फिल्मी दुनिया में कई बार ऐसा होता है कि कोई एक फिल्म न सिर्फ दर्शकों का दिल जीत लेती है, बल्कि उन कलाकारों के भीतर भी भावनाओं का तूफान ले आती है, जो खुद सिनेमा का लंबा सफर तय कर चुके होते हैं। रणवीर सिंह और सारा अर्जुन स्टारर फिल्म धुरंधर ने ठीक यही असर किया है। जहां एक ओर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त चर्चा में है और समीक्षकों से लेकर आम दर्शकों तक की तारीफें बटोर रही है, वहीं दूसरी ओर इस फिल्म को देखने के बाद बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी के मन में एक गहरा अफसोस घर कर गया।

यह अफसोस किसी असफलता का नहीं है, बल्कि उस मौके का है जो कभी उनकी जिंदगी में आया था, लेकिन वक्त और परिस्थितियों के चलते हकीकत में बदल नहीं सका। सुनील शेट्टी ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि धुरंधर देखने के बाद उन्हें आदित्य धर के साथ अधूरी रह गई एक फिल्म की याद आ गई, जिसे लेकर आज भी उनके मन में कसक है।
धुरंधर की गूंज और हर तरफ तारीफों का शोर
धुरंधर रिलीज के बाद से ही चर्चा में है। रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस, सारा अर्जुन की सधी हुई एक्टिंग और आदित्य धर का सशक्त निर्देशन इस फिल्म को खास बनाता है। कहानी, संवाद और सिनेमैटोग्राफी ने मिलकर इसे एक ऐसी फिल्म बना दिया है, जिसे सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि महसूस किया जा रहा है।
इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि आदित्य धर केवल एक सफल निर्देशक नहीं हैं, बल्कि वह ऐसे कहानीकार भी हैं जो किरदारों की आत्मा तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि धुरंधर को देखने के बाद कई कलाकारों ने खुलकर इसकी सराहना की, लेकिन सुनील शेट्टी की प्रतिक्रिया सबसे अलग रही।
सुनील शेट्टी का अफसोस: जब तारीफ के साथ जुड़ा दर्द
सुनील शेट्टी ने एक खास बातचीत में बताया कि धुरंधर देखने के बाद उन्हें बेहद गर्व भी हुआ और उतना ही अफसोस भी। गर्व इसलिए कि इंडस्ट्री में इस स्तर का काम हो रहा है और अफसोस इसलिए कि कभी वह खुद आदित्य धर की एक फिल्म का हिस्सा बनने वाले थे, लेकिन वह फिल्म बन ही नहीं पाई।
उन्होंने स्वीकार किया कि जब उन्होंने धुरंधर देखी, तो उन्हें लगा कि अगर वह उस अधूरी फिल्म का हिस्सा होते, तो शायद उनके करियर का एक बेहद खास अध्याय बन सकता था। यह अफसोस किसी शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि एक कलाकार के दिल से निकली ईमानदार भावना के रूप में सामने आया।
आदित्य धर से किया फोन पर दिल से संवाद
सुनील शेट्टी ने यह भी बताया कि फिल्म देखने के बाद उन्होंने आदित्य धर को फोन किया। यह कॉल औपचारिक नहीं थी, बल्कि दिल से निकली तारीफ और भावनाओं से भरी हुई थी। उन्होंने आदित्य धर से कहा कि धुरंधर जैसी फिल्म बनाना आसान नहीं होता और यह फिल्म लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने उस अधूरी फिल्म का जिक्र भी किया, जिसे लेकर कभी दोनों के बीच चर्चा हुई थी। सुनील शेट्टी ने यह माना कि कुछ सपने समय पर पूरे नहीं हो पाते, लेकिन जब आप किसी कलाकार का काम देखते हैं, तो वह पुराने जख्मों को भी ताजा कर देता है।
जब एक फिल्म बनते-बनते रह गई थी अधूरी
सुनील शेट्टी ने ज्यादा विस्तार में उस फिल्म की कहानी नहीं बताई, लेकिन इतना जरूर कहा कि वह प्रोजेक्ट उन्हें बेहद पसंद आया था। स्क्रिप्ट में दम था, किरदार मजबूत थे और निर्देशन की सोच अलग स्तर की थी। लेकिन किसी वजह से वह फिल्म फ्लोर पर नहीं आ सकी।
बॉलीवुड में ऐसे कई प्रोजेक्ट्स होते हैं, जो कागज पर तो शानदार होते हैं, लेकिन हालात, टाइमिंग और प्रोडक्शन से जुड़ी चुनौतियों के कारण बन नहीं पाते। सुनील शेट्टी का यह अफसोस भी उसी सच्चाई को उजागर करता है।
