रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध केवल टैंकों, मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं रह गया है। यह लड़ाई अब दिमाग, रणनीति और मनोवैज्ञानिक दबाव के स्तर तक पहुंच चुकी है। इसी जंग के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ रूस को झटका दिया बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। जिस आतंकी की मौत पर रूस में जश्न मनाया जा रहा था, वही अचानक जिंदा दिखाई दिया और उसके साथ ही एक बड़ा खुलासा भी हुआ।

यूक्रेन ने जिस तरह से रूस के एक कुख्यात आतंकी का इस्तेमाल करके मॉस्को को चूना लगाया, वह आधुनिक युद्ध में खुफिया रणनीतियों की एक अनोखी मिसाल बन गया है। इस पूरी कहानी के केंद्र में है रशियन वॉलेंटियर कॉर्प्स यानी RDK का प्रमुख डेनिस कपुस्टिन, जिसे रूस का गद्दार और सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है।
युद्धभूमि के बाहर भी जारी है टकराव
रूस-यूक्रेन युद्ध को अब कई साल बीत चुके हैं। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ताओं की कोशिशें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ दोनों देश एक-दूसरे को कमजोर करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। हाल ही में अमेरिकी राजनीति से जुड़े संकेतों के बीच यह उम्मीद जताई जा रही थी कि किसी समझौते की राह निकलेगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई।
इसी माहौल में यूक्रेन की एक ऐसी चाल सामने आई, जिसने यह साफ कर दिया कि यह युद्ध अब केवल सीमा रेखाओं तक सीमित नहीं है। इसमें आर्थिक नुकसान पहुंचाना भी एक बड़ा हथियार बन चुका है।
27 दिसंबर से शुरू हुई रहस्यमयी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 27 दिसंबर को हुई, जब अचानक खबर फैली कि रूस का सबसे बड़ा दुश्मन और RDK का मुखिया डेनिस कपुस्टिन एक ड्रोन हमले में मारा गया है। कपुस्टिन को व्हाइट रेक्स के नाम से भी जाना जाता है। वह मूल रूप से रूसी नागरिक है, लेकिन उसने अपने ही देश के खिलाफ हथियार उठा लिए थे और यूक्रेन के पक्ष में लड़ रहा था।
रूस के लिए यह खबर किसी बड़ी जीत से कम नहीं थी। जिस व्यक्ति को पकड़ने या मारने के लिए रूस ने इनाम घोषित कर रखा था, उसकी मौत की खबर ने रूसी सुरक्षा एजेंसियों में राहत की सांस भर दी।
मौत का जश्न और जल्दबाज़ी
डेनिस कपुस्टिन की कथित मौत की जिम्मेदारी एक अज्ञात समूह ने ली। बताया गया कि ड्रोन हमले में वह मारा गया है। रूस की खुफिया एजेंसियों ने बिना ज्यादा देरी किए उस समूह को बाउंटी की रकम ट्रांसफर कर दी। यह रकम थी पांच लाख डॉलर, जो भारतीय मुद्रा में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये बैठती है।
रूस में इस खबर को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया। सोशल मीडिया से लेकर सुरक्षा हलकों तक, इसे एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा गया। माना गया कि एक खतरनाक दुश्मन हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
नया साल और चौंकाने वाला वीडियो
लेकिन कहानी ने 1 जनवरी को अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यूक्रेन की ओर से एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें यूक्रेन के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल किरिलो बुडानोव के साथ वही ‘मरा हुआ’ डेनिस कपुस्टिन जिंदा खड़ा नजर आया।
इस वीडियो ने रूस में हड़कंप मचा दिया। जिस आतंकी की मौत पर जश्न मनाया जा रहा था, वह न सिर्फ जीवित था बल्कि पूरी दुनिया के सामने रूस को ठगने की कहानी भी सामने आ गई।
यूक्रेन के आर्मी चीफ का खुला कबूलनामा
वीडियो में जनरल किरिलो बुडानोव ने साफ शब्दों में बताया कि यह सब यूक्रेन की खुफिया एजेंसी GUR की सोची-समझी रणनीति थी। उन्होंने खुलासा किया कि कैसे रूस को गुमराह करने के लिए एक फेक मर्डर प्लान रचा गया।
इस योजना के तहत डेनिस कपुस्टिन की मौत का नाटक किया गया, ताकि रूस द्वारा घोषित इनाम की रकम हासिल की जा सके। जैसे ही रूस की खुफिया एजेंसियों ने बाउंटी की राशि ट्रांसफर की, यह पैसा यूक्रेन के हाथ आ गया।
‘डबल गेम’ की पूरी पटकथा
यूक्रेन ने इस पूरे ऑपरेशन को एक ‘डबल गेम’ बताया। एक तरफ रूस को यह यकीन दिलाया गया कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन खत्म हो चुका है, दूसरी तरफ उसी दुश्मन को जिंदा रखकर रूस से पैसे भी ऐंठ लिए गए।
जनरल बुडानोव ने यह भी कहा कि जो पैसा रूस से हासिल किया गया है, उसे अब रूस के खिलाफ चल रही जंग में ही इस्तेमाल किया जाएगा। यह बयान अपने आप में रूस के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका था।
कौन है डेनिस कपुस्टिन
डेनिस कपुस्टिन रूस के उन लोगों में से है, जिन्हें देशद्रोही माना जाता है। उसे रूस में दो बार उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। उसने RDK नाम के संगठन की स्थापना की, जिसमें रूस के पूर्व सैनिक और वैगनर ग्रुप के बागी शामिल हैं।
यह संगठन रूस की सीमा में घुसपैठ कर बम धमाके करने और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए कुख्यात है। यही वजह है कि रूसी सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से कपुस्टिन के पीछे पड़ी थीं।
रूस की खुफिया एजेंसियों पर सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद रूस की खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इतनी बड़ी रकम बिना पुख्ता पुष्टि के ट्रांसफर कर देना रूस के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की जल्दबाजी और दबाव में रूस ने एक बड़ी रणनीतिक गलती कर दी, जिसका फायदा यूक्रेन ने पूरी तरह उठाया।
आर्थिक नुकसान से ज्यादा प्रतीकात्मक चोट
चार करोड़ रुपये की रकम भले ही रूस जैसी बड़ी शक्ति के लिए बहुत बड़ी न हो, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बेहद बड़ा है। यह घटना दिखाती है कि युद्ध में केवल हथियार नहीं, बल्कि चालाकी और धैर्य भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
यूक्रेन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह न सिर्फ मोर्चे पर लड़ सकता है, बल्कि दिमागी खेल में भी रूस को मात दे सकता है।
युद्ध का नया चेहरा
यह पूरा घटनाक्रम आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। अब लड़ाइयां सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ी जा रहीं, बल्कि सूचनाओं, भ्रम और आर्थिक संसाधनों के जरिए भी दुश्मन को कमजोर किया जा रहा है।
डेनिस कपुस्टिन का ‘मुर्दा से जिंदा’ होना इसी नए दौर की जंग की सबसे चौंकाने वाली मिसाल बन गया है।
निष्कर्ष
यूक्रेन की इस खुफिया चाल ने रूस को न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि उसकी साख पर भी सवाल खड़े कर दिए। जिस आतंकी की मौत पर जश्न मनाया गया, वही जिंदा होकर रूस के लिए एक नया सिरदर्द बन गया। यह घटना लंबे समय तक रूस-यूक्रेन युद्ध की सबसे चर्चित कहानियों में गिनी जाएगी।
