अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपनी नजरें गढ़ा दी हैं। यह आर्कटिक में स्थित डेनमार्क का स्वायत्तशासी क्षेत्र है, जिसकी आबादी लगभग 57,000 है। खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध यह द्वीप अमेरिकी प्रशासन के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। ट्रंप ने इसे हथियाने के लिए एक चार स्टेप प्लान तैयार किया है, जिसका पहला चरण पहले ही शुरू हो चुका है। इस योजना का उद्देश्य ग्रीनलैंड को आर्थिक और राजनीतिक रूप से अमेरिकी प्रभाव में लाना है।

ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व
ग्रीनलैंड आर्कटिक महासागर में स्थित है और इसके प्राकृतिक संसाधनों में दुर्लभ खनिज, तेल और गैस शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन इसे केवल भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि इस इलाके पर अमेरिका का कब्जा करना तकनीकी रूप से आसान है क्योंकि यहां सुरक्षा संरचना सीमित है।
चार स्टेप प्लान की रूपरेखा
ट्रंप की योजना चार चरणों में विभाजित है। पहला चरण ग्रीनलैंड के लोगों को प्रभावित करना है। इसके तहत अमेरिका द्वीपवासियों के बीच स्वतंत्रता और स्वायत्तता के विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए रणनीति बना रहा है। दूसरा चरण डेनमार्क के साथ बातचीत के जरिए द्वीप को सौदे के माध्यम से हासिल करना है। तीसरा चरण यूरोपीय सहयोगियों को अपने पक्ष में करना है। और चौथा विकल्प सैन्य कब्जा है, जिसे लागू करने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी सेना को तैयार रखा है।
पहला चरण: ग्रीनलैंडवासियों को प्रभावित करना
रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने पिछले साल राष्ट्रपति पद संभालते ही ग्रीनलैंडवासियों को स्वतंत्रता की संभावनाओं के बारे में प्रभावित करना शुरू किया था। यह रणनीति अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने और डेनमार्क के नियंत्रण को कमजोर करने की दिशा में पहला कदम है। 2025 में किए गए एक सर्वेक्षण में 56 प्रतिशत ग्रीनलैंडवासियों ने स्वतंत्रता के पक्ष में वोट करने की इच्छा जताई थी, जबकि 28 प्रतिशत ने डेनमार्क के तहत बने रहने का समर्थन किया।
दूसरा चरण: डेनमार्क के साथ आर्थिक और कूटनीतिक समझौता
ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ग्रीनलैंड को हथियाने के लिए डेनमार्क के साथ किसी वित्तीय डील या समझौते को अंजाम दिया जाए। इस स्थिति में द्वीप को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सकती है। हालांकि डेनमार्क ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी कब्जे का विरोध करेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की डेनमार्क की प्रधानमंत्री से मुलाकात इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तीसरा चरण: यूरोप को प्रभावित करना
ट्रंप की योजना में तीसरा कदम यूरोपीय सहयोगियों को अमेरिका के पक्ष में करना है। इसके लिए ट्रंप संभावित तौर पर यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का दांव खेल सकते हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि यूरोपीय सहयोगियों को ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के पक्ष में लाना होगा। ट्रंप का यह कदम कूटनीतिक दबाव और वैश्विक रणनीति का हिस्सा है।
चौथा चरण: सैन्य विकल्प
यदि पहले तीन चरणों में सफलता नहीं मिलती, तो ट्रंप ने सैन्य कब्जे का विकल्प रखा है। ग्रीनलैंड के सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, द्वीप पर सैन्य कब्जा केवल 30 मिनट से भी कम समय में किया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे लागू करने के लिए अपनी सेना तैयार रखी है। वाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कोई भी अमेरिका से नहीं लड़ सकता।
ग्रीनलैंड के लोग और स्वतंत्रता की संभावनाएं
ग्रीनलैंड को वर्तमान में कोई भी अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर करने से पहले डेनमार्क की अनुमति लेनी पड़ती है। ट्रंप का उद्देश्य है कि ग्रीनलैंडवासियों को स्वतंत्रता की दिशा में प्रेरित किया जाए ताकि वे डेनमार्क से अलग होने के लिए रेफरेंडम में हिस्सा लें। अगर ग्रीनलैंड स्वतंत्र होता है, तो यह अमेरिकी प्रभाव के अंतर्गत अधिक काम कर सकेगा।
अमेरिकी दृष्टिकोण और रणनीति
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ग्रीनलैंड का अमेरिकी नियंत्रण भू-राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। खनिज, तेल और गैस संसाधनों के अलावा यह आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक रूप से अमेरिका की स्थिति को मजबूत करेगा। वाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए तैयार है, लेकिन सैन्य विकल्प हमेशा मौजूद रहेगा।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
इस योजना के वैश्विक प्रभाव व्यापक हैं। डेनमार्क ने पहले ही विरोध जताया है। यूरोपीय संघ और आर्कटिक परिषद इस कदम पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रीनलैंडवासियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उनका समर्थन या विरोध अमेरिकी रणनीति की सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना अमेरिकी भू-राजनीति का एक नया और विवादित अध्याय है। चार चरणों की रणनीति, डेनमार्क और यूरोपीय सहयोगियों के साथ बातचीत, और सैन्य विकल्प इसे एक बहुस्तरीय योजना बनाते हैं। अगर यह योजना सफल होती है, तो अमेरिका का आर्कटिक क्षेत्र में प्रभाव और बढ़ सकता है और ग्रीनलैंड अमेरिकी रणनीतिक महत्व के केंद्र में आ जाएगा।