सुनील शेट्टी की ईमानदारी और कलाकार का दर्द
सुनील शेट्टी उन अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की हैं। एक्शन से लेकर इमोशनल और गंभीर किरदारों तक, उन्होंने हर भूमिका में अपनी छाप छोड़ी है। ऐसे अभिनेता का यह कहना कि उन्हें किसी फिल्म का हिस्सा न बन पाने का अफसोस है, उनके भीतर के कलाकार की संवेदनशीलता को दिखाता है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि यह अफसोस किसी पछतावे से ज्यादा एक सीख है। हर कलाकार चाहता है कि वह अच्छे निर्देशकों और दमदार कहानियों का हिस्सा बने, लेकिन हर बार यह संभव नहीं हो पाता।
रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस ने क्यों किया प्रभावित
सुनील शेट्टी ने धुरंधर में रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने माना कि रणवीर ने इस फिल्म में खुद को पूरी तरह किरदार के हवाले कर दिया है। यही वजह है कि फिल्म देखते समय कहीं भी बनावट महसूस नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि रणवीर जैसे कलाकारों के साथ आदित्य धर जैसे निर्देशक का मेल सिनेमा के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि यही संयोजन दर्शकों को कुछ नया और यादगार देता है।
सारा अर्जुन और सह कलाकारों की भूमिका
धुरंधर में सारा अर्जुन की भूमिका को भी सराहा गया है। सुनील शेट्टी का मानना है कि सारा ने अपने किरदार में जो गहराई दिखाई है, वह फिल्म की भावनात्मक ताकत को और बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकार फिल्म को संतुलन देते हैं और कहानी को मजबूती प्रदान करते हैं।
एक फिल्म, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करती
धुरंधर को लेकर यह कहा जा रहा है कि यह सिर्फ एक कमर्शियल फिल्म नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। शायद यही वजह है कि सुनील शेट्टी जैसे अनुभवी कलाकार भी इससे भावनात्मक रूप से जुड़ गए।
उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो आपको सिर्फ दो घंटे के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक अपने साथ रखती हैं। धुरंधर उनके लिए ऐसी ही फिल्म साबित हुई।
करियर के इस मोड़ पर भी सीखने की चाह
सुनील शेट्टी ने यह भी कहा कि इतने सालों के अनुभव के बाद भी वह खुद को सीखने वाला कलाकार मानते हैं। जब वह आदित्य धर जैसे निर्देशकों का काम देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि सिनेमा में अभी भी बहुत कुछ नया किया जा सकता है।
उनका यह बयान युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है कि उम्र या अनुभव चाहे जितना भी हो, सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।
अफसोस, लेकिन संतोष भी
हालांकि सुनील शेट्टी ने अफसोस जाहिर किया, लेकिन उनके शब्दों में संतोष भी झलकता है। संतोष इस बात का कि वह एक ऐसे दौर का हिस्सा हैं, जहां अच्छी कहानियां बन रही हैं और सिनेमा लगातार खुद को बेहतर कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह उस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए, तो भी उन्हें खुशी है कि आदित्य धर जैसे निर्देशक इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और शानदार काम कर रहे हैं।
धुरंधर का असर लंबे समय तक रहेगा
धुरंधर ने यह साबित कर दिया है कि एक मजबूत कहानी और सच्ची भावनाएं किसी भी स्टारडम से बड़ी होती हैं। यही वजह है कि यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि कलाकारों के दिलों में भी जगह बना रही है।
सुनील शेट्टी का अफसोस इस बात का प्रमाण है कि सिनेमा सिर्फ दर्शकों को ही नहीं, बल्कि खुद कलाकारों को भी प्रभावित करता है।
