भारत में बचत की परंपरा बहुत पुरानी है। आम परिवारों के लिए डाकघर और सरकार समर्थित छोटी बचत योजनाएं न सिर्फ सुरक्षित निवेश का जरिया रही हैं, बल्कि भविष्य की वित्तीय सुरक्षा की मजबूत नींव भी रही हैं। जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, शेयर बाजार में अनिश्चितता होती है और ब्याज दरों में बदलाव की चर्चा तेज होती है, तब आम निवेशक की नजर सबसे पहले इन्हीं छोटी बचत योजनाओं पर जाती है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी योजनाएं वर्षों से भरोसे का नाम बनी हुई हैं।

नए साल की दहलीज पर खड़े निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक था कि जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के लिए इन योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव होगा या नहीं। सरकार ने अब इस पर तस्वीर साफ कर दी है और मार्च तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है।
मार्च तिमाही के लिए सरकार का फैसला
सरकार ने जनवरी से मार्च 2026 की अवधि के लिए डाकघर की लगभग दर्जन भर छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को पहले जैसा ही बनाए रखने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि पीपीएफ से लेकर सुकन्या समृद्धि योजना तक, सभी प्रमुख स्कीम्स पर निवेशकों को वही रिटर्न मिलता रहेगा, जो उन्हें पिछली तिमाही में मिल रहा था।
यह लगातार आठवीं तिमाही है, जब सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बीते एक साल के दौरान रिजर्व बैंक ने अपनी मुख्य उधारी दर यानी रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। आमतौर पर रेपो रेट में कटौती का असर बैंक जमा और कर्ज की ब्याज दरों पर देखने को मिलता है, लेकिन इसके बावजूद छोटी बचत योजनाओं की दरों को स्थिर रखा गया है।
ब्याज दरें तय करने के पीछे सरकार की सोच
छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें तय करना सरकार के लिए एक संतुलन साधने जैसा काम होता है। एक तरफ निवेशकों को आकर्षक और सुरक्षित रिटर्न देना होता है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे पर भी नजर रखनी पड़ती है।
इन योजनाओं की ब्याज दरें तय करते समय सरकार आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाली अनुमानित कमाई को आधार बनाती है। इन प्रतिभूतियों की अवधि भी छोटी बचत योजनाओं के समान होती है। हाल के महीनों में सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाला रिटर्न घटा है, जिसका सीधा असर ब्याज दरों के फैसले पर पड़ता है।
इसके बावजूद सरकार ने निवेशकों के हित को ध्यान में रखते हुए दरों को स्थिर रखा है, ताकि आम लोगों की बचत पर अचानक नकारात्मक असर न पड़े।
सुकन्या समृद्धि योजना का आकर्षण बरकरार
बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना आज भी छोटी बचत योजनाओं में सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली स्कीम बनी हुई है। मार्च तिमाही के लिए इस योजना पर 8.2 प्रतिशत की ब्याज दर को बरकरार रखा गया है।
इस योजना की लोकप्रियता का कारण सिर्फ ऊंची ब्याज दर ही नहीं है, बल्कि लंबी अवधि में मिलने वाला सुरक्षित और कर-मुक्त रिटर्न भी है। माता-पिता के लिए यह योजना बेटी की पढ़ाई और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए एक भरोसेमंद साधन बन चुकी है।
पीपीएफ: टैक्स बचत और सुरक्षा का भरोसा
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ मध्यम वर्ग के निवेशकों की सबसे पसंदीदा योजनाओं में से एक है। मार्च तिमाही के लिए पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत ब्याज दर पहले की तरह जारी रहेगी।
पीपीएफ की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और टैक्स छूट है। इसमें किया गया निवेश टैक्स बचाने में मदद करता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी कर-मुक्त होती है। यही वजह है कि ब्याज दर स्थिर रहने के बावजूद निवेशकों का भरोसा इस योजना पर बना हुआ है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम उन लोगों के लिए बनाई गई है, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहते हैं। इस योजना पर 8.2 प्रतिशत की ब्याज दर को मार्च तिमाही के लिए स्थिर रखा गया है।
महंगाई के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह योजना एक बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि बैंक एफडी की तुलना में इसमें बेहतर रिटर्न और सरकारी गारंटी मिलती है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी एनएससी पर 7.7 प्रतिशत ब्याज दर पहले की तरह जारी रहेगी। यह योजना उन निवेशकों के बीच लोकप्रिय है, जो सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स लाभ भी चाहते हैं।
वहीं किसान विकास पत्र पर 7.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। यह ब्याज 115 महीने की निवेश अवधि के लिए तय किया गया है। यह योजना उन लोगों को पसंद आती है, जो एक निश्चित समय में अपनी राशि को दोगुना करने का लक्ष्य रखते हैं।
पोस्ट ऑफिस जमा योजनाओं की स्थिति
डाकघर की सेविंग्स डिपॉजिट पर 4 प्रतिशत ब्याज दर जारी रहेगी। एक साल की टाइम डिपॉजिट पर 6.9 प्रतिशत, दो साल की जमा पर 7 प्रतिशत, तीन साल की जमा पर 7.1 प्रतिशत और पांच साल की जमा पर 7.5 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा।
पांच साल की रिकरिंग डिपॉजिट पर 6.7 प्रतिशत और मंथली इनकम अकाउंट स्कीम पर 7.4 प्रतिशत ब्याज दर को भी स्थिर रखा गया है। ये योजनाएं खासतौर पर उन निवेशकों के लिए उपयोगी हैं, जो नियमित बचत और निश्चित मासिक आय चाहते हैं।
रेपो रेट में कटौती के बावजूद बदलाव क्यों नहीं
बीते एक साल में रिजर्व बैंक ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में कई बार कटौती की है। आमतौर पर इसका असर बैंक लोन और एफडी की ब्याज दरों पर दिखता है। कई बैंकों ने अपनी एफडी दरों में भी कमी की है।
इसके बावजूद सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि इन योजनाओं में निवेश करने वाला वर्ग आमतौर पर जोखिम से बचना चाहता है और स्थिर रिटर्न को प्राथमिकता देता है। अगर दरों में अचानक कटौती होती, तो इसका सीधा असर करोड़ों निवेशकों पर पड़ता।
सरकार इन पैसों का क्या करती है
छोटी बचत योजनाओं से जुटाई गई राशि सरकार के लिए एक अहम वित्तीय स्रोत होती है। इस पैसे का इस्तेमाल सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने और विकास से जुड़ी जरूरतों के लिए करती है।
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 में नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड से करीब 3.43 लाख करोड़ रुपये जुटाने का है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 4.12 लाख करोड़ रुपये से कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अपने वित्तीय प्रबंधन में संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में अपने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल 4.8 प्रतिशत था।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला
ब्याज दरों के स्थिर रहने का मतलब यह है कि निवेशक अपनी मौजूदा वित्तीय योजना में किसी बड़े बदलाव की जरूरत महसूस नहीं करेंगे। जिन लोगों ने पहले से इन योजनाओं में निवेश कर रखा है, उन्हें अपने रिटर्न को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं होगी।
वहीं नए निवेशकों के लिए भी यह स्थिति स्पष्टता लेकर आई है। वे यह जानते हुए निवेश कर सकते हैं कि मार्च 2026 तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।
निष्कर्ष
मार्च तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर रखने का सरकार का फैसला आर्थिक स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है। रेपो रेट में कटौती और बाजार की बदलती परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने इन योजनाओं को सुरक्षित और आकर्षक बनाए रखा है। यह फैसला खासतौर पर उन करोड़ों लोगों के लिए राहत भरा है, जो अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित हाथों में रखना चाहते हैं।
