भारतीय रेल लोगों की यात्रा का सबसे भरोसेमंद और किफायती साधन मानी जाती है। वर्षों से यात्री ट्रेन में सफर करते हुए भोजन की सीमित वैरायटी, कम गुणवत्ता और सीमित विकल्पों की परेशानी झेलते आए हैं। यात्रा के दौरान स्टेशन पर उतरकर जल्दी-जल्दी खाना खरीदना, ठेला-खोमचे पर बिक रहे स्ट्रीट फूड से समझौता करना या फिर घर से लाया भोजन खत्म होने पर भूखे रहने जैसी स्थितियां आम थीं। लेकिन समय बदल रहा है। अब ट्रेन यात्रा केवल सफर भर नहीं, बल्कि आरामदायक अनुभव की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में यात्रियों को भोजन के विकल्पों में भी बड़ा परिवर्तन मिलने जा रहा है।

भोपाल सहित मध्यप्रदेश के कई प्रमुख स्टेशनों पर 15 दिसंबर से एक ऐसी सुविधा शुरू हो गई है, जिसने ट्रेन यात्रा के दौरान भोजन के विकल्पों को अप्रत्याशित रूप से विस्तारित कर दिया है। यात्रियों को अब न सिर्फ खाना मिलेगा, बल्कि उस खाने में स्वाद, ब्रांड, गुणवत्ता और बहुआयामी चुनाव की स्वतंत्रता भी मिलेगी।
ई-कैटरिंग की नई व्यवस्था—भोजन आपके सीट नंबर तक
आईआरसीटीसी ने कुछ वर्ष पूर्व ई-कैटरिंग की शुरुआत की थी, लेकिन उसमें केवल सीमित शहरों और चुनिंदा व्यंजनों तक ही सुविधा उपलब्ध थी। अब यह सेवा और मजबूत होते हुए एक नए रूप में सामने आई है।
भोपाल, इटारसी और संत हृदयराम नगर (अमृत भारत स्टेशन) पर यात्रियों को बड़े ब्रांड्स से खाना ऑर्डर करने की सुविधा मिल रही है।
यह सुविधा पूरी तरह डिजिटल होगी और यात्री को न ट्रेन से उतरना पड़ेगा, न ही बीच रास्ते या प्लेटफॉर्म पर भोजन खोजने के लिए भागना पड़ेगा।
बस सीट पर बैठे-बैठे मोबाइल में कोड डालें, भोजन चुनें, भुगतान करें और खाना सीधे सीट पर मिलेगा।
कौन-कौन से विकल्प?—फास्ट फूड से लेकर कंटिनेंटल तक
यह बदलाव सिर्फ साधारण मेन्यू विस्तार नहीं है, बल्कि यात्रियों की पसंद और नए दौर की भोजन शैली के अनुरूप सुविधाओं का विकास है।
अब ट्रेन में सफर करते हुए यात्री निम्न लोकप्रिय वस्तुओं को ऑर्डर कर पाएंगे—
- बड़े ब्रांड का पिज़्ज़ा
- बर्गर
- कंटिनेंटल डिशेज
- फ्रेंच फ्राइज़
- पास्ता
- नूडल्स
- चाट
- मिनरल वॉटर
- सॉफ्ट ड्रिंक्स
- डेज़र्ट
- रैप्स
- भोजन के सामान्य भारतीय विकल्प
भोजन तैयारी में अत्याधुनिक पैकिंग, हाइजीन, तापमान संरक्षित डिलीवरी और रियल टाइम ट्रैकिंग दी जाएगी।
यात्रियों को मिलेगा आत्मविश्वास—बिना झंझट भोजन
यात्रा अनुभव कई बार भोजन की कमी के कारण बिगड़ जाता है। नई सुविधा कई स्तरों पर राहत देती है:
- समय और मेहनत बचती है
उतरकर भोजन तलाशने की आवश्यकता समाप्त। - सुरक्षित और स्वच्छ भोजन
आईआरसीटीसी द्वारा प्रमाणित विक्रेताओं से भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। - खाने की गुणवत्ता में सटीक नियंत्रण
यदि किसी को गुणवत्ता में कमी लगे तो ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है। - बच्चों और बुजुर्गों के लिए बड़ी मदद
खाना सीट पर आ जाने से बड़ी समस्या हल हो जाती है।
तकनीक से जुड़ी प्रक्रिया—सब होगा डिजिटल
यात्री को नीचे दिए चरण पूरे करने होंगे—
- पीएनआर डालना
- ट्रेन चयन
- स्टेशन चयन
- उपलब्ध रेस्टोरेंट से भोजन चयन
- भुगतान
भुगतान विकल्प—
- यूपीआई
- कार्ड
- नेट बैंकिंग
- कैश ऑन डिलीवरी (चयनित रूट्स में)
मध्यप्रदेश को क्यों चुना गया अग्रणी मॉडल?
भोपाल और इटारसी लंबे समय से बड़े जंक्शन हैं। यहां प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। रेलवे का मानना है कि—
- यात्री संख्या अधिक
- ब्रांड्स की उपलब्धता
- भोजन विक्रेताओं की विविधता
- ट्रेनों की इंटरकनेक्टिविटी
इन बिंदुओं के आधार पर यह तीन स्टेशन बड़े प्रोजेक्ट पॉइंट बने।
यात्रा अनुभव बनेगा यादगार
अब सफर में छोटा बच्चा पिज़्ज़ा मांग ले, तो परेशानी नहीं। दोस्तों का ग्रुप हो तो बर्गर पार्टी सीट पर ही। ऑफिस मीटिंग पर जा रहे यात्री डाइट आधारित कंटिनेंटल भी ले सकेंगे।
रेलवे यात्रियों के लिए यह परिवर्तन आने वाले समय में व्यापक प्रयोग के रूप में उभरेगा।
