बांग्लादेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में एक नई और ऐतिहासिक घड़ी देखने को मिली है। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में दोषी करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने फांसी की सजा सुनाई है। यह निर्णय न केवल बांग्लादेश की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है।
शेख हसीना की यह पहली प्रतिक्रिया उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए अहम मानी जा रही है। उन्होंने आईसीटी के फैसले को पक्षपाती, राजनीतिक और अनिर्वाचित सरकार द्वारा संचालित न्यायाधिकरण का परिणाम करार दिया। शेख हसीना का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ लक्षित था, जबकि उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा किए गए अपराधों को अनदेखा किया गया।

शेख हसीना की प्रतिक्रिया: पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित न्यायाधिकार
शेख हसीना ने अपने बयान में कहा कि “मेरे खिलाफ सुनाए गए फैसले धांधली और राजनीतिक प्रेरणा से भरे हुए हैं। न्यायाधिकरण की स्थापना और अध्यक्षता एक अनिर्वाचित सरकार ने की है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है। इसके बावजूद इसने मुझे दोषी ठहराया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आईसीटी नामक यह न्यायाधिकरण न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और न ही निष्पक्ष। उनका कहना है कि अदालत ने केवल अवामी लीग के सदस्यों पर मुकदमा चलाया, जबकि देश में अन्य राजनीतिक दलों और विरोधियों द्वारा की गई हिंसा को नजरअंदाज किया गया। शेख हसीना ने इसे एक राजनीतिक बदले की योजना करार दिया और कहा कि उनका उद्देश्य अवामी लीग को कमजोर करना और उन्हें राजनीतिक रूप से निष्प्रभावी बनाना था।
मानवाधिकार और विकास के क्षेत्र में उपलब्धियां
शेख हसीना ने अपने शासनकाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने मानवाधिकारों, विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने 2010 में बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, म्यांमार में उत्पीड़न से भाग रहे लाखों रोहिंग्याओं को शरण दी, बिजली और शिक्षा तक पहुंच का विस्तार किया और 15 वर्षों में 450% GDP वृद्धि दर हासिल की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्य मानवाधिकारों और सामाजिक कल्याण के प्रति उदासीन नेतृत्व की बजाय देशहित में किया गया था।
आईसीटी द्वारा सुनाए गए पांच आरोप और सजा का एलान
इस फैसले से पहले, सोमवार को आईसीटी ने शेख हसीना और उनके पूर्व सहयोगियों पर पांच अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया। इसमें पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल मामून के खिलाफ भी मुकदमे चलाए गए। अदालत ने सभी मामलों में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष ने शेख हसीना पर आरोप लगाया कि उन्होंने जुलाई 2023 में छात्र आंदोलनों को कुचलने के लिए कार्रवाई की और इस दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। अभियोजन का कहना है कि शेख हसीना इस हिंसा के मास्टरमाइंड थीं और उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं शेख हसीना और उनके समर्थक दावा करते हैं कि ये मुकदमे राजनीतिक प्रतिशोध के तहत चलाए गए।
बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
शेख हसीना की फांसी की सजा के बाद बांग्लादेश में तनावपूर्ण माहौल है। अवामी लीग ने बंद का ऐलान किया है और राजधानी तथा अन्य महत्वपूर्ण शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फैसले से देश में नागरिक अशांति बढ़ सकती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस निर्णय की गहन निगरानी कर रहा है।
देश के विभिन्न हिस्सों में समर्थकों और विरोधियों के बीच मतभेद स्पष्ट हैं। शेख हसीना के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन मान रहे हैं, जबकि आलोचक इसे न्याय और कानून का पालन करार दे रहे हैं।
शेख हसीना का राजनीतिक सफर और ऐतिहासिक संदर्भ
शेख हसीना का राजनीतिक जीवन संघर्ष और विवादों से भरा रहा है। उनके पिता की हत्या, निर्वासन और देश लौटने पर प्रतिबंध जैसे घटनाक्रम उनके जीवन का हिस्सा रहे। उन्होंने अवामी लीग के माध्यम से देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक सुधार तथा आर्थिक विकास के लिए कई योजनाओं की नींव रखी।
उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की। ऐसे में आईसीटी का फैसला और उस पर उनका विरोध राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से व्यापक बहस का विषय बना है।
भविष्य की संभावनाएं और अंतरराष्ट्रीय नजर
इस फैसले के बाद बांग्लादेश की राजनीति और सरकार की स्थिरता पर प्रश्न उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, राजनीतिक दल और मीडिया इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं। शेख हसीना का कहना है कि वे मानवाधिकारों और लोकतंत्र के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगी।
बांग्लादेश के नागरिक, राजनीतिक विश्लेषक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस फैसले की प्रतिक्रियाओं को लेकर सतर्क हैं। देश में तनाव, विरोध और सुरक्षा चुनौती के बीच यह निर्णय न केवल देश की राजनीति बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।
