महाराष्ट्र की राजनीति इस समय अपने सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर से गुजर रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल अजित पवार के असामयिक निधन ने न सिर्फ एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा किया है, बल्कि सत्ता, संगठन और परिवार तीनों स्तरों पर कई अहम सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इस दुखद घटना के बाद पूरे राज्य की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी, नेतृत्व की जिम्मेदारी कौन संभालेगा और क्या दोनों राष्ट्रवादी गुटों के विलय की प्रक्रिया अब पूरी हो पाएगी।

इन तमाम सवालों के बीच अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी है। ऐसे माहौल में पार्टी के वरिष्ठ नेता और शरद पवार गुट के प्रमुख शरद पवार की भूमिका, उनका अनुभव और उनके बयान बेहद अहम हो गए हैं।
अजित पवार का निधन और महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन
अजित पवार का निधन केवल एक व्यक्ति के जाने की घटना नहीं है, बल्कि यह उस नेतृत्व का अंत है जिसने बीते वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति को कई बार नई दिशा दी। उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका, संगठन के भीतर उनकी पकड़ और सत्ता के समीकरणों को साधने की उनकी क्षमता ने उन्हें पार्टी का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया था।
उनके जाने के बाद यह साफ हो गया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को न सिर्फ भावनात्मक क्षति हुई है, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी बड़े फैसले लेने की चुनौती सामने खड़ी हो गई है। पार्टी कार्यकर्ता, विधायक और समर्थक सभी यह जानना चाहते हैं कि अब आगे क्या होगा और कौन इस खालीपन को भरेगा।
सुनेत्रा पवार के नाम पर उठी चर्चाएं
अजित पवार के निधन के बाद जैसे ही शोक की पहली लहर थमी, राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार बन गईं। यह कयास लगाए जाने लगे कि पार्टी और सरकार उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है। समर्थकों का तर्क था कि यह न केवल अजित पवार के प्रति सम्मान होगा, बल्कि पार्टी की निरंतरता और स्थिरता भी बनाए रखेगा।
सुनेत्रा पवार का हाल ही में मुंबई स्थित आवास पर पहुंचना और पार्टी नेताओं की आवाजाही इन अटकलों को और बल देती नजर आई। इसी बीच 31 जनवरी को दोपहर दो बजे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाए जाने की खबर सामने आई, जिससे यह संकेत मिला कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस: चुप्पी टूटी, लेकिन स्पष्टता भी
इन तमाम चर्चाओं के बीच शरद पवार ने बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया के सवालों का जवाब दिया। उनका बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वे न सिर्फ पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं, बल्कि पवार परिवार के राजनीतिक मार्गदर्शक भी माने जाते हैं।
शरद पवार ने साफ शब्दों में कहा कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर उनके साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव उनके सामने नहीं आया है और न ही किसी ने उनसे इस बारे में कोई अनुरोध किया है। उनका कहना था कि इस तरह के फैसले पार्टी के स्तर पर होते हैं और फिलहाल उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
विलय की बातचीत पर शरद पवार का बड़ा खुलासा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शरद पवार ने दोनों राष्ट्रवादी गुटों के विलय को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों से दोनों गुटों के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही थी। इस बातचीत में अजित पवार और जयंत पाटिल प्रमुख भूमिका निभा रहे थे।
शरद पवार ने कहा कि 12 तारीख को इस विलय की घोषणा किए जाने की योजना थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अजित पवार की इच्छा थी कि दोनों राष्ट्रवादी गुट एक साथ आएं और यह उनकी अपनी भी इच्छा थी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब इस प्रक्रिया में एक तरह का ठहराव नजर आ रहा है।
बीजेपी की भूमिका पर उठे सवाल और शरद पवार का जवाब
जब शरद पवार से यह पूछा गया कि क्या अजित पवार की अनुपस्थिति में उनकी अगुआई वाली एनसीपी के फैसले अब बीजेपी ले रही है, तो उन्होंने इस पर कोई सीधा आरोप लगाने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और वे इस तरह की अटकलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विलय को लेकर जो बातचीत चल रही थी, उसका बीजेपी में शामिल होने से कोई लेना-देना नहीं था। इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों राष्ट्रवादी गुटों की बातचीत स्वतंत्र थी और किसी बाहरी दबाव में नहीं हो रही थी।
