भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के तिमाही नतीजों ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच व्यापक चर्चा छेड़ दी है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजों में कंपनी के मुनाफे में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कर पश्चात लाभ में 13.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर 10,657 करोड़ रुपये रह गया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में काफी कम है।

हालांकि, मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों को राहत देते हुए प्रति शेयर 57 रुपये के कुल डिविडेंड की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक आईटी सेक्टर मंदी, लागत दबाव और क्लाइंट खर्च में कटौती जैसे कई चुनौतियों से जूझ रहा है।
तीसरी तिमाही के नतीजों की पूरी तस्वीर
तीसरी तिमाही के नतीजों में यह साफ दिखाई देता है कि टीसीएस को लाभ के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ा है। कंपनी का समेकित नेट प्रॉफिट, जो सीधे तौर पर शेयरधारकों को देय होता है, सालाना आधार पर 13.9 प्रतिशत घट गया। इसके पीछे प्रमुख कारण वैश्विक बाजारों में आईटी खर्च में सुस्ती, नए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार में कमी और परिचालन लागत में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।
हालांकि, राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने पूरी तरह निराश नहीं किया। टीसीएस के रेवेन्यू में सिंगल डिजिट की ग्रोथ दर्ज की गई है, जो यह संकेत देती है कि कंपनी का कारोबार अभी भी विस्तार की राह पर है, भले ही उसकी गति धीमी हो गई हो। यह स्थिति बताती है कि कंपनी ने चुनौतीपूर्ण माहौल में भी अपने क्लाइंट बेस और डिलीवरी क्षमताओं को बनाए रखा है।
डिविडेंड से निवेशकों को बड़ी राहत
मुनाफे में गिरावट के बावजूद टीसीएस ने अपने निवेशकों को निराश नहीं किया। कंपनी के निदेशक मंडल ने प्रति शेयर कुल 57 रुपये के डिविडेंड की घोषणा की है। इसमें 11 रुपये का अंतरिम डिविडेंड और 46 रुपये का विशेष डिविडेंड शामिल है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि कंपनी के पास मजबूत नकदी स्थिति है और वह अपने शेयरधारकों को लगातार रिटर्न देने के प्रति प्रतिबद्ध है।
डिविडेंड की यह राशि उन निवेशकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से टीसीएस के शेयरों में निवेश किए हुए हैं और नियमित आय की उम्मीद रखते हैं। कमजोर वैश्विक माहौल के बीच इतना बड़ा डिविडेंड यह दर्शाता है कि कंपनी भविष्य को लेकर आश्वस्त है और अपने वित्तीय संतुलन को लेकर आशंकित नहीं है।
रिकॉर्ड डेट और निवेशकों की नजर
डिविडेंड की घोषणा के साथ ही निवेशकों की नजर रिकॉर्ड डेट पर टिक गई है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि किन शेयरधारकों को डिविडेंड का लाभ मिलेगा। हालांकि, कंपनी की ओर से रिकॉर्ड डेट को लेकर अलग से जानकारी दी जाएगी, लेकिन निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे समय रहते अपने निवेश की स्थिति को स्पष्ट कर लें।
शेयर बाजार में टीसीएस के शेयर हमेशा से निवेशकों के भरोसे का प्रतीक रहे हैं। डिविडेंड की घोषणा के बाद बाजार में शेयर की चाल पर भी खास नजर रखी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे फैसलों का सीधा असर शेयर प्राइस पर देखने को मिलता है।
मुनाफे में गिरावट के पीछे के कारण
टीसीएस के मुनाफे में आई गिरावट को केवल एक तिमाही की समस्या के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह वैश्विक आईटी इंडस्ट्री की मौजूदा चुनौतियों का प्रतिबिंब है। अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में कंपनियां आईटी खर्च को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। कई क्लाइंट्स नए प्रोजेक्ट्स को टाल रहे हैं या उनके बजट में कटौती कर रहे हैं।
इसके अलावा, कर्मचारियों की लागत, वेतन वृद्धि और परिचालन खर्च भी मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद टीसीएस ने अपनी डिलीवरी क्वालिटी और क्लाइंट रिलेशनशिप को बनाए रखा है, जो लंबे समय में कंपनी के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।
टीसीएस की दीर्घकालिक रणनीति
मौजूदा तिमाही के आंकड़े भले ही निराशाजनक लगें, लेकिन टीसीएस की दीर्घकालिक रणनीति पर नजर डालें तो कंपनी अभी भी मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में कंपनी लगातार निवेश कर रही है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें आने वाले वर्षों में मांग बढ़ने की पूरी संभावना है।
टीसीएस का फोकस केवल तात्कालिक मुनाफे पर नहीं, बल्कि स्थायी विकास पर है। यही कारण है कि कंपनी ने कठिन समय में भी डिविडेंड देने का फैसला किया है, ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।
बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया
नतीजों के बाद बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक ओर मुनाफे में गिरावट ने चिंता बढ़ाई, वहीं दूसरी ओर डिविडेंड की बड़ी घोषणा ने निवेशकों को राहत दी। विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकाल में शेयर पर दबाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए टीसीएस अब भी एक मजबूत विकल्प बना हुआ है।
आईटी सेक्टर के जानकारों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक आर्थिक हालात में सुधार होगा, टीसीएस जैसी कंपनियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। तब तक कंपनी का मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर डिविडेंड नीति निवेशकों के लिए सहारा बनी रहेगी।
निष्कर्ष
टीसीएस के तीसरी तिमाही के नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि कंपनी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है, लेकिन उसकी बुनियाद मजबूत है। मुनाफे में गिरावट के बावजूद डिविडेंड की बड़ी घोषणा इस बात का प्रमाण है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को प्राथमिकता देती है। आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति और कंपनी की रणनीतिक पहलें यह तय करेंगी कि टीसीएस कितनी तेजी से इस दबाव से बाहर निकल पाती है।
