अमेरिकी राजनीति एक बार फिर वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुकी है। राष्ट्रपति पद पर वापसी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह यूक्रेन युद्ध को लेकर सख़्त और आक्रामक स्टैंड लिया है, उसने न केवल यूरोप में चिंता बढ़ा दी है बल्कि व्हाइट हाउस और पेंटागन के भीतर भी गहरी खलबली मचा दी है। यूक्रेन को दी जा रही आर्थिक और सैन्य मदद को लेकर ट्रंप प्रशासन का बदलता रुख दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है — अमेरिका अब वैश्विक “पुलिस” की भूमिका में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।

अमेरिका की थकी हुई जनता — युद्ध पर खर्च नहीं पसंद
पिछले दो वर्षों में यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका 100 बिलियन डॉलर से अधिक की सहायता दे चुका है। लेकिन अमेरिकी नागरिकों का एक बड़ा वर्ग पूछ रहा है— “हमारी अपनी सीमाओं और आर्थिक संकट का क्या?”
ट्रंप इसी जनभावना को अपनी नीतियों की नींव बना रहे हैं। उनकी रणनीति साफ है:
“अमेरिका फर्स्ट — हर स्थिति में, हर मोर्चे पर।”
यही सोच अब अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर भारी पड़ने लगी है।
ट्रंप का अल्टीमेटम — ‘यूक्रेन को खाली चेक नहीं’
ट्रंप ने कांग्रेस और नाटो सदस्य देशों के सामने एक स्पष्ट संदेश दिया है:
- जब तक यूरोप अधिक योगदान नहीं करेगा, अमेरिका मदद कम करेगा या रोक देगा।
- यूक्रेन को हर सहायता के बदले स्पष्ट परिणाम चाहिए।
- रूस से युद्ध को जल्द समाप्त करने का रास्ता निकालो।
ट्रंप का मत है कि बाइडन सरकार यूक्रेन को “अनियंत्रित सहायता” देकर अमेरिका की अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रही है।
यूक्रेन पर दबाव — वॉशिंगटन की भाषा बदल चुकी है
कीव को जो संकेत भेजे जा रहे हैं—
- अब अमेरिका युद्ध लंबाने के पक्ष में नहीं
- यूक्रेन को कूटनीतिक समाधान पर सोचना होगा
- रूस पर सैन्य दबाव बनाए रखने में अमेरिका अब लीडर नहीं रहेगा
एक अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञ ने कहा:
“संदेश साफ है — लड़ाई कम करो, बातचीत ज्यादा।”
यूरोप की बेचैनी — नाटो की नींद उड़ गई
यूरोपीय नेताओं को डर है कि अगर अमेरिका पीछे हट गया तो —
- नाटो की संयुक्त रक्षा व्यवस्था कमजोर होगी
- रूस का मनोबल और बढ़ेगा
- पोलैंड और बाल्टिक राज्यों जैसी फ्रंट लाइन देश अधिक असुरक्षित होंगे
जर्मनी की विदेश मंत्री की टिप्पणी बेहद कड़ी रही:
“अमेरिका पीछे हटा तो यूरोप में सुरक्षा संकट गहराएगा।”
रूस की रणनीतिक मुस्कान — क्या यह ‘मोका’ है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार-बार कहते रहे हैं कि अमेरिका की “युद्ध निवेश क्षमता” सीमित है। ट्रंप की नीतियां उनके इस दावे को मजबूत कर रही हैं। क्रेमलिन का लक्ष्य:
- यूक्रेन की थकान बढ़ाना
- नाटो में दरार पैदा करना
- अमेरिका और यूरोप को अलग करना
ट्रंप का नया रवैया पुतिन को यह भरोसा दे रहा है कि उन्हें समय जीत रहा है।
वॉशिंगटन की राजनीति: रिपब्लिकन बनाम डेमोक्रेट
ट्रंप के रुख ने अमेरिकी राजनीति को दो धाराओं में बांट दिया है:
| धड़ा | नजरिया |
|---|---|
| रिपब्लिकन (ट्रंप समर्थक) | युद्ध समाप्त करो, खर्च बंद करो |
| डेमोक्रेट (बाइडन समर्थक) | यूक्रेन को छोड़ना लोकतंत्र की हार |
डेमोक्रेट सांसदों का कहना है:
“रूस को रोकना होगा, नहीं तो वह और आगे बढ़ेगा।”
ट्रंप की योजना: युद्ध का ‘डील-मोड’ समाधान
ट्रंप कहते हैं: “अगर मैं राष्ट्रपति बातचीत करूं तो 24 घंटे में युद्ध रोक दूंगा।”
उनकी रणनीति के मुख्य बिंदु:
✔ रूस को कुछ राजनीतिक आश्वासन
✔ यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर अस्थायी रोक
✔ पूर्वी यूक्रेन पर ‘कॉन्ट्रोल्ड सेटेलमेंट’
लेकिन आलोचक कहते हैं:
- यह समझौता यूक्रेन की संप्रभुता के खिलाफ होगा
- रूस को आक्रमण का इनाम मिलेगा
क्या यह ट्रंप का चुनावी दांव?