सु्प्रिया सुले और रोहित पवार को लेकर फैली अफवाहें
शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन चर्चाओं को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि सु्प्रिया सुले और रोहित पवार को मंत्री पद दिया जा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी कोई चर्चा पार्टी के भीतर नहीं हुई है।
उन्होंने दोहराया कि सुनेत्रा पवार के चयन या किसी भी बड़े पद को लेकर फैसला पार्टी ही करेगी और इस पर अंतिम निर्णय संगठनात्मक स्तर पर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान
इस पूरे घटनाक्रम पर जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने भी संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो भी फैसला लिया जाना है, वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ही लेना है। सरकार और उनकी पार्टी एनसीपी के हर फैसले के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि चाहे मामला अजित पवार के परिवार से जुड़ा हो या पार्टी से, सरकार हर तरह का सहयोग और समर्थन देने के लिए तैयार है। इस बयान को राजनीतिक स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।
विधायक दल की बैठक और शपथ ग्रहण की तैयारी
एनसीपी सांसद सुनील तटकरे ने बताया कि विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री को पत्र दिया जाएगा और उसके बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। हालांकि शोक की वजह से अब तक कोई औपचारिक पत्र जारी नहीं किया गया है।
वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने भी माना कि मीडिया और कई लोगों की ओर से यह मांग उठ रही है कि उपमुख्यमंत्री का पद सुनेत्रा पवार को दिया जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह मांग गलत है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी की बैठक में ही लिया जाएगा।
पवार परिवार की भूमिका और अंदरूनी चर्चाएं
इस मुद्दे पर शरद पवार गुट के नेता राजेश टोपे ने कहा कि पवार परिवार को एक साथ बैठकर शरद पवार के अनुभव का लाभ उठाते हुए सही फैसला लेना चाहिए। उनके अनुसार यह तय करना जरूरी है कि किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाए और पार्टी अध्यक्ष को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि यह एक सच्चाई है कि अजित पवार की अंतिम इच्छा दोनों एनसीपी गुटों को एक साथ लाने की थी।
प्रफुल्ल पटेल का नजरिया
राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि इस मुद्दे पर जितनी जल्दी हो सके फैसला लेना जरूरी है। उन्होंने माना कि अभी पार्टी राजनीतिक शोक की स्थिति में है और भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार के नाम पर अभी औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पार्टी की भावना और विधायकों की राय को ध्यान में रखकर सही निर्णय लिया जाना चाहिए।
उत्तराधिकारी की बहस और खुला समर्थन
अजित पवार गुट के नेता नरहरी जिरवाल ने अजित पवार को अंतिम विदाई देने के बाद सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया कि उनके उत्तराधिकारी सुनेत्रा पवार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी का मानना है कि अब सुनेत्रा पवार ही पार्टी की कमान संभालेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों राष्ट्रवादी गुट अब अलग नहीं हैं और आगे भी साथ रहेंगे। इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषण: आगे की राह कितनी कठिन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवार परिवार के बाहर से एनसीपी को चलाना बेहद मुश्किल होगा। अजित पवार पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा थे और उनकी जगह लेना आसान नहीं है। ऐसे में परिवार से जुड़ा कोई व्यक्ति ही पार्टी को एकजुट रख सकता है।
85 वर्षीय शरद पवार के लिए यह दौर उनकी राजनीति का सबसे चुनौतीपूर्ण समय माना जा रहा है। अनुभव, धैर्य और संतुलन ही वह हथियार हैं जिनसे वे इस संकट से पार्टी को बाहर निकाल सकते हैं।
निष्कर्ष: फैसला जो भविष्य तय करेगा
अजित पवार के बाद महाराष्ट्र की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां लिया गया हर फैसला दूरगामी असर डालेगा। विलय की प्रक्रिया, उपमुख्यमंत्री का चयन और नेतृत्व की जिम्मेदारी, ये सभी सवाल आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
अब यह देखना बाकी है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी किस रास्ते को चुनती है और क्या पवार परिवार एक बार फिर पार्टी को एकजुट रखने में सफल होता है।
