सकता है।
“बाघ बचाओ, जंगल बचाओ, जीवन बचाओ” का संदेश इस बार केवल पोस्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवहारिक रूप में लागू किया जाएगा।
डेटा विश्लेषण: एआई और जीआईएस का उपयोग
एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के माध्यम से होगा। AI (Artificial Intelligence) और GIS (Geographical Information System) तकनीक का उपयोग कर प्रत्येक जानवर की पहचान, मूवमेंट और वितरण क्षेत्र को दर्शाने वाले नक्शे तैयार किए जाएंगे। यह आंकड़े न केवल भारत सरकार को भेजे जाएंगे, बल्कि इंटरनेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के रिकॉर्ड में भी दर्ज होंगे।
संरक्षण के लिए नई रणनीति
जनगणना के बाद विभाग की योजना है कि
- बाघों की बढ़ती आबादी के अनुसार नए कोर ज़ोन घोषित किए जाएं,
- मानव-बाघ संघर्ष क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए,
- और शिकारी गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण लगाया जाए।
साथ ही, इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
अंतिम संदेश
संजय टाइगर रिजर्व में इस बार की बाघ गणना न केवल तकनीक का प्रदर्शन है, बल्कि यह भारत के संवेदनशील वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का प्रतीक है। हर कैमरा, हर प्वाइंट, हर कदम इस दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है — ताकि आने वाली पीढ़ियां भी जंगल की दहाड़ सुन सकें।