अमेरिका में चुनावी राजनीति हमेशा विदेश नीति को प्रभावित करती है। ट्रंप जानते हैं:
- वोटर थके हुए हैं
- टैक्सपेयर्स का पैसा विदेश में खर्च होना लोगों को मंजूर नहीं
- वैश्विक मदद के बजाय घरेलू मुद्दे गर्म हैं
इसलिए यूक्रेन युद्ध ट्रंप के लिए एक बड़ा चुनावी हथियार बन गया है।
बाइडन की मुश्किलें — ‘कमजोरी’ का लेबल
डेमोक्रेट सरकार कोशिश कर रही है कि ट्रंप की आलोचना को राष्ट्रहित के खिलाफ दिखाया जाए। लेकिन बदले माहौल में यह रणनीति कमजोर पड़ रही है। बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“हम दुनिया को सुरक्षित रख रहे हैं…
लेकिन देश में लोग आम जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
यह स्वीकारोक्ति— व्हाइट हाउस को भी अब राजनीतिक दबाव का एहसास है।
यूक्रेन की दुविधा — लड़ाई जारी रखे या मेज पर आए?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा:
“हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक अपना हर इंच वापस न ले लें।”
लेकिन सवाल यह है कि—
- क्या बिना अमेरिकी नेतृत्व के यह संभव है?
- क्या यूरोप अकेला यह युद्ध झेल पाएगा?
यूक्रेन का भविष्य अब अमेरिकी राजनीति के रुख पर टिका है।
विश्लेषण — दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है
यह युद्ध अब सिर्फ— यूक्रेन बनाम रूस नहीं रहा
यह बन चुका है—
- लोकतंत्र बनाम प्रभाव क्षेत्र की राजनीति
- अमेरिका बनाम चीन-रूस गठजोड़ का प्रॉक्सी युद्ध
- यूरोप की सुरक्षा क्षमता की परीक्षा
ट्रंप की नीतियां इस पूरी शक्ति व्यवस्था को उलटने की क्षमता रखती हैं।
निष्कर्ष: ट्रंप की एक कॉल और दुनिया बदल सकती है
अगर ट्रंप सहायता रोक देते हैं, तो—
- रूस बढ़त ले सकता है
- यूरोप को अपनी सुरक्षा खुद संभालनी होगी
- यूक्रेन जल्द समझौते की ओर धकेला जाएगा
- नाटो की विश्वसनीयता कमजोर होगी
और सबसे अहम— अमेरिका की विश्व राजनीति में भूमिका सवालों के घेरे में आ जाएगी।
ट्रंप ने संकेत दे दिया है— अमेरिका अब सबका ‘तारणहार’ नहीं बनेगा।
दुनिया बदल रही है… और इसकी दिशा का नियंत्रण फिलहाल व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बैठने वाले एक व्यक्ति के हाथ में है।
