पुराने और सेकंड हैंड वाहनों की खरीदी-बिक्री करने वालों के लिए परिवहन विभाग ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रदेशभर में, जिसमें सीहोर जिला भी शामिल है, पुराने वाहनों की खरीद और बिक्री के लिए ट्रेड सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया आदेश न केवल वाहन डीलरों पर लागू होगा, बल्कि उन सभी लोगों पर भी प्रभाव डालेगा जो व्यावसायिक रूप से पुराने वाहन खरीदने और बेचने का काम करते हैं। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से वाहन कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

क्यों जरूरी समझा गया नया नियम
बीते कुछ वर्षों में सेकंड हैंड वाहन बाजार तेजी से बढ़ा है। निजी जरूरतों से लेकर छोटे व्यापार तक, पुराने वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी के साथ फर्जी दस्तावेज, टैक्स चोरी, बीमा और पंजीयन से जुड़े विवादों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। परिवहन विभाग ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला किया है कि अब बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के किसी भी पुराने वाहन की व्यावसायिक खरीदी-बिक्री नहीं की जा सकेगी।
ट्रेड सर्टिफिकेट क्या है
ट्रेड सर्टिफिकेट एक आधिकारिक अनुमति पत्र होता है, जो परिवहन विभाग द्वारा वाहन कारोबार से जुड़े लोगों को जारी किया जाता है। इसके जरिए यह प्रमाणित होता है कि संबंधित व्यक्ति या संस्था वाहन खरीदने और बेचने के लिए अधिकृत है। पहले यह व्यवस्था मुख्य रूप से नए वाहनों के डीलरों पर लागू थी, लेकिन अब इसे सेकंड हैंड वाहनों के कारोबार तक भी बढ़ा दिया गया है।
वाहन पोर्टल से करना होगा आवेदन
नए नियमों के तहत ट्रेड सर्टिफिकेट के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। आवेदक को अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज, व्यापार का विवरण और अन्य आवश्यक जानकारियां पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। सत्यापन के बाद विभाग द्वारा ट्रेड सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
सीहोर सहित पूरे प्रदेश में लागू
यह आदेश केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि सीहोर सहित पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया गया है। परिवहन विभाग ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नियम को लेकर जांच और निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
वाहन डीलरों पर पड़ेगा सीधा असर
सेकंड हैंड वाहन डीलरों के लिए यह नियम बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। अब बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के वाहन खरीदना या बेचना कानूनन गलत माना जाएगा। इससे उन डीलरों को परेशानी हो सकती है, जो अब तक अनौपचारिक तरीके से कारोबार कर रहे थे। हालांकि, लंबे समय में इससे संगठित और भरोसेमंद वाहन बाजार विकसित होने की उम्मीद है।
आम लोगों को क्या जानना जरूरी
जो लोग कभी-कभार अपना पुराना वाहन बेचते हैं, उनके लिए यह नियम सीधे तौर पर बाध्यकारी नहीं है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से वाहन खरीद-बिक्री करता है या इसे व्यापार के रूप में करता है, तो उसे ट्रेड सर्टिफिकेट लेना ही होगा। आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इससे उन्हें अधिक सुरक्षित और कानूनी तरीके से वाहन खरीदने का अवसर मिलेगा।
पारदर्शिता और सुरक्षा की दिशा में कदम
परिवहन विभाग का मानना है कि इस नियम से वाहन बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। हर वाहन की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा, जिससे चोरी के वाहनों की पहचान आसान होगी। साथ ही, टैक्स, बीमा और पंजीयन से जुड़े मामलों में भी गड़बड़ियों की संभावना कम होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई
नए आदेश के तहत यदि कोई व्यक्ति या डीलर बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, कारोबार पर रोक और अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं। विभाग ने साफ किया है कि नियमों का पालन न करने वालों को किसी भी स्थिति में राहत नहीं दी जाएगी।
भविष्य में और सख्ती के संकेत
परिवहन विभाग के संकेतों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में वाहन कारोबार से जुड़े नियम और भी सख्त हो सकते हैं। डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहन बाजार को पूरी तरह संगठित और सुरक्षित बनाना है।
निष्कर्ष
पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री के लिए ट्रेड सर्टिफिकेट अनिवार्य करने का फैसला एक बड़ा बदलाव है। यह कदम शुरुआत में कुछ लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को फायदा मिलेगा। नियमों की स्पष्टता और पारदर्शिता से वाहन बाजार में भरोसा बढ़ेगा और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
